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Barabanki News: जमुरिया नाला पर बनेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
Thu, 25 Jul 2024 02:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 25 Jul 2024 02:44 AM IST
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बाराबंकी। जमुरिया नाला से गंदा पानी रेठ नदी से होते हुए गोमती नदी में न जाए, इसके लिए नमामि गंगे मिशन के तहत करीब 124 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। इस प्लांट को बनाने के लिए जमुरिया नाला व रेठ नदी के समागम स्थल के निकट जल निगम अयोध्या के अधिकारियों ने निरीक्षण कर दस एकड़ जमीन की जरूरत जताई है। जिला प्रशासन की तरफ से जमीन की खोज का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
जमुरिया नाले में शहर का सारा गंदा पानी छोड़ा जाता है जो आगे जाकर जगनेहटा के समीप रेठ नदी से मिल जाता है। रेठ नदी इसी गंदे पानी के साथ गोमती नदी से मिलती है। ऐसे में गोमती में बढ़ रहे जल प्रदूषण को रोकने के लिए डीएम सत्येंद्र कुमार की पहल पर नमामि गंगे मिशन के तहत नाले का पानी स्वच्छ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कवायद शुरू हुई है। इसके लिए जल निगम अयोध्या के अधिशासी अभियंता अरविंद यादव, सहायक अभियंता अश्वनी कुमार ने प्लांट लगाने के लिए मौके का स्थलीय सर्वेक्षण कर दस एकड़ जमीन की जरूरत जताई है। निरीक्षण टीम ने नगर पालिका व तहसील प्रशासन से नाले का नक्शा व अन्य दस्तावेज भी एकत्रित किए। ट्रीटमेंट प्लांट लगाने से लेकर अगले 15 साल तक संचालन के लिए करीब 124 करोड़ रुपये खर्च होंगे। (संवाद)
सहायक अभियंता अश्वनी कुमार ने बताया कि सिक्वेंशल बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक से इस एसटीपी को बनाया जाएगा। इसके तहत चार चरणों में सीवरयुक्त पानी को साफ किया जाएगा। ताकि ठोस एवं तरल अपशिष्टों को पूरी तरह अलग किया जा सके। प्लांट की क्षमता करीब 30 मिलियन लीटर प्रतिदिन होगी।
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वर्तमान में नाले से करीब 16 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन नाले से नदी में गिर रहा है। हालांकि शहर में जल निगम की ओर से बॉयो रेमिडेशन कार्य कराया जा रहा है। जमीन मिलने के बाद प्लांट का डीपीआर नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा दिल्ली को भेजा जाएगा। डीएम ने बताया कि जमुरिया नाले से रेठ नदी में जाने वाले पानी को साफ करने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। इसके लिए प्रशासन जल्दी जमीन मुहैया कराएगा।
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जमुरिया नाले में शहर का सारा गंदा पानी छोड़ा जाता है जो आगे जाकर जगनेहटा के समीप रेठ नदी से मिल जाता है। रेठ नदी इसी गंदे पानी के साथ गोमती नदी से मिलती है। ऐसे में गोमती में बढ़ रहे जल प्रदूषण को रोकने के लिए डीएम सत्येंद्र कुमार की पहल पर नमामि गंगे मिशन के तहत नाले का पानी स्वच्छ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कवायद शुरू हुई है। इसके लिए जल निगम अयोध्या के अधिशासी अभियंता अरविंद यादव, सहायक अभियंता अश्वनी कुमार ने प्लांट लगाने के लिए मौके का स्थलीय सर्वेक्षण कर दस एकड़ जमीन की जरूरत जताई है। निरीक्षण टीम ने नगर पालिका व तहसील प्रशासन से नाले का नक्शा व अन्य दस्तावेज भी एकत्रित किए। ट्रीटमेंट प्लांट लगाने से लेकर अगले 15 साल तक संचालन के लिए करीब 124 करोड़ रुपये खर्च होंगे। (संवाद)
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सहायक अभियंता अश्वनी कुमार ने बताया कि सिक्वेंशल बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक से इस एसटीपी को बनाया जाएगा। इसके तहत चार चरणों में सीवरयुक्त पानी को साफ किया जाएगा। ताकि ठोस एवं तरल अपशिष्टों को पूरी तरह अलग किया जा सके। प्लांट की क्षमता करीब 30 मिलियन लीटर प्रतिदिन होगी।
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वर्तमान में नाले से करीब 16 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन नाले से नदी में गिर रहा है। हालांकि शहर में जल निगम की ओर से बॉयो रेमिडेशन कार्य कराया जा रहा है। जमीन मिलने के बाद प्लांट का डीपीआर नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा दिल्ली को भेजा जाएगा। डीएम ने बताया कि जमुरिया नाले से रेठ नदी में जाने वाले पानी को साफ करने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। इसके लिए प्रशासन जल्दी जमीन मुहैया कराएगा।