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Barabanki News: खेतिहर क्षेत्र में अवसाद के बीज, लोग दे रहे जान
Wed, 10 Sep 2025 01:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:41 AM IST
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बाराबंकी। कोठी क्षेत्र के सधई भगत पुरवा गांव की मिथिलेश कुमारी ने 13 अगस्त को अपने दो बच्चों के साथ नदी में छलांग लगा दी। बडे़ बेटे का शव मिला मगर मिथिलेश व उसके छोटे पुत्र का आज तक कोई सुराग नहीं लगा। परिजन इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। यह तो बस बानगी है, क्योंकि खेती, किसानी, धार्मिक सद्भाव और पर्यटन स्थल के लिए पहचाने जाने वाले बाराबंकी के लोगों में अवसाद तेजी से घर कर रहा है। इस कारण आत्महत्या की घटनाएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं।
हालात इस हद तक बिगड़ चुके हैं कि हर महीने औसतन 10 से 15 लोग अपना जीवन असमय ही खत्म कर जान दे रहे हैं। कई बार तो एक ही दिन में तीन से चार लोग मौत को गले लगा लेते हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने वालों में बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। जिनकी उम्र महज 13 से 17 साल के बीच है।
जुलाई 2025 में 15 से अधिक लोगों के खुदकुशी करने की घटनाएं सामने आईं, मतलब हर दूसरे दिन एक आत्महत्या। अगस्त 2024 से अगस्त 2025 के बीच 150 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की। इनमें माता-पिता की मामूली डांट से आहत कई मासूम बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, पत्नी का मायके चले जाना व अन्य घरेलू विवाद भी आत्महत्या को बढ़ावा दे रहे हैं।
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खास घटनाएं
- देवा के पटना गांव में एक अगस्त 2024 को 13 साल की छात्रा लक्ष्मी ने घर में फंदे से लटक कर जान दे दी।
- रामसनेहीघाट के शुक्लन पुरवा में 25 मई 2025 को सत्यम का शव शादी के मात्र 11 दिन बाद फंदे से लटका मिला।
- जहांगीराबाद के मेड़िया गांव में 17 अगस्त 2024 को 16 वर्षीय कोमल का शव फंदे से लटका मिला। आत्महत्या के कारणों का आज तक पता नहीं चल सका।
- बदोसराय क्षेत्र के किंतूर गांव में 30 अगस्त 2025 को पिता की डांट से आहत 15 साल की सुधा ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।
किशोर व युवावस्था जीवन का सबसे नाजुक दौर होता है। ऐसे में अगर परिवार और समाज का भावनात्मक सहारा न मिले तो अवसाद में लोग ऐसा कदम उठा लेते हैं। इसलिए बच्चों की समस्याओं को सुनें और संवाद बढ़ाएं।
डाॅ. आरती यादव, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
फोटो-10
परिवार का सहयोग व विशेषज्ञ की मदद जरूरी
आत्महत्या के पीछे अक्सर गहरी निराशा, अवसाद, आर्थिक बोझ, पारिवारिक कलह, नशे की लत और सामाजिक दबाव जैसे कारण होते हैं। समय रहते मन की बात साझा करना, परिवार का सहयोग व विशेषज्ञ की मदद सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
डाॅ. शैली श्रीवास्तव, प्रवक्ता मनोवैज्ञानिक, सरदार पटेल महिला पीजी कॉलेज
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हालात इस हद तक बिगड़ चुके हैं कि हर महीने औसतन 10 से 15 लोग अपना जीवन असमय ही खत्म कर जान दे रहे हैं। कई बार तो एक ही दिन में तीन से चार लोग मौत को गले लगा लेते हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने वालों में बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। जिनकी उम्र महज 13 से 17 साल के बीच है।
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जुलाई 2025 में 15 से अधिक लोगों के खुदकुशी करने की घटनाएं सामने आईं, मतलब हर दूसरे दिन एक आत्महत्या। अगस्त 2024 से अगस्त 2025 के बीच 150 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की। इनमें माता-पिता की मामूली डांट से आहत कई मासूम बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, पत्नी का मायके चले जाना व अन्य घरेलू विवाद भी आत्महत्या को बढ़ावा दे रहे हैं।
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खास घटनाएं
- देवा के पटना गांव में एक अगस्त 2024 को 13 साल की छात्रा लक्ष्मी ने घर में फंदे से लटक कर जान दे दी।
- रामसनेहीघाट के शुक्लन पुरवा में 25 मई 2025 को सत्यम का शव शादी के मात्र 11 दिन बाद फंदे से लटका मिला।
- जहांगीराबाद के मेड़िया गांव में 17 अगस्त 2024 को 16 वर्षीय कोमल का शव फंदे से लटका मिला। आत्महत्या के कारणों का आज तक पता नहीं चल सका।
- बदोसराय क्षेत्र के किंतूर गांव में 30 अगस्त 2025 को पिता की डांट से आहत 15 साल की सुधा ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।
किशोर व युवावस्था जीवन का सबसे नाजुक दौर होता है। ऐसे में अगर परिवार और समाज का भावनात्मक सहारा न मिले तो अवसाद में लोग ऐसा कदम उठा लेते हैं। इसलिए बच्चों की समस्याओं को सुनें और संवाद बढ़ाएं।
डाॅ. आरती यादव, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
फोटो-10
परिवार का सहयोग व विशेषज्ञ की मदद जरूरी
आत्महत्या के पीछे अक्सर गहरी निराशा, अवसाद, आर्थिक बोझ, पारिवारिक कलह, नशे की लत और सामाजिक दबाव जैसे कारण होते हैं। समय रहते मन की बात साझा करना, परिवार का सहयोग व विशेषज्ञ की मदद सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
डाॅ. शैली श्रीवास्तव, प्रवक्ता मनोवैज्ञानिक, सरदार पटेल महिला पीजी कॉलेज