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फिटनेस लायक ही नहीं वाहन, शपथ पत्र दे रहे स्कूल
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बाराबंकी। अनफिट होने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रहे स्कूली वाहनों की दिन पर दिन पोल खुलती जा रही है। तमाम स्कूली बसें व वैन फिटनेस प्रमाण पत्र के लायक ही नहीं है। फिटनेस पाने के लिए स्कूल संचालकों को इन वाहनों पर खर्च करना पड़ेगा।
इसे देखते हुए कई स्कूल संचालकों ने इस बात का शपथ पत्र दे दिया है कि वह बसों का संचालन नहीं करेंगे। यह भी कह रहे हैं कि कोई दुुर्घटना होगी तो वह जिम्मेदार नहीं होंगेे। पिछले एक सप्ताह में केवल एक दर्जन स्कूलों द्वारा ही अपने वाहनों का फिटनेस कराया गया। अभी 300 स्कूल वाहनों का फिटनेस होना बाकी है।
गाजियाबाद हादसे के बाद जब परिवहन आयुक्त ने स्कूल वाहनों की फिटनेस को लेकर फटकार लगाई तो एआरटीओ ने छानबीन शुरू की। जिले के 906 स्कूल वाहनों में से 315 बिना फिटनेस के पाए गए थे। एआरटीओ ने इसे लेकर सभी 235 वाहनों के स्कूल संचालकों को नोटिस भी दिया। समाचार पत्रों में सूचनाएं प्रकाशित कराई गईं। मगर बीते एक सप्ताह में करीब एक दर्जन स्कूली वाहनों का ही फिटनेस हो सका है। दरअसल, तमाम स्कूल बसें व वैन फिटनेस लायक ही नहीं हैं।
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इसलिए फिटनेस कराने की बजाय स्कूल संचालक इस बात का शपथ पत्र दे रहे हैं कि वाहनों को संचालित ही नहीं करेंगे। एआरटीओ ने जब स्कूल संचालकों से यह कहा कि इतने से काम नहीं चलेगा। फिटनेस तो कराना ही पड़ेगा। इसके बाद अब स्कूल संचालक शपथ-पत्र में यह भी लिखकर दे रहे हैं कि स्कूली वाहन से कोई दुर्घटना हो तो स्वयं जिम्मेदार नहीं होंगे। करीब आधा दर्जन स्कूल इस बात का शपथ पत्र एआरटीओ को दे चुके हैं।
सीट बेल्ट व रॉड न होने की समस्या
फिटनेस के दौरान स्कूल बसों में कई प्रकार के मानकों पर पड़ताल होती है। जांच के दौरान स्कूल बस व वैन में सीट बेल्ट व रॉड की कमियां पाईं जा रही हैं। काफी कम संख्या में फिटनेस के आवेदन आ रहे हैं। इससे परिवहन विभाग के अधिकारी हलकान हैं।
अभी ज्यादा फिटनेस नहीं हो पा रहे हैैं। इसके लिए चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। दफ्तर में कैंप लगाया गया है। बिना फिटनेस के संचालित पाए जा रहे वाहनों को सीज किया जा रहा है।
-पंकज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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इसे देखते हुए कई स्कूल संचालकों ने इस बात का शपथ पत्र दे दिया है कि वह बसों का संचालन नहीं करेंगे। यह भी कह रहे हैं कि कोई दुुर्घटना होगी तो वह जिम्मेदार नहीं होंगेे। पिछले एक सप्ताह में केवल एक दर्जन स्कूलों द्वारा ही अपने वाहनों का फिटनेस कराया गया। अभी 300 स्कूल वाहनों का फिटनेस होना बाकी है।
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गाजियाबाद हादसे के बाद जब परिवहन आयुक्त ने स्कूल वाहनों की फिटनेस को लेकर फटकार लगाई तो एआरटीओ ने छानबीन शुरू की। जिले के 906 स्कूल वाहनों में से 315 बिना फिटनेस के पाए गए थे। एआरटीओ ने इसे लेकर सभी 235 वाहनों के स्कूल संचालकों को नोटिस भी दिया। समाचार पत्रों में सूचनाएं प्रकाशित कराई गईं। मगर बीते एक सप्ताह में करीब एक दर्जन स्कूली वाहनों का ही फिटनेस हो सका है। दरअसल, तमाम स्कूल बसें व वैन फिटनेस लायक ही नहीं हैं।
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इसलिए फिटनेस कराने की बजाय स्कूल संचालक इस बात का शपथ पत्र दे रहे हैं कि वाहनों को संचालित ही नहीं करेंगे। एआरटीओ ने जब स्कूल संचालकों से यह कहा कि इतने से काम नहीं चलेगा। फिटनेस तो कराना ही पड़ेगा। इसके बाद अब स्कूल संचालक शपथ-पत्र में यह भी लिखकर दे रहे हैं कि स्कूली वाहन से कोई दुर्घटना हो तो स्वयं जिम्मेदार नहीं होंगे। करीब आधा दर्जन स्कूल इस बात का शपथ पत्र एआरटीओ को दे चुके हैं।
सीट बेल्ट व रॉड न होने की समस्या
फिटनेस के दौरान स्कूल बसों में कई प्रकार के मानकों पर पड़ताल होती है। जांच के दौरान स्कूल बस व वैन में सीट बेल्ट व रॉड की कमियां पाईं जा रही हैं। काफी कम संख्या में फिटनेस के आवेदन आ रहे हैं। इससे परिवहन विभाग के अधिकारी हलकान हैं।
अभी ज्यादा फिटनेस नहीं हो पा रहे हैैं। इसके लिए चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। दफ्तर में कैंप लगाया गया है। बिना फिटनेस के संचालित पाए जा रहे वाहनों को सीज किया जा रहा है।
-पंकज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन