फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   school

इंग्लिश से फिर हिन्दी मीडियम पढ़ेंगे 114 प्राइमरी स्कूलों के बच्चे

Sat, 23 Apr 2022 12:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2022 12:42 AM IST
विज्ञापन
school
बाराबंकी। सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई करने वाले करीब 50 हजार बच्चे अब फिर हिन्दी मीडियम पढ़ेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह बच्चे कक्षा पांच पास करके कक्षा 6 में गए हैं और इनके सामने हिन्दी मीडियम स्कूल ही है। अगर इन्हें आगे भी अंग्रेजी माध्यम पढ़ाई करनी है तो फिर निजी स्कूलों की शरण में जाना पड़ेगा। इन बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों के शैक्षिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
विज्ञापन

जिले में कुल 2636 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 1792 प्राथमिक व 475 पूर्व माध्यमिक व 369 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन्हीं में से 114 प्राइमरी व 46 कंपोजिट व पांच पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई शुरू कराई गई थी। इस बार करीब 54 हजार बच्चों ने कक्षा पांच पास किया है।
विज्ञापन

इनमें इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल के करीब पांच से छह हजार बच्चे भी शामिल हैं। अगली कक्षा में पढ़ने के लिए उन्हें प्राथमिक विद्यालय छोड़कर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में जाना है। लेकिन इन बच्चों में अधिकतर बच्चों के गांव में जो पूर्व माध्यमिक विद्यालय है वह हिन्दी मीडियम हैं। ये बच्चे अगर सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे तो हिन्दी मीडियम स्कूल ही मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

अगर उन्हें आगे इंगलिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई करनी है तो निजी विद्यालय की शरण लेनी पड़ेगी। गरीब तबके के अभिभावक मंहगी फीस अदा नहीं कर सकते। ऐसी हालत में इन्हें हिन्दी मीडियम ही पढ़ना पड़ेगा। इस अव्यवस्था पर अभिभावक संघ के सदस्य राजेंद्र सिंह गुड्डू कहते हैं कि आखिर जब हिन्दी मीडियम पढ़ना था तो कक्षा पांच तक ही इंग्लिश मीडियम की व्यवस्था क्यों की गई। (संवाद)
नई शिक्षा नीति दे रही मातृ भाषा को प्राथमिकता
परिषदीय विद्यालयों में सरकार अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने पर जोर दे रही है। आए दिन इसे लेकर शासनादेश जारी हो रहे हैं वहीं नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। शिक्षा नीति के पेज नम्बर 19 पर बिंदु संख्या 4.11 में उल्लेख किया गया है कि छोटे बच्चे अपनी घर की भाषा या मातृभाषा में ही सार्थक अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझते हैं।
कहा गया है कि कम से कम कक्षा 5 तक मातृ भाषा को प्राथमिकता दी जाय। हो सके तो कक्षा आठ तक मातृभाषा पर जोर दिया जाय। एक खंड शिक्षाधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि शासनादेश का पालन करें तो मातृ भाषा छूट रही है और शिक्षा नीति लागू हो तो अंग्रेजी माध्यम समाप्त करना पड़ेगा।

जिन बच्चों को कक्षा पांच तक की शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी गई है उनके लिए सरकार गांव में आगे भी अंग्रेजी माध्यम की व्यवस्था करे। इसके लिए पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया जाना चाहिए।
-आशुतोष आनंद अवस्थी, राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक
फिलहाल जो व्यवस्था है उसी के हिसाब से बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। कोशिश रहेगी कि इन बच्चों को आसपास के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से जोड़ा जाय।
-अमित कुमार, प्रभारी बीएसए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed