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Barabanki News: कोयला भट्ठियों के संचालन के खेल में सरताज का डेढ़ दशक से था राज

Thu, 11 Dec 2025 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 11 Dec 2025 11:20 PM IST
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Sartaj had been ruling the game of operating coal furnaces for a decade and a half
डलमऊ क्षेत्र में इस तरह धधक रही कोयले की भट्ठियां।
धर्मेश त्रिवेदी
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रायबरेली। छतौना निवासी सरताज खां करीब डेढ़ दशक से नियमों को ताक पर रखकर कोयला भट्ठियों के संचालन के खेल में राज कर रहा था। उसकी धमक व पैठ के आगे नियम ताक पर थे। स्थानीय, जिले से लेकर लखनऊ तक में बैठे वन विभाग व पुलिसकर्मियों के बीच उसकी इतनी अच्छी पैठ थी कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कोयला भट्ठियों का संचालन बंद नहीं कराया गया। हाईकोर्ट की लखनऊ खंड पीठ ने सख्ती दिखाई तो बुधवार को 18 कोयला भट्ठियों का संचालन न सिर्फ बंद कराया गया, बल्कि उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
करीब डेढ़ दशक पहले ने सरताज खां ने उसरू गांव में कोयला भट्ठियों का संचालन शुरू किया था। चाहे फिर वन विभाग रहा हो या फिर पुलिस महकमा। सब उसके मुरीद ही रहे। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो कभी किसी ने आवाज भी उठाई तो पैसे के बल पर उसका मुह बंद कर दिया। बात नहीं बनी तो धमकाने से भी बाज नहीं आया। सरेनी रेंज के वन दरोगा देवानंद सिंह ने 19 सितंबर 2025 को छतौना निवासी भट्ठी संचालक सरताज खां के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था। 22 जून 2023 को भट्ठियों का लाइसेंस तक निरस्त कर दिया गया था। सरताज की पैठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतना सबकुछ होने के बाद भी कोयले भट्ठियां का संचालन बंद नहीं हो पाया। प्रतिमाह कोयला भट्ठियों से लाखों रुपये की कमाई होती थी। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की सख्ती के बाद सरताज ने भट्ठियों पर जमा लकड़ी व कोयले को भट्ठे पर पहुंचा दिया।
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सही हुई जांच तो कइयों पर गिरेगी गाज
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रमुख वन संरक्षक को वन विभाग के अधिकारियों और डीएम रायबरेली को पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसकी जांच भी जिले स्तर पर शुरू करा दी गई है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जांच सही तरीके से हुई तो रायबरेली से लेकर लखनऊ में बैठे वन विभाग के अफसरों, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियोंं पर गाज गिरनी तय है। मामला तूल पकड़ने के बाद विभागीय अधिकारी व कर्मचारी को खुद बचाने का रास्ता खोज रहे हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यह मामला शासन तक भी पहुंच गया है।
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दोगुना संचालित हो रही कोयला भट्ठियां
वन विभाग का दावा है कि जिले में करीब 75 कोयला भटिठयों के लाइसेंस जारी किए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि लाइसेंस के आड़ में दोगुना से ज्यादा कोयला भट्ठियों का संचालन किया जा रहा है। डलमऊ के गंगा के किनारे बड़े पैमाने पर कोयला भट्ठियां संचालित हैं। रायबरेली शहर, भदोखर, हरचंदपुर के अलावा गदागंज इलाके में भी नियमों को ताक पर रखकर कोयला भट्ठियां संचालित की जा रही हैं।

इनसेट
सरेनी में कोयला भट्ठियों का संचालन बंद करा दिया गया है। उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करा दी गई है। अन्य स्थानों पर संचालित कोयला भट्ठियों की जांच कराई जा रही है। कहीं पर बिना लाइसेंस के कोयला भट्ठियों का संचालन मिलता है तो उन्हें बंद कराया जाएगा। साथ ही कोयला भट्ठियां संचालित करने वालों पर कार्रवाई भी कराई जाएगी।
प्रखर मिश्रा, डीएफओ
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