{"_id":"57a8cba54f1c1bb561ee4809","slug":"ring-dam-offloading-fast-5-villages-evacuated","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिंग बांध में भी कटान तेज, 5 गांव खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिंग बांध में भी कटान तेज, 5 गांव खाली
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Mon, 08 Aug 2016 11:42 PM IST
विज्ञापन
रिंग बांध को बढ़ा खतरा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एल्गिन-चरसड़ी तटबंध को बाढ़ खंड के अधिकारी तमाम प्रयासाें के बाद भी नदी में समाने से बचा नहीं पाए। देर रात नदी का पानी 20 मीटर चौड़े बंधे के 150 मीटर से अधिक भाग को काटकर बहा ले गया है। इसके अलावा बंधे के पास बनाया गया रिंग बांध भी सोमवार को 5 मीटर तक कट गया। जिससे एहतियात के तौर पर रायपुर और परसावल गांव को खाली करा लिया है।
पानी अभी गांव के किनारे तक है लेकिन जैसे ही पानी बढ़ेगा तो रिंग बांध टूटने के कारण इन गांवों में तेजी से पानी भर जाएगा। लेकिन सोमवार की दोपहर से पानी के बहाव की रफ्तार एकदम से धीमी हो गई। फिर भी प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार रविवार की गोंडा जिले के नकहरा गांव के निकट किलोमीटर संख्या 10.520 के पास बने एल्गिन-चरसड़ी बांध का जो एक मीटर भाग बचा था देर रात वह भी नदी में समा गया।
विज्ञापन
देखते ही देखते घाघरा नदी के पानी ने रिंग बांध को भी अपनी चपेट में ले लिया है। नदी का पानी तटबंध के करीब 150 मीटर तक कटान कर चुका है और 20 मीटर चौड़ा पूरा बांध नदी में समा गया। सोमवार को रिंग बांध के भीतर पानी को रोकने का प्रयास भी विफल रहा। और रिंग बांध भी बह गया। उधर नदी कटान करते हुए लगातार अपना दायरा बढ़ा रही है।
बांध के बाहरी हिस्से से अगल-बगल के खेतों में पानी भरने लगा है। लेकिन जिस तेजी के साथ पानी बढ़ रहा था दोपहर बाद उसकी रफ्तार में कमी आई है। अब यदि नदी का पानी बढ़ता है तभी यह गांवों तक पहुंच सकेगा। मौजूदा समय में घाघरा में पानी सतह से जमीन की सतह के बराबर बह रहा है इसलिए पानी का फैलाव नहीं हो पा रहा है।
लोगों का कहना कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो अचानक करनैलगंज क्षेत्र बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। रविवार को घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से जहां 16 सेमी ऊपर बह रहा था वहीं देर रात पानी बढ़ने से यह खतरे के निशान को पार कर 29 सेमी ऊपर बहने लगा है।
ग्रामीणों का पलायन तेज
बांध के कटने की दहशत से ही तबाही दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का पलायन तेज हो गया है। दहशतजदा ग्रामीणों में जल्दी अपना आशियाना खाली करने की जैसे होड़ लगी हो। गांवों को खाली कराने में प्रशासन ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं कर रहा है।
संसाधनों के अभाव में कोई बैलगाड़ी से तो कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली से सामान की ढुलाई कर रहा है। तमाम ऐसे लोग भी हैं। जिनके पास कोई संसाधन नहीं है तो धीरे-धीरे साइकिल या ठेले से सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ग्रामीण अपने आशियाने एंव खेती बारी को भगवान भरोसे छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
विधायक ने लिया जायजा
करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह सुबह 6 बजे स्वंय बांध पर पहुंच गए। तथा कट चुके बांध के बाद रिंग बांध को अपने सामने मजबूत कराने का कार्य तेज कराया मगर नदी ने जब उसे आगे से कटान करना शुरू किया तो दोनों बांधों पर बचाव कार्य शुरू कराया फिर भी नदी की तेज धारा के आगे एक न चली। विधायक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सिंचाई मंत्री व मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराया।
तीसरी बार कटा बांध
सूत्रों की माने तो बांध के निर्माण का कार्य वर्ष 2006 में शुरू हुआ था और 2008 में यह बनकर तैयार हो गया था। 54 किमी लंबे इस बांध के निर्माण पर करीब एक अरब रुपया खर्च होने की बात कही जा रही है। लेकिन जिस स्थान पर बांध कटा है उसी के आस-पास वर्ष 2009 और 2011 में इससे पहले भी कट चुका है। इस प्रकार तीसरी बार यह बांध इसी क्षेत्र के आस-पास कटा है।
एल्गिन चरसड़ी तटबंध की स्थिति रविवार को देख कर ही यह पता चल गया था कि बांध को बचा पाना मुश्किल है। फिर भी मरम्मत का कार्य किया जा रहा था लेकिन रात में पानी बढ़ने की वजह से बांध उसी में बह गया। इससे जिले के पांच गांव प्रभावित होंगे लेकिन नदी में पानी कम होने की वजह से अभी यह गांवों तक नहीं पहुंचा है। एहतियात के तौर पर गांवों को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है और पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी
विज्ञापन
पानी अभी गांव के किनारे तक है लेकिन जैसे ही पानी बढ़ेगा तो रिंग बांध टूटने के कारण इन गांवों में तेजी से पानी भर जाएगा। लेकिन सोमवार की दोपहर से पानी के बहाव की रफ्तार एकदम से धीमी हो गई। फिर भी प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन
टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार रविवार की गोंडा जिले के नकहरा गांव के निकट किलोमीटर संख्या 10.520 के पास बने एल्गिन-चरसड़ी बांध का जो एक मीटर भाग बचा था देर रात वह भी नदी में समा गया।
विज्ञापन
देखते ही देखते घाघरा नदी के पानी ने रिंग बांध को भी अपनी चपेट में ले लिया है। नदी का पानी तटबंध के करीब 150 मीटर तक कटान कर चुका है और 20 मीटर चौड़ा पूरा बांध नदी में समा गया। सोमवार को रिंग बांध के भीतर पानी को रोकने का प्रयास भी विफल रहा। और रिंग बांध भी बह गया। उधर नदी कटान करते हुए लगातार अपना दायरा बढ़ा रही है।
बांध के बाहरी हिस्से से अगल-बगल के खेतों में पानी भरने लगा है। लेकिन जिस तेजी के साथ पानी बढ़ रहा था दोपहर बाद उसकी रफ्तार में कमी आई है। अब यदि नदी का पानी बढ़ता है तभी यह गांवों तक पहुंच सकेगा। मौजूदा समय में घाघरा में पानी सतह से जमीन की सतह के बराबर बह रहा है इसलिए पानी का फैलाव नहीं हो पा रहा है।
लोगों का कहना कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो अचानक करनैलगंज क्षेत्र बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। रविवार को घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से जहां 16 सेमी ऊपर बह रहा था वहीं देर रात पानी बढ़ने से यह खतरे के निशान को पार कर 29 सेमी ऊपर बहने लगा है।
ग्रामीणों का पलायन तेज
बांध के कटने की दहशत से ही तबाही दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का पलायन तेज हो गया है। दहशतजदा ग्रामीणों में जल्दी अपना आशियाना खाली करने की जैसे होड़ लगी हो। गांवों को खाली कराने में प्रशासन ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं कर रहा है।
संसाधनों के अभाव में कोई बैलगाड़ी से तो कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली से सामान की ढुलाई कर रहा है। तमाम ऐसे लोग भी हैं। जिनके पास कोई संसाधन नहीं है तो धीरे-धीरे साइकिल या ठेले से सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ग्रामीण अपने आशियाने एंव खेती बारी को भगवान भरोसे छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
विधायक ने लिया जायजा
करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह सुबह 6 बजे स्वंय बांध पर पहुंच गए। तथा कट चुके बांध के बाद रिंग बांध को अपने सामने मजबूत कराने का कार्य तेज कराया मगर नदी ने जब उसे आगे से कटान करना शुरू किया तो दोनों बांधों पर बचाव कार्य शुरू कराया फिर भी नदी की तेज धारा के आगे एक न चली। विधायक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सिंचाई मंत्री व मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराया।
तीसरी बार कटा बांध
सूत्रों की माने तो बांध के निर्माण का कार्य वर्ष 2006 में शुरू हुआ था और 2008 में यह बनकर तैयार हो गया था। 54 किमी लंबे इस बांध के निर्माण पर करीब एक अरब रुपया खर्च होने की बात कही जा रही है। लेकिन जिस स्थान पर बांध कटा है उसी के आस-पास वर्ष 2009 और 2011 में इससे पहले भी कट चुका है। इस प्रकार तीसरी बार यह बांध इसी क्षेत्र के आस-पास कटा है।
एल्गिन चरसड़ी तटबंध की स्थिति रविवार को देख कर ही यह पता चल गया था कि बांध को बचा पाना मुश्किल है। फिर भी मरम्मत का कार्य किया जा रहा था लेकिन रात में पानी बढ़ने की वजह से बांध उसी में बह गया। इससे जिले के पांच गांव प्रभावित होंगे लेकिन नदी में पानी कम होने की वजह से अभी यह गांवों तक नहीं पहुंचा है। एहतियात के तौर पर गांवों को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है और पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी