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अपने को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद

Mon, 16 Nov 2015 10:22 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 16 Nov 2015 10:22 PM IST
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नवंबर आते ही पेंशनरों को अपने को जीवित साबित करने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। पेंशन ले रहे सभी लोग अपने जीवित होने का प्रमाण कोषागार में जमा कर रहे हैं। सोमवार को कोषागार में भारी भीड़ रही। कोई आधार कार्ड नहीं होने हलाकान रहा तो कोई बीमारी से परेशान रहा। हालांकि लोगों की मदद के लिए परिसर में दो टेबिले लगाई गई थी। जहां लोगों के फार्म भरे जा रहे थे।
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जनपद में 10144 पेंशनर्स हैं। इनमें से करीब पचास फीसदी लोगों ने अपने जीवित होने का प्रमाण कोषागार में जमा कर दिया है, लेकिन अभी भी रोजाना कोषागार में पेंशनरों की भीड़ लग रही है। लेकिन जानकारी के अभाव में इन पेेंशनरों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। कोई आधार कार्ड नहीं होने से परेशान हैं तो दूर आने से। सोमवार को भी ट्रेजरी में जीवित प्रमाण पत्र जमा करने वालों की भीड़ रही।
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दूरी के कारण हो रही परेशानी
सहादतगंज के राजेंद्र बक्स सिंह बेसिक शिक्षा विभाग से प्रधान अध्यापक पद से वर्ष 2012 में सेवा निवृत्त हुए। उन्होंने बताया कि विभाग में भीड़ को छोड़ फार्म जमा करने में कोई समस्या नहीं आ रही है। उन्होंने बताया कि दूरी के चलते लोगों को परेशानी होती है।
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एक काउंटर से दिक्कत
बेसिक शिक्षा विभाग में प्रधान अध्यापक पद से सहादतगंज के रामबक्स सिंह वर्ष 2001 में सेवा निवृत्त हुए थे। वह बताते हैं कि ट्रेजरी में काफी भीड़ होने और एक काउंटर होने से परेशानी हो रही है। इसके अलावा दूरी के चलते भी बुजुर्ग पेंशनरों को आने जाने में परेशानी हो रही है।

बिना आधार जमा किया फार्म
कोटवा निवासी गनेसी की आयु करीब 70 साल है। वह तहसील कर्मचारी रहे। इनके पास आधार कार्ड नहीं होने से हलकान रहे। अन्य पेंशनरों से पूछताछ की लेकिन आधार कार्ड का कोई विकल्प नहीं मिलने से वह इधर उधर भटकने के बाद फार्म ऐसे ही जमा कर दिया। उन्होंने दूसरे के सहयोग से फार्म भरा।

आंखों की कम रोशनी बनी परेशानी
सफेदाबाद में रहने वाली सूरसती के पति कारागार में सिपाही थे। उनकी मौत के बाद से सूरसती को पेंशन मिल रही है। उन्हें आंखों से कम दिखाई देता है। वह अपने भांजे दिनेश के साथ पेंशन लेने के लिए आई थी। वह अपने हस्ताक्षर नहीं बना पा रही थी। जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी।

एक दूसरे की मदद का सहारा
जिला कोषागार में पेंशनरों की मदद के लिए दो मेजों की व्यवस्था की गई थी। जहां पर लोगों की मदद की जा रही थी। बुजुर्गों को परेशानी होने पर फार्म भरने में एक दूसरे की मदद कर रहे थे। परिसर व अंदर बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी। पेंशनरों ने बताया कि ट्रेजरी से मिलने वाले फार्म पर पीपीओ नंबर, बैंक पासबुक नंबर व आधार कार्ड की फोटो कॉपी ही लगानी थी। जिससे लोगों को कोई खास परेशानी नहीं रही।


पेंशनरों की सुविधाओं का पूरा ध्यान दिया जा रहा है। बैठने व फार्म भरने में सहयोग की भी व्यवस्था है। आधार कार्ड की कोई बाध्यता नहीं है। प्रदेश सरकार भी सब आधार से लिंक करने की योजना बना रही है। इस लिए आधार कार्ड जमा कराए जा रहे है। इससे लोगों को भविष्य में विभाग व कोषागार के चक्कर लगाने से छुट्टी मिल जाएगी। आधार कार्ड नहीं होने पर पेंशनरों को विभाग में आना पड़ेगा।
- दीपक सिंह, जिला कोषाधिकारी
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