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चार करोड़ की खरीद, फिर भी जीवन रक्षक दवाएं नदारद
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2015 10:51 PM IST
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शासन एक ओर सरकारी अस्पतालों से मुफ्त दवाई देने का दावा कर रही है, दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की दवा खरीद के बाद भी जिले के सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाएं नहीं पहुंची। जिले में पिछले दो साल में करीब चार करोड़ की दवा खरीदी गई हैं। जबकि हकीकत यह है कि किसी भी सीएचसी पर पिछले आठ महीने से महिलाओं के आयरन और कैल्शियम उपलब्ध नहीं है।
साथ ही बच्चों के लिए पैरासीटामॉल और उल्टी दस्त का एक भी सीरप नहीं है।
सरकार एक ओर सरकारी अस्पतालों से मुफ्त दवाई देने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की दवा खरीद के बाद भी सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाएं नहीं पहुंची। स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2014-15 में करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गई। इसी प्रकार वर्ष 2015-16 में अब तक 1 करोड़ 30 लाख रुपये की दवाओं की खरीद की गई।
इसके बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले आठ महीने से महिलाओं के आयरन और कैल्शियम उपलब्ध नहीं है। साथ ही बच्चों के लिए पैरासीटामॉल और उल्टी दस्त का एक भी सीरप नहीं है जिससे यहां पर आने वाले मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है।
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पिछले सप्ताह फार्मासिस्ट एसोसिएशन और पीएमएस संघ अस्पतालों में दवाएं न होने का विरोध कर चुका है। यहां तक इसकी लिखित शिकायत शासन तक की गई है इसके बाद भी अस्पतालों में दवाएं नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो यह बात सामने आई।
केस एक
कैल्शियम है न पैरासिटामाल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ में 2 फरवरी से आयरन और कैल्शियम की गोलियां नहीं है। बच्चों को बुखार में दी जाने वाली पैरासीटामॉल सिरप अभी तक नहीं आई है। इसके अलावा सिप्रोफ्लाक्सासिन, ओफ्लाक्सासिन, ओरिन्डाजोल, डाइक्लो, क्लोरीन, फूरसेमाइड, एंटासिड समेत कई प्रकार की दवाएं नहीं हैं। यही हाल त्रिवेदीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का देखा गया है।
केस दो
डिमांड के बाद भी नहीं मिली भेजी दवा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर भी कई जीवन रक्षक दवाएं नहीं है। अस्पताल में एथेनसाइलिट टेबलेट, टिंचर, डाइक्लो, जेंटामाइसिन इंजेक्शन, डेक्सामाइसिन इंजेक्शन, पेंटाप्रोजाल, ट्रॉमाडाल, सिप्रोफ्लाक्सिन, आईबी सेट, हाइड्रोजन आदि नहीं हैं। सीएचसी से डिमांड तो मुख्यालय को बराबर भेजी जा रही है। लेकिन मुख्यालय से ये दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
पीएमएस एसोसिएशन ने उठाए सवाल
फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी सीएचसी पर आवश्यक दवाएं न होने के लिए पिछले 27 जुलाई से बराबर सीएमओ व शासन को पत्र लिख रहे हैं। वहीं पीएमएस एसोसिएशन भी ग्रामीण अस्पतालों में दवाएं न होने का विरोध कर चुका है।
24 लाख का फिनायल खरीद लिया
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार ने जनसूचना अधिकार के तहत दवा खरीद के संबंध में जानकारी मांगी थी। मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2014-15 में करीब 2 करोड 83 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गई और वर्ष 2015-16 में अब तक 1 करोड 30 लाख रुपये खर्च किए गए।
इस पैसे से कितने की दवा खरीद गई इसका विवरण नहीं दिया गया। बल्कि बताया गया कि 23 लाख 62 हजार रुपये की फिनायल, 5 लाख 88 हजार रुपये की पट्टी, 2 लाख 14 हजार रुपये की बेडशीट आदि की खरीद की गई। रुई कितने की खरीदी गई इसकी भी जानकारी नहीं दी गई। जबकि सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक सीएचसी पर छह से आठ क्विंटल रुई भेजी गई।
वर्ष 2015-16 में दो किस्तो के रूप में 1 करोड़ 30 लाख रुपया दवा खरीद के लिए मिला था। जिससे दवाएं आवश्यक दवाएं खरीदी गई। सभी प्रकार की दवाएं मुख्य औषधि भंडार कक्ष में मौजूद हैं। सीएचसी से जो डिमांड आती उसके अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पैरासीटामॉल सिरप भी आ गई है उसे भी अस्पताल में भेजा जा रहा है।
- डॉ. जेता सिंह, एसीएमओ नोडल अधिकारी सीएमएसडी स्टोर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाएं नहीं है इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी जानकारी सीएमओ से की जाएगी कि अगर आवश्यक दवाएं नहीं है तो उनकी खरीद क्यों नहीं की जा रही है।
- योगेश्वर राम मिश्र, जिलाधिकारी
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साथ ही बच्चों के लिए पैरासीटामॉल और उल्टी दस्त का एक भी सीरप नहीं है।
सरकार एक ओर सरकारी अस्पतालों से मुफ्त दवाई देने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की दवा खरीद के बाद भी सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाएं नहीं पहुंची। स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2014-15 में करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गई। इसी प्रकार वर्ष 2015-16 में अब तक 1 करोड़ 30 लाख रुपये की दवाओं की खरीद की गई।
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इसके बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले आठ महीने से महिलाओं के आयरन और कैल्शियम उपलब्ध नहीं है। साथ ही बच्चों के लिए पैरासीटामॉल और उल्टी दस्त का एक भी सीरप नहीं है जिससे यहां पर आने वाले मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है।
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पिछले सप्ताह फार्मासिस्ट एसोसिएशन और पीएमएस संघ अस्पतालों में दवाएं न होने का विरोध कर चुका है। यहां तक इसकी लिखित शिकायत शासन तक की गई है इसके बाद भी अस्पतालों में दवाएं नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो यह बात सामने आई।
केस एक
कैल्शियम है न पैरासिटामाल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ में 2 फरवरी से आयरन और कैल्शियम की गोलियां नहीं है। बच्चों को बुखार में दी जाने वाली पैरासीटामॉल सिरप अभी तक नहीं आई है। इसके अलावा सिप्रोफ्लाक्सासिन, ओफ्लाक्सासिन, ओरिन्डाजोल, डाइक्लो, क्लोरीन, फूरसेमाइड, एंटासिड समेत कई प्रकार की दवाएं नहीं हैं। यही हाल त्रिवेदीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का देखा गया है।
केस दो
डिमांड के बाद भी नहीं मिली भेजी दवा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर भी कई जीवन रक्षक दवाएं नहीं है। अस्पताल में एथेनसाइलिट टेबलेट, टिंचर, डाइक्लो, जेंटामाइसिन इंजेक्शन, डेक्सामाइसिन इंजेक्शन, पेंटाप्रोजाल, ट्रॉमाडाल, सिप्रोफ्लाक्सिन, आईबी सेट, हाइड्रोजन आदि नहीं हैं। सीएचसी से डिमांड तो मुख्यालय को बराबर भेजी जा रही है। लेकिन मुख्यालय से ये दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
पीएमएस एसोसिएशन ने उठाए सवाल
फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी सीएचसी पर आवश्यक दवाएं न होने के लिए पिछले 27 जुलाई से बराबर सीएमओ व शासन को पत्र लिख रहे हैं। वहीं पीएमएस एसोसिएशन भी ग्रामीण अस्पतालों में दवाएं न होने का विरोध कर चुका है।
24 लाख का फिनायल खरीद लिया
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार ने जनसूचना अधिकार के तहत दवा खरीद के संबंध में जानकारी मांगी थी। मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2014-15 में करीब 2 करोड 83 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गई और वर्ष 2015-16 में अब तक 1 करोड 30 लाख रुपये खर्च किए गए।
इस पैसे से कितने की दवा खरीद गई इसका विवरण नहीं दिया गया। बल्कि बताया गया कि 23 लाख 62 हजार रुपये की फिनायल, 5 लाख 88 हजार रुपये की पट्टी, 2 लाख 14 हजार रुपये की बेडशीट आदि की खरीद की गई। रुई कितने की खरीदी गई इसकी भी जानकारी नहीं दी गई। जबकि सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक सीएचसी पर छह से आठ क्विंटल रुई भेजी गई।
वर्ष 2015-16 में दो किस्तो के रूप में 1 करोड़ 30 लाख रुपया दवा खरीद के लिए मिला था। जिससे दवाएं आवश्यक दवाएं खरीदी गई। सभी प्रकार की दवाएं मुख्य औषधि भंडार कक्ष में मौजूद हैं। सीएचसी से जो डिमांड आती उसके अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पैरासीटामॉल सिरप भी आ गई है उसे भी अस्पताल में भेजा जा रहा है।
- डॉ. जेता सिंह, एसीएमओ नोडल अधिकारी सीएमएसडी स्टोर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाएं नहीं है इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी जानकारी सीएमओ से की जाएगी कि अगर आवश्यक दवाएं नहीं है तो उनकी खरीद क्यों नहीं की जा रही है।
- योगेश्वर राम मिश्र, जिलाधिकारी