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Barabanki News: बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में गर्भवती की होगी बेहतर देखभाल
Mon, 03 Aug 2026 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:15 PM IST
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रामनगर। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने की मुहिम के बीच बाढ़ प्रभावित इलाकों में विशेष जांच अभियान के दौरान करीब 50 गर्भवती महिलाएं उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में पाई गई हैं। जांच में सामने आया कि अधिकांश महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से काफी नीचे है। ऐसे में एनीमिया पीड़ित होने पर प्रसव के वक्त मां और नवजात दोनों की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। ऐसी गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब संबंधित इलाकों में विशेष निगरानी शुरू की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रामीण व बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असंतुलित खानपान, पोषण की कमी और जागरूकता के अभाव के शरीर में खून की कमी की समस्या लगातार बढ़ रही है। गर्भावस्था में अतिरिक्त पोषण और आयरन न मिलने से प्रसव के समय खतरा बढ़ रहा है। वर्तमान में विभाग केवल इन गर्भवतियों ही नहीं बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के 2,000 संवेदनशील लोगों पर भी सीधी नजर रखे हुए है, जिसमें शून्य से दो वर्ष के 1,684 बच्चे, 188 बुजुर्ग और 42 दिव्यांग भी शामिल हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रणव श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान कर ली गई है। नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि प्रसव के समय किसी भी प्रकार की जटिलता न हो और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
डेढ़ माह के भीतर 60 प्रसव
जुलाई और अगस्त के बीच क्षेत्र की 180 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी संभावित है। इनमें से 60 महिलाएं ऐसी हैं, जिनका प्रसव अगले डेढ़ महीने के भीतर ही होना है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। सीएचसी स्तर पर अभियान चलाकर चिह्नित की गई हाई रिस्क महिलाओं की देखभाल के लिए एएनएम के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें घर-घर पहुंचकर नियमित स्वास्थ्य जांच, परामर्श और आवश्यक दवाओं का वितरण कर रही हैं।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रामीण व बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असंतुलित खानपान, पोषण की कमी और जागरूकता के अभाव के शरीर में खून की कमी की समस्या लगातार बढ़ रही है। गर्भावस्था में अतिरिक्त पोषण और आयरन न मिलने से प्रसव के समय खतरा बढ़ रहा है। वर्तमान में विभाग केवल इन गर्भवतियों ही नहीं बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के 2,000 संवेदनशील लोगों पर भी सीधी नजर रखे हुए है, जिसमें शून्य से दो वर्ष के 1,684 बच्चे, 188 बुजुर्ग और 42 दिव्यांग भी शामिल हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रणव श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान कर ली गई है। नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि प्रसव के समय किसी भी प्रकार की जटिलता न हो और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
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डेढ़ माह के भीतर 60 प्रसव
जुलाई और अगस्त के बीच क्षेत्र की 180 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी संभावित है। इनमें से 60 महिलाएं ऐसी हैं, जिनका प्रसव अगले डेढ़ महीने के भीतर ही होना है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। सीएचसी स्तर पर अभियान चलाकर चिह्नित की गई हाई रिस्क महिलाओं की देखभाल के लिए एएनएम के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें घर-घर पहुंचकर नियमित स्वास्थ्य जांच, परामर्श और आवश्यक दवाओं का वितरण कर रही हैं।
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