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बिजली संकट का दिखने लगा असर, चार से छह घंटे शुरू हुई कटौती
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बाराबंकी। कोयले की कमी से बिजली उत्पादन में आई कमी का असर जिले में दिखाई देने लगा है। प्रदेश की पावर ग्रिड में कोयले की कमी के चलते उत्पादन प्रभावित हुआ है, इसका सीधा असर जिले की बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। जिले में रोजाना करीब 150 मेगावॉट बिजली की जरूरत पड़ रही है लेकिन इस समय 140 मेगावॉट ही बिजली मिल पा रही है। जिसकी वजह से इमरजेंसी कटौती करनी पड़ रही है। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण इलाकों पर पड़ रहा है। यहां पर चार से छह घंटे की कटौती की जा रही है।
प्रदेश में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। पर्याप्त कोयला न मिल पाने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से जिले को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। अधिशासी अभियंता आरके मिश्र का कहना है कि ग्रामीण इलाकों को तकरीबन 15 घंटे बिजली मिल रही है। रविवार को तो कोई कटौती भी नहीं की गई।
रोस्टर के अनुसार पूरी बिजली आपूर्ति की जा रही है। सूत्रों की मानें तो करीब 10 मेगावॉट प्रतिदिन कम बिजली मिल रही है जिससे इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है लेकिन यहां पर 12-14 घंटे बिजली मिल पा रही है। अचानक बिजली गुल होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे तो यह संकट और अधिक गहरा जाएगा और तहसील व जिला मुख्यालय पर भी कटौती शुरू हो जाएगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे का है रोस्टर
ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है। रामनगर व सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में 13 घंटे, फतेहपुर में 14 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। हैदरगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में चार से छह घंटे की कटौती की जा रही है, रोस्टर के सापेक्ष 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। रामसनेहीघाट डिवीजन में तीन घंटे की बिजली कटौती की जा रही है।
बिजली की कोई कमी नहीं है। जितनी जरूरत है मिल रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति बराबर की जाएगी। बिजली खरीदकर दी जाएगी। रविवार को कोई कटौती नहीं की गई।
- चंद्रशेखर सिंह, अधीक्षण अभियंता पावर कॉर्पोरेशन
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प्रदेश में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। पर्याप्त कोयला न मिल पाने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से जिले को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। अधिशासी अभियंता आरके मिश्र का कहना है कि ग्रामीण इलाकों को तकरीबन 15 घंटे बिजली मिल रही है। रविवार को तो कोई कटौती भी नहीं की गई।
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रोस्टर के अनुसार पूरी बिजली आपूर्ति की जा रही है। सूत्रों की मानें तो करीब 10 मेगावॉट प्रतिदिन कम बिजली मिल रही है जिससे इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है लेकिन यहां पर 12-14 घंटे बिजली मिल पा रही है। अचानक बिजली गुल होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे तो यह संकट और अधिक गहरा जाएगा और तहसील व जिला मुख्यालय पर भी कटौती शुरू हो जाएगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे का है रोस्टर
ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है। रामनगर व सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में 13 घंटे, फतेहपुर में 14 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। हैदरगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में चार से छह घंटे की कटौती की जा रही है, रोस्टर के सापेक्ष 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। रामसनेहीघाट डिवीजन में तीन घंटे की बिजली कटौती की जा रही है।
बिजली की कोई कमी नहीं है। जितनी जरूरत है मिल रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति बराबर की जाएगी। बिजली खरीदकर दी जाएगी। रविवार को कोई कटौती नहीं की गई।
- चंद्रशेखर सिंह, अधीक्षण अभियंता पावर कॉर्पोरेशन