{"_id":"622ba5c7e3781c7570309142","slug":"political-barabanki-news-lko621389876","type":"story","status":"publish","title_hn":"जैदपुर और बाराबंकी सीट पर भगवा लहराने में नाकाम रही भाजपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जैदपुर और बाराबंकी सीट पर भगवा लहराने में नाकाम रही भाजपा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। जैदपुर और बाराबंकी सीट पर भगवा फहराने में भाजपा पूरी तरह से नाकाम रही। सीट पर जीत दर्ज कराने के लिए गृहमंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष के अलावा संगठन के पदाधिकारियों द्वारा की गई कड़ी मशक्कत भी काम नहीं आ सकी। चुनाव से पहले भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस इन्हीं दोनों सीटों पर ज्यादा था। इसके लिए राज्य मंत्री से लेकर संगठन के कई पदाधिकारियों को भी लगाया गया था बावजूद इसके भाजपा इन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल नहीं हो सकी।
बाराबंकी सदर सीट पर सपा के धर्मराज यादव का पिछले तीन चुनावों से कब्जा बरकरार है। वर्ष 2012 में इस सीट से भाजपा ने संतोष सिंह को मैदान में उतारा था और वह 14 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के चुनाव में भाजपा ने हरगोविंद सिंह पर दांव लगाया। उन्हें 67 हजार वोट मिले इसके बाद भी वह जीत नहीं दर्ज करा पाए और तीसरे स्थान पर चले गए थे। 2022 में भाजपा ने डॉ. रामकुमारी मौर्या को मैदान में उतारा। उन्हें भी महज 90 हजार वोटों से ही संतोष करना पड़ा। भाजपा यहां दूसरे स्थान पर रही।
जैदपुर सीट पर 2012 में भाजपा ने बैजनाथ रावत को मैदान में उतारा था लेकिन 52 हजार वोट पाकर वह दूसरे स्थान पर रहे। सपा के रामगोपाल रावत ने यहां पर जीत दर्ज की। 2017 के चुनाव में भाजपा के उपेन्द्र रावत ने यह एक लाख 11 हजार वोट पाकर यह सीट सपा से छीन ली थी।
विज्ञापन
सपा और कांग्रेस के गठबंधन के चलते तनुज पुनिया इस सीट पर चुनाव लड़े और उन्हें 88 हजार वोट मिले थे। इसके बाद 2019 के उपचुनाव में सपा के गौरव रावत ने भाजपा से यह सीट छीन ली थी। भाजपा से चुनाव लड़े अंबरीश दूसरे स्थान पर रहे थे। 2022 के हुए चुनाव में सपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यहां से भाजपा उम्मीदवार अंबरीश फिर एक लाख 10 हजार वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का इन दोनों सीटों पर खास फोकस था। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, अनुराग ठाकुर, अनुप्रिया पटेल, अपर्णा यादव को मैदान में आना पड़ा। इसके अलावा संगठन की ओर से राधा मोहन, सुनील बंसल, शोभा करंदलाजे, सत्या कुमार भी जीत दर्ज कराने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठकें करते रहे। राज्यमंत्री वीरेंद्र तिवारी को यहां का प्रभारी तक बनाया गया। इसके बाद भी भाजपा इन दोनों सीटों पर भगवा फहराने में पूरी तरह से नाकाम रही। (संवाद)
सीट न जीतने के पीछे अपने-अपने तर्क
दोनों सीटों पर जीत न दर्ज कराने के पीछे भाजपाइयों के अपने-अपने तर्क हैं। भाजपा नेताओं की माने तो बाराबंकी सदर सीट पर 2017 के चुनाव में भाजपा की ओर से हरगोविंद सिंह चुनाव लड़े थे जबकि बसपा ने सुरेंद्र वर्मा को मैदान में उतारा था। बसपा उम्मीदवार का मुसलमानों के साथ अन्य जातियों का वोट मिला था। लेकिन इस चुनाव में बसपा मुस्लिम वोट पाने में पूरी तरह से नाकाम रही।
इसी के चलते भाजपा को खासा नुकसान हुआ। वोट भले ही पिछले चुनाव से ज्यादा मिला हो लेकिन सीट जीतने में भाजपा नाकाम रही। जैदपुर सीट पर का भी यही हाल रहा। यहां पर तनुज पुनिया मुस्लिम वोट पाने में नाकाम रहे जिसके चलते भाजपा को यहां पर भी नुकसान हुुआ है।
विज्ञापन
बाराबंकी सदर सीट पर सपा के धर्मराज यादव का पिछले तीन चुनावों से कब्जा बरकरार है। वर्ष 2012 में इस सीट से भाजपा ने संतोष सिंह को मैदान में उतारा था और वह 14 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के चुनाव में भाजपा ने हरगोविंद सिंह पर दांव लगाया। उन्हें 67 हजार वोट मिले इसके बाद भी वह जीत नहीं दर्ज करा पाए और तीसरे स्थान पर चले गए थे। 2022 में भाजपा ने डॉ. रामकुमारी मौर्या को मैदान में उतारा। उन्हें भी महज 90 हजार वोटों से ही संतोष करना पड़ा। भाजपा यहां दूसरे स्थान पर रही।
विज्ञापन
जैदपुर सीट पर 2012 में भाजपा ने बैजनाथ रावत को मैदान में उतारा था लेकिन 52 हजार वोट पाकर वह दूसरे स्थान पर रहे। सपा के रामगोपाल रावत ने यहां पर जीत दर्ज की। 2017 के चुनाव में भाजपा के उपेन्द्र रावत ने यह एक लाख 11 हजार वोट पाकर यह सीट सपा से छीन ली थी।
विज्ञापन
सपा और कांग्रेस के गठबंधन के चलते तनुज पुनिया इस सीट पर चुनाव लड़े और उन्हें 88 हजार वोट मिले थे। इसके बाद 2019 के उपचुनाव में सपा के गौरव रावत ने भाजपा से यह सीट छीन ली थी। भाजपा से चुनाव लड़े अंबरीश दूसरे स्थान पर रहे थे। 2022 के हुए चुनाव में सपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यहां से भाजपा उम्मीदवार अंबरीश फिर एक लाख 10 हजार वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का इन दोनों सीटों पर खास फोकस था। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, अनुराग ठाकुर, अनुप्रिया पटेल, अपर्णा यादव को मैदान में आना पड़ा। इसके अलावा संगठन की ओर से राधा मोहन, सुनील बंसल, शोभा करंदलाजे, सत्या कुमार भी जीत दर्ज कराने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठकें करते रहे। राज्यमंत्री वीरेंद्र तिवारी को यहां का प्रभारी तक बनाया गया। इसके बाद भी भाजपा इन दोनों सीटों पर भगवा फहराने में पूरी तरह से नाकाम रही। (संवाद)
सीट न जीतने के पीछे अपने-अपने तर्क
दोनों सीटों पर जीत न दर्ज कराने के पीछे भाजपाइयों के अपने-अपने तर्क हैं। भाजपा नेताओं की माने तो बाराबंकी सदर सीट पर 2017 के चुनाव में भाजपा की ओर से हरगोविंद सिंह चुनाव लड़े थे जबकि बसपा ने सुरेंद्र वर्मा को मैदान में उतारा था। बसपा उम्मीदवार का मुसलमानों के साथ अन्य जातियों का वोट मिला था। लेकिन इस चुनाव में बसपा मुस्लिम वोट पाने में पूरी तरह से नाकाम रही।
इसी के चलते भाजपा को खासा नुकसान हुआ। वोट भले ही पिछले चुनाव से ज्यादा मिला हो लेकिन सीट जीतने में भाजपा नाकाम रही। जैदपुर सीट पर का भी यही हाल रहा। यहां पर तनुज पुनिया मुस्लिम वोट पाने में नाकाम रहे जिसके चलते भाजपा को यहां पर भी नुकसान हुुआ है।