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Barabanki News: जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं से मरीज बेहाल
Mon, 24 Mar 2025 01:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 24 Mar 2025 01:14 AM IST
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बेंच पर भर्ती कर किया जा रहा मरीजों का इलाज। -संवाद
बाराबंकी। जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। डीएम के आदेशों के बावजूद मरीजों को भर्ती कर स्ट्रेचर और बेंच पर इलाज किया जा रहा है। गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों को प्राथमिक उपचार देने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
रविवार को ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। तेज बुखार से पीड़ित निधांशु घंटों गैलरी में स्ट्रेचर पर तड़पता रहा लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। देर होने पर जब उसे उल्टियां होने लगीं, तब जाकर ऑक्सीजन लगाने और रेफर करने की सलाह दे दी गई। इसी तरह कबीरपुर गांव की सावित्री को इंजेक्शन कक्ष में बेंच पर लेटाकर ड्रिप चढ़ाई गई।
हाल ही में अस्पताल में तीन नए ईएमओ तैनात किए गए हैं लेकिन अव्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हैं। दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को फौरन सहायता नहीं मिलती। हड्डी टूटने पर लकड़ी की फंटियां बाहर से मंगवाई जाती हैं।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि छुट्टी के दिन कुत्ता, बिल्ली या बंदर के काटने पर पीड़ितों को इमरजेंसी में सेवा नहीं मिलती। ऐसे में मरीजों को ओपीडी के दिन का इंतजार करना पड़ता है। यदि दो दिन लगातार ओपीडी बंद रहे तो मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सीएमएस डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में जिनकी ड्यूटी लगी थी, उन्होंने यदि लापरवाही की है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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रविवार को ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। तेज बुखार से पीड़ित निधांशु घंटों गैलरी में स्ट्रेचर पर तड़पता रहा लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। देर होने पर जब उसे उल्टियां होने लगीं, तब जाकर ऑक्सीजन लगाने और रेफर करने की सलाह दे दी गई। इसी तरह कबीरपुर गांव की सावित्री को इंजेक्शन कक्ष में बेंच पर लेटाकर ड्रिप चढ़ाई गई।
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हाल ही में अस्पताल में तीन नए ईएमओ तैनात किए गए हैं लेकिन अव्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हैं। दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को फौरन सहायता नहीं मिलती। हड्डी टूटने पर लकड़ी की फंटियां बाहर से मंगवाई जाती हैं।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि छुट्टी के दिन कुत्ता, बिल्ली या बंदर के काटने पर पीड़ितों को इमरजेंसी में सेवा नहीं मिलती। ऐसे में मरीजों को ओपीडी के दिन का इंतजार करना पड़ता है। यदि दो दिन लगातार ओपीडी बंद रहे तो मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सीएमएस डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में जिनकी ड्यूटी लगी थी, उन्होंने यदि लापरवाही की है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।