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बिना जांच और दवाइयों के लौटे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2016 11:58 PM IST
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हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मांगें पूरी न होने पर लैब टेक्नीशियन व डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के कर्मचारियों ने मंगलवार से हड़ताल शुरू कर दी। इससे दूर दराज से आए मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मरीज डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा काउंटरों व ब्लड बैंक के सामने जांच कराने के लिए काफी देर तक खड़े रहे।
पर न तो मरीजों की जांच हो सकी और न ही उन्हें दवाइयां बांटी गई। हड़ताल से इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित रही। कई गंभीर मरीजों को निराश होकर अस्पताल से लौटना पड़ा।
चार दिन से दो घंटे कार्य बहिष्कार के बाद भी मांगे पूरी न होने से पांचवें दिन फार्मेसिस्ट व एलटी कर्मियों ने पूरे दिन के लिए हड़ताल कर दी। इससे अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं।
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दूर दराज से आए मरीजों ने घंटों लाइन लगकर पर्चा बनवाने के बाद चिकित्सकों से उपचार तो करा लिया लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें दवाइयां नहीं मिल सकी। सैकड़ों मरीज जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथॉलाजी के सामने दोपहर तक खड़े रहे। बाद में मरीजों ने बाहर से जांच करवाई और दवाएं खरीदी।
करीब 250 मरीजों की जांच पैथॉलाजी में प्रतिदिन की जाती थी लेकिन मंगलवार को किसी भी जांच नहीं हुई। फार्मेसिस्टों ने संगठन के जिला अध्यक्ष व प्रांतीय संगठन मंत्री आरपी सिंह विसेन के नेतृत्व में जिला चिकित्सालय परिसर में नारेबाजी की और मेनगेट के पास बने पार्क में धरने पर बैठ गए।
कर्मचारियों ने कहा कि मांगे पूरी होने तक हड़ताल चलती रहेगी। आरपी विसेन का कहना है कि जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक फार्मासिस्टों ने हड़ताल कर स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी हैं।
वहीं, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर यूपी लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन ने मंगलवार को सैंपल लेना ही बंद कर दिया। फार्मासिस्टाें के साथ हड़ताल कर धरने पर बैठ गए। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजाराम रावत ने बताया कि मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर किए जाने आदि मांगे शामिल हैं।
चतुर्थश्रेणी राज्य कर्मचारी भी संघ के आह्वान पर मंगलवार को हड़ताल पर चले गए। इसके कारण मरीजों को परिवारीजनों ने स्वयं स्ट्रेचर पर लादकर इमरजेंसी पहुंचाया। किसी को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। कई तो मरीज को गोद में उठाकर वार्ड तक ले गए। इलाज न मिलने से कुछ मरीज फर्श पर ही लेटे रहे।
सीएमएस डॉ. एसके सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में चार दिन से फार्मेसिस्ट व एलटी दो घंटे का कार्य बहिष्कार के बाद लौट आते थे। मंगलवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से काफी बुरा प्रभाव मरीजों पर पड़ा है। पर्चा बनवाकर 1750 नए मरीजों व 171 पुराने मरीज को देखा गया।
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पर न तो मरीजों की जांच हो सकी और न ही उन्हें दवाइयां बांटी गई। हड़ताल से इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित रही। कई गंभीर मरीजों को निराश होकर अस्पताल से लौटना पड़ा।
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चार दिन से दो घंटे कार्य बहिष्कार के बाद भी मांगे पूरी न होने से पांचवें दिन फार्मेसिस्ट व एलटी कर्मियों ने पूरे दिन के लिए हड़ताल कर दी। इससे अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं।
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दूर दराज से आए मरीजों ने घंटों लाइन लगकर पर्चा बनवाने के बाद चिकित्सकों से उपचार तो करा लिया लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें दवाइयां नहीं मिल सकी। सैकड़ों मरीज जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथॉलाजी के सामने दोपहर तक खड़े रहे। बाद में मरीजों ने बाहर से जांच करवाई और दवाएं खरीदी।
करीब 250 मरीजों की जांच पैथॉलाजी में प्रतिदिन की जाती थी लेकिन मंगलवार को किसी भी जांच नहीं हुई। फार्मेसिस्टों ने संगठन के जिला अध्यक्ष व प्रांतीय संगठन मंत्री आरपी सिंह विसेन के नेतृत्व में जिला चिकित्सालय परिसर में नारेबाजी की और मेनगेट के पास बने पार्क में धरने पर बैठ गए।
कर्मचारियों ने कहा कि मांगे पूरी होने तक हड़ताल चलती रहेगी। आरपी विसेन का कहना है कि जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक फार्मासिस्टों ने हड़ताल कर स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी हैं।
वहीं, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर यूपी लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन ने मंगलवार को सैंपल लेना ही बंद कर दिया। फार्मासिस्टाें के साथ हड़ताल कर धरने पर बैठ गए। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजाराम रावत ने बताया कि मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर किए जाने आदि मांगे शामिल हैं।
चतुर्थश्रेणी राज्य कर्मचारी भी संघ के आह्वान पर मंगलवार को हड़ताल पर चले गए। इसके कारण मरीजों को परिवारीजनों ने स्वयं स्ट्रेचर पर लादकर इमरजेंसी पहुंचाया। किसी को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। कई तो मरीज को गोद में उठाकर वार्ड तक ले गए। इलाज न मिलने से कुछ मरीज फर्श पर ही लेटे रहे।
सीएमएस डॉ. एसके सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में चार दिन से फार्मेसिस्ट व एलटी दो घंटे का कार्य बहिष्कार के बाद लौट आते थे। मंगलवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से काफी बुरा प्रभाव मरीजों पर पड़ा है। पर्चा बनवाकर 1750 नए मरीजों व 171 पुराने मरीज को देखा गया।