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Barabanki News: ओटीपी आपका, सिलिंडर किसका?
Sun, 15 Mar 2026 02:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 15 Mar 2026 02:01 AM IST
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बाराबंकी। गैस सिलिंडर की भारी किल्लत ने आम जनता से लेकर व्यापारियों तक के पसीने छुड़ा दिए हैं। वितरण केंद्रों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जिला प्रशासन को वितरण केंद्रों पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के सख्त निर्देश के बाद अधिकारी केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके।
गैस एजेंसी संचालकों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। कोटवाधाम और दरियाबाद क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी कर्मचारी उनसे ओटीपी पूछ लेते हैं, लेकिन सिलिंडर देने के बजाय उसे ब्लैक में बेच देते हैं। खजुरी गांव के वेद प्रकाश पांडेय और अमनियापुर के हरीश दीक्षित जैसे कई उपभोक्ताओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि ओटीपी देने के बाद उन्हें कह दिया गया कि अब उन्हें 45 दिन बाद ही सिलिंडर मिल पाएगा। उपभोक्ता परेशान हैं कि बुकिंग और ओटीपी के बावजूद उनके हिस्से की गैस रसूखदारों या होटलों को महंगे दामों पर बेची जा रही है।
होटल व्यवसाय पर संकट और बढ़ती महंगाई
गैस संकट का सबसे बड़ा असर मध्यम और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। सिरौलीगौसपुर और बदोसराय में व्यावसायिक सिलेंडरों की किल्लत के चलते लगभग 10 से 12 होटल बंद हो गए हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि होली के बाद से ही आपूर्ति ठप है। जो होटल खुले भी हैं, उन्होंने लागत निकालने के लिए भोजन की थाली पर 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। कोयले के दामों में भी 5 रुपये प्रति किलो का इजाफा होने से दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। त्रिवेदीगंज क्षेत्र में तो भंडारे जैसे आयोजनों के लिए भी मजबूरन लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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वैकल्पिक ईंधन की शरण में ग्रामीण
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी विकट है। सतरिख और दौलतपुर जैसे गांवों में गैस न मिलने के कारण लोग फिर से पारंपरिक ईंधन की ओर लौट रहे हैं। मांग बढ़ने के कारण उपलों (कंडों) के दाम आसमान छू रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के अनुसार, जो उपले पहले आसानी से मिल जाते थे, अब वे 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। एक अदद उपले की कीमत आठ रुपये तक पहुंच गई है।
प्रशासन की सख्ती
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए जैदपुर पुलिस ने कई संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की है। एजेंसी संचालक इस किल्लत के पीछे गैस कंपनियों के बदले हुए नियमों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आक्रोश कम नहीं हो रहा है। प्रशासन का कहना है कि वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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गैस एजेंसी संचालकों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। कोटवाधाम और दरियाबाद क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी कर्मचारी उनसे ओटीपी पूछ लेते हैं, लेकिन सिलिंडर देने के बजाय उसे ब्लैक में बेच देते हैं। खजुरी गांव के वेद प्रकाश पांडेय और अमनियापुर के हरीश दीक्षित जैसे कई उपभोक्ताओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि ओटीपी देने के बाद उन्हें कह दिया गया कि अब उन्हें 45 दिन बाद ही सिलिंडर मिल पाएगा। उपभोक्ता परेशान हैं कि बुकिंग और ओटीपी के बावजूद उनके हिस्से की गैस रसूखदारों या होटलों को महंगे दामों पर बेची जा रही है।
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होटल व्यवसाय पर संकट और बढ़ती महंगाई
गैस संकट का सबसे बड़ा असर मध्यम और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। सिरौलीगौसपुर और बदोसराय में व्यावसायिक सिलेंडरों की किल्लत के चलते लगभग 10 से 12 होटल बंद हो गए हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि होली के बाद से ही आपूर्ति ठप है। जो होटल खुले भी हैं, उन्होंने लागत निकालने के लिए भोजन की थाली पर 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। कोयले के दामों में भी 5 रुपये प्रति किलो का इजाफा होने से दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। त्रिवेदीगंज क्षेत्र में तो भंडारे जैसे आयोजनों के लिए भी मजबूरन लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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वैकल्पिक ईंधन की शरण में ग्रामीण
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी विकट है। सतरिख और दौलतपुर जैसे गांवों में गैस न मिलने के कारण लोग फिर से पारंपरिक ईंधन की ओर लौट रहे हैं। मांग बढ़ने के कारण उपलों (कंडों) के दाम आसमान छू रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के अनुसार, जो उपले पहले आसानी से मिल जाते थे, अब वे 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। एक अदद उपले की कीमत आठ रुपये तक पहुंच गई है।
प्रशासन की सख्ती
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए जैदपुर पुलिस ने कई संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की है। एजेंसी संचालक इस किल्लत के पीछे गैस कंपनियों के बदले हुए नियमों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आक्रोश कम नहीं हो रहा है। प्रशासन का कहना है कि वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।