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कुपोषण में बचपन, 1639 बच्चे अति कुपोषित व 6961 कुुपोषित
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बाराबंकी। काफी प्रयासों के बावजूद जिले में अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। ऐसे में नौनिहालों का बचपन कुपोषण में बीत रहा है। इसका खुलासा स्वास्थ्य व बाल विभाग द्वारा की गई जांच में साबित हुआ है। इसमें 6961 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं और इनमें 1639 बच्चे अति कुपोषित हैं।
यह बात मार्च और अप्रैल माह में 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत दो लाख 95 हजार 482 बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रत्येक माह पौष्टिक आहार के वितरण का दावा किया जा रहा है तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में कुपोषित बच्चे कैसे सामने आ रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त समाज बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत जिले के 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों से महिलाओं व बच्चों को पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कर जरुरत के अनुसार अतिरिक्त पौष्टिक आहार व उपचार की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद जिले में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
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बीते मार्च और अप्रैल माह में इन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छह वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। विभाग से जो आंकड़े मिले हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जिले के दो लाख 95 हजार 482 बच्चों की जांच में वजन, लंबाई आदि की माप की। इनमें जहां दो लाख 86 हजार 882 बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए। वहीं 1639 बच्चे अति कुपोषित तो 6961 कुपोषित की श्रेणी में मिले। इनका वजन लंबाई के अनुपात में काफी कम था।
अब ऐेसे में बाल विकास विभाग की योजनाओं को लेकर सवाल उठ रहा है। विभाग प्रत्येक माह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को चले की दाल, गेहूं की दलिया, रिफाइंड ऑयल, चावल उपलब्ध करा रहा है। इसके बाद भी अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की बड़ी संख्या सामने आ रही है। प्रभारी डीपीओ निधि ने बताया कि स्वास्थ्य परीक्षण में अति कुपोषित और कुुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। वहीं तीन बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया है।
तीन बच्चे एनआरसी में भर्ती
फतेहपुुर ब्लॉक की सीडीपीओ द्वारा हाल ही में तीन अति गंभीर बच्चों को चिह्नित कर उन्हें जिला अस्पताल में बने एनआरसी सेंटर (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराया गया है। इन बच्चों को यहां विशेष रुप से स्वास्थ्य की देखभाल के साथ पौष्टिक आहार दिया जाएगा। यह तीनों बच्चे फतेहपुर ब्लॉक क्षेत्र के हैं।
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यह बात मार्च और अप्रैल माह में 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत दो लाख 95 हजार 482 बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रत्येक माह पौष्टिक आहार के वितरण का दावा किया जा रहा है तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में कुपोषित बच्चे कैसे सामने आ रहे हैं।
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प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त समाज बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत जिले के 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों से महिलाओं व बच्चों को पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कर जरुरत के अनुसार अतिरिक्त पौष्टिक आहार व उपचार की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद जिले में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
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बीते मार्च और अप्रैल माह में इन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छह वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। विभाग से जो आंकड़े मिले हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जिले के दो लाख 95 हजार 482 बच्चों की जांच में वजन, लंबाई आदि की माप की। इनमें जहां दो लाख 86 हजार 882 बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए। वहीं 1639 बच्चे अति कुपोषित तो 6961 कुपोषित की श्रेणी में मिले। इनका वजन लंबाई के अनुपात में काफी कम था।
अब ऐेसे में बाल विकास विभाग की योजनाओं को लेकर सवाल उठ रहा है। विभाग प्रत्येक माह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को चले की दाल, गेहूं की दलिया, रिफाइंड ऑयल, चावल उपलब्ध करा रहा है। इसके बाद भी अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की बड़ी संख्या सामने आ रही है। प्रभारी डीपीओ निधि ने बताया कि स्वास्थ्य परीक्षण में अति कुपोषित और कुुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। वहीं तीन बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया है।
तीन बच्चे एनआरसी में भर्ती
फतेहपुुर ब्लॉक की सीडीपीओ द्वारा हाल ही में तीन अति गंभीर बच्चों को चिह्नित कर उन्हें जिला अस्पताल में बने एनआरसी सेंटर (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराया गया है। इन बच्चों को यहां विशेष रुप से स्वास्थ्य की देखभाल के साथ पौष्टिक आहार दिया जाएगा। यह तीनों बच्चे फतेहपुर ब्लॉक क्षेत्र के हैं।