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Barabanki News: दुबई और ओमान ही नहीं... अमेरिका में भी खूब बिक रहे स्टोल
Thu, 16 Jul 2026 01:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:56 AM IST
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बाराबंकी। बुनकरों की नगरी में बने डिजाइनर और आरामदायक स्टोल दुबई, ओमान व सऊदी अरब ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। प्रतिवर्ष लगभग 75 करोड़ रुपये का माल दूसरे देशों में निर्यात किया जा रहा है। यही नहीं, लगभग इतनी ही खपत अपने देश में है।
ओडीओपी में हथकरघा और वस्त्र उत्पाद के चयन के बाद यहां 500 से ज्यादा नई इकाइयां लग चुकी हैं। 12000 से ज्यादा परिवार इसी पेशे से आर्थिक तरक्की की राह पर हैं। जिले में सबसे ज्यादा बुनकर जैदपुर कस्बे में हैं। यहां सूती, रेयान और मिश्रित धागों से स्टोल, दुपट्टे, गमछे, रुमाल और साड़ियां बनाई जाती हैं।
सबसे ज्यादा डिमांड स्टोल और गमछों की रहती है। जैदपुर के अलावा मसौली ब्लॉक के बड़ागांव, बांसा, चौखंडी, सैदनुपर, सहरी, मैला, किंतूर, सफदरगंज, मुशकीनगर और शहाबपुर हथकरघा और वस्त्र उत्पाद के लिए जाने जाते हैं।
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सिरौलीगौसपुर ब्लॉक के रामपुर भवानीपुर और सआदतगंज, निंदूरा के सुडियामऊ और फतेहपुर, पूरे डलई ब्लॉक के मवई, पचलो और अलियाबाद, देवा के सद्दीपुर, नैनामऊ और अन्खा में भी बुनकरों की संख्या ज्यादा है। ओडीओपी योजना शुरू होने के बाद इन बुनकरों के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है।
तमिलनाडु से आता है सादा स्टोल
पहले सादे स्टोल यहीं पर बनते थे लेकिन पिछले 10 सालों से तमिलनाडु से सादे स्टोल मंगाए जा रहे हैं। जिले के बुनकर उनमें रंगाई और कढ़ाई करते हैं। यही माल सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन व अमेरिका निर्यात किया जाता है। अपने यहां झारखंड, बिहार, गुजरात, मुंबई और दिल्ली में स्टोल की मांग ज्यादा है। ओडीओपी योजना शुरू होने के बाद निर्यात में काफी उछाल आया है।
अयोध्या में जय श्री राम, मथुरा में राधे-राधे
धार्मिक नगरी में भी यहां बने स्टोल की खूब डिमांड रहती है। अयोध्या में जय श्री राम और मथुरा में राधे-राधे लिखे स्टोल की मांग लगातार होती रहती है। वहीं बनारस में जय महाकाल लिखे स्टोल की मांग ज्यादा रहती है।
चुनाव के समय बढ़ जाती है मांग
बुनकर व्यवसायी तफज्जुल हुसैन अंसारी का कहना है कि चुनाव के वक्त उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। अलग-अलग राजनीतिक दल पार्टी के झंडे के कलर के स्टोल या गमछे की डिमांड भेजते हैं। इसके अलावा बड़ी रैलियां होने पर भी मांग में इजाफा होता है।
सात हजार पावरलूम, दो हजार हथकरघा
सिर्फ जैदपुर नगर में आठ सौ पावरलूम और पांच सौ हथकरघा संचालित हैं। पूरे जिले में सात हजार पावरलूम और दो हजार के करीब हथकरघा से काम हो रहा है। पावरलूम से काम करने वाले कारीगराें की आमदनी हथकरघा में काम करने वालों से ज्यादा है।
ओडीओपी योजना से बढ़ा कारोबार
अंसार हैंडलूम समिति के संचालक जफर अंसारी ने बताया कि ओडीओपी योजना के तहत ऋण लेकर बड़ी मशीन लगाई। पहले उत्पाद आसपास के जनपदों में बिकते थे लेकिन फिर दायरा बढ़ा। पहले दूसरे प्रांतों और फिर विदेशों में मांग के अनुरूप माल का निर्यात कर रहे हैं।
2500 बुनकरों को दिया निशुल्क प्रशिक्षण
हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ओडीओपी योजना के तहत बुनकरों को प्रशिक्षण व ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले आठ सालों में 500 अधिक नई यूनिटें लग चुकी हैं। इनमें लगभग पांच हजार लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। अब तक करीब 2500 लोगों को निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया गया है। देश-विदेश में स्टॉल लगाने के लिए खर्च का वहन भी विभाग करता है।
- दिनेश चौरसिया, उपायुक्त उद्योग
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ओडीओपी में हथकरघा और वस्त्र उत्पाद के चयन के बाद यहां 500 से ज्यादा नई इकाइयां लग चुकी हैं। 12000 से ज्यादा परिवार इसी पेशे से आर्थिक तरक्की की राह पर हैं। जिले में सबसे ज्यादा बुनकर जैदपुर कस्बे में हैं। यहां सूती, रेयान और मिश्रित धागों से स्टोल, दुपट्टे, गमछे, रुमाल और साड़ियां बनाई जाती हैं।
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सबसे ज्यादा डिमांड स्टोल और गमछों की रहती है। जैदपुर के अलावा मसौली ब्लॉक के बड़ागांव, बांसा, चौखंडी, सैदनुपर, सहरी, मैला, किंतूर, सफदरगंज, मुशकीनगर और शहाबपुर हथकरघा और वस्त्र उत्पाद के लिए जाने जाते हैं।
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सिरौलीगौसपुर ब्लॉक के रामपुर भवानीपुर और सआदतगंज, निंदूरा के सुडियामऊ और फतेहपुर, पूरे डलई ब्लॉक के मवई, पचलो और अलियाबाद, देवा के सद्दीपुर, नैनामऊ और अन्खा में भी बुनकरों की संख्या ज्यादा है। ओडीओपी योजना शुरू होने के बाद इन बुनकरों के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है।
तमिलनाडु से आता है सादा स्टोल
पहले सादे स्टोल यहीं पर बनते थे लेकिन पिछले 10 सालों से तमिलनाडु से सादे स्टोल मंगाए जा रहे हैं। जिले के बुनकर उनमें रंगाई और कढ़ाई करते हैं। यही माल सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन व अमेरिका निर्यात किया जाता है। अपने यहां झारखंड, बिहार, गुजरात, मुंबई और दिल्ली में स्टोल की मांग ज्यादा है। ओडीओपी योजना शुरू होने के बाद निर्यात में काफी उछाल आया है।
अयोध्या में जय श्री राम, मथुरा में राधे-राधे
धार्मिक नगरी में भी यहां बने स्टोल की खूब डिमांड रहती है। अयोध्या में जय श्री राम और मथुरा में राधे-राधे लिखे स्टोल की मांग लगातार होती रहती है। वहीं बनारस में जय महाकाल लिखे स्टोल की मांग ज्यादा रहती है।
चुनाव के समय बढ़ जाती है मांग
बुनकर व्यवसायी तफज्जुल हुसैन अंसारी का कहना है कि चुनाव के वक्त उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। अलग-अलग राजनीतिक दल पार्टी के झंडे के कलर के स्टोल या गमछे की डिमांड भेजते हैं। इसके अलावा बड़ी रैलियां होने पर भी मांग में इजाफा होता है।
सात हजार पावरलूम, दो हजार हथकरघा
सिर्फ जैदपुर नगर में आठ सौ पावरलूम और पांच सौ हथकरघा संचालित हैं। पूरे जिले में सात हजार पावरलूम और दो हजार के करीब हथकरघा से काम हो रहा है। पावरलूम से काम करने वाले कारीगराें की आमदनी हथकरघा में काम करने वालों से ज्यादा है।
ओडीओपी योजना से बढ़ा कारोबार
अंसार हैंडलूम समिति के संचालक जफर अंसारी ने बताया कि ओडीओपी योजना के तहत ऋण लेकर बड़ी मशीन लगाई। पहले उत्पाद आसपास के जनपदों में बिकते थे लेकिन फिर दायरा बढ़ा। पहले दूसरे प्रांतों और फिर विदेशों में मांग के अनुरूप माल का निर्यात कर रहे हैं।
2500 बुनकरों को दिया निशुल्क प्रशिक्षण
हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ओडीओपी योजना के तहत बुनकरों को प्रशिक्षण व ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले आठ सालों में 500 अधिक नई यूनिटें लग चुकी हैं। इनमें लगभग पांच हजार लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। अब तक करीब 2500 लोगों को निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया गया है। देश-विदेश में स्टॉल लगाने के लिए खर्च का वहन भी विभाग करता है।
- दिनेश चौरसिया, उपायुक्त उद्योग