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Barabanki News: हरित पट्टी का नामोनिशान नहीं, नाले पर 500 पक्के निर्माण

Thu, 14 Sep 2023 01:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 14 Sep 2023 01:10 AM IST
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No trace of green belt, 500 concrete constructions on the drain
बाराबंकी शहर के जमुरिया नाले का हाल।  
बाराबंकी। 20 साल पहले बाराबंकी शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख के आसपास थी। वर्ष 1984 में हुई अतिवृष्टि को छोड़कर कभी ऐसा नहीं हुआ कि जमुरिया नाले का पानी रुका हो। विकास होता गया और शहर का आकार तीन गुना बढ़ गया, जनसंख्या साढ़े तीन लाख हो गई। जमुरिया में पानी का दबाव तीन गुना बढ़ गया।
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ड्रेनेज का पानी भी जमुरिया में आने लगा। रोजाना टनों कूड़ा भी इसमें फेंका जाने लगा। नाले में दर्ज जमीन पर करीब 500 पक्के निर्माण हो गए। लेकिन जमुरिया नाले के दोनों किनारों की 22-22 मीटर जमीन पर कंक्रीट का जंगल है। लोगों ने नाले के अंदर तक मकान, दुकान व स्कूलों के भवन खड़े कर दिए हैं।
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देवा रोड के भेड़हा नाले के पास से निकला जमुरिया नाला शहर के अंदर से होते हुए रेठ नदी में गिरता है। 10 किमी लंबे इस नाले में छोटे बड़े मिलाकर करीब 200 नाले गिरते हैं। केवल शहर ही नहीं जहांगीराबाद व देवा इलाके का अतिरिक्त पानी भी जमुरिया से होकर रेठ नदी फिर गोमती में समाहित होता रहा है।
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बीते 10-12 सालों में शहर का अनियोजित विकास होता रहा। अभयनगर मोहल्ले के पास नई बस्ती व लखपेड़ाबाग के उस पार जमुरिया नदी के किनारे भी प्लाटिंग होने लगी तो जमुरिया के किनारों पर लोगाें का कब्जा होने लगा। अभयनगर में जमुरिया के ठीक बगल सड़क तक बना दी गई। अभयनगर-कमरियाबाग के पुल से कोठीडीह के पास तक जमुरिया नाले के किनारे तो गायब ही हो गए।
साल भर पहले ही तहसील प्रशासन ने 465 लोगों का अवैध कब्जा पाया और उन्हें नोटिस दी गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। हालात यह है कि आज का जमुरिया अपने किनारों के लिए नहीं बल्कि अपने स्वयं के वजूद के लिए संघर्ष कर रहा है।



दो विभागाें के बीच फुटबाल बना खुदाई का प्रस्ताव
वर्ष 2018 में जिला प्रशासन के अनुरोध पर सिंचाई विभाग ने जमुरिया नाले की खुदाई कराई थी। दो साल पहले फिर खुदाई व सफाई की कवायद शुरू हुई। नगर पालिका ने फाइल बाढ़ खंड को भेज दी। बाढ़ खंड ने इसे शहर का नाला बताते हुए नगर पालिका द्वारा ही सफाई की बात कही। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह कहते हैं कि यह हमारे अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है जबकि नगर पालिका के अधिकारी बीते दो साल से फाइल बाढ़ खंड में होने की बात कह रहे हैं।





20 साल पहले बनी महायोजना
वर्ष 2001 में महायोजना निर्धारित करते हुए जमुरिया नाले के दोनों किनारे हरित पट्टी घोषित किए गए। 10 साल पहले अभयनगर से घोसियाना पुल तक नाले के किनारे पत्थर लगाए गए। एआरटीओ कार्यालय के निकट करीब 300 बीघा जमीन चिह्नित करके रिवर फ्रंट बनाने की तैयारी थी। सब हवा-हवाई साबित हुआ।
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