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सालों से धूल फांक रही इको मशीन, बाहर होती रही जांचें
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बाराबंकी। जिला अस्पताल में हृदय की जांच करने वाली टू डी इको मशीन पिछले 10 साल से धूल फांक रही है। इस जांच को लेकर यहां पहुंचने वाले मरीज बाहर निजी सेंटरों पर हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं। इको जांच को इकोकार्डियोग्राफी व इकोकार्डियोग्राम भी कहा जाता है। इस जांच में ध्वनि तरंगों का प्रयोग करके दिल के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं। दिल की गति चाल व पंपिंग के बारे में पता किया जाता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में जांच के लिए मशीन होते हुए भी बीते 10 सालों में हजारों लोगों ने बाहर ही मंहगे रेट पर जांच कराई। एक ओर जिला अस्पताल में जांच की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर दावा किया जा रहा है। मगर पहले से आई मशीनों को कोई पुरसाहाल नहीं हैं। 10 साल पहले जिला अस्पताल में आने वाले हृदय रोगियों को सुविधा देते हुए तत्कालीन सीएमएम डॉ. वीएस शुक्ल ने शासन में पैरवी करके जिला अस्पताल को टू डी इको मशीन की सौगात दी थी।
हृदय रोग विभाग के एक कमरे में मशीन स्थापित की गई थी। कुछ दिन जांच हुई मगर उसके बाद तकन्रीिशयन की कमी के कारण चिकित्सक ही किसी तरह से कभी कभार जांच करते रहे। धीरे-धीरे अस्पताल प्रशासन ने ही इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया। जिसका नतीजा यह रहा कि बीते सात आठ साल से इस मशीन वाले कक्ष में ताला लगा रहता है। इकोकार्डियोग्राफी कराने के लिए लोगों को लखनऊ तक जाना पड़ रहा है। हृदय रोग विभाग में चिकित्सक होते हुए भी इको जांच बंद रही।
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अब तो हालात और बदतर हैं, क्योंकि दो माह पहले हृदय रोग विभाग में तैनात चिकित्सक डा. संजीव वर्मा सेवानिवृत्त हो गए और हृदय रोग विभाग की ओपीडी में भी ताला लगा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि टू डी इको मशीन है, मगर जांच इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि उसे संचालित करने वाले टेक्निशियन नहीं है। हृदय रोग विभाग में चिकित्सक न होने से ओपीडी तक बंद है। इसे लेकर शासन को पत्र भेजा गया है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में जांच के लिए मशीन होते हुए भी बीते 10 सालों में हजारों लोगों ने बाहर ही मंहगे रेट पर जांच कराई। एक ओर जिला अस्पताल में जांच की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर दावा किया जा रहा है। मगर पहले से आई मशीनों को कोई पुरसाहाल नहीं हैं। 10 साल पहले जिला अस्पताल में आने वाले हृदय रोगियों को सुविधा देते हुए तत्कालीन सीएमएम डॉ. वीएस शुक्ल ने शासन में पैरवी करके जिला अस्पताल को टू डी इको मशीन की सौगात दी थी।
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हृदय रोग विभाग के एक कमरे में मशीन स्थापित की गई थी। कुछ दिन जांच हुई मगर उसके बाद तकन्रीिशयन की कमी के कारण चिकित्सक ही किसी तरह से कभी कभार जांच करते रहे। धीरे-धीरे अस्पताल प्रशासन ने ही इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया। जिसका नतीजा यह रहा कि बीते सात आठ साल से इस मशीन वाले कक्ष में ताला लगा रहता है। इकोकार्डियोग्राफी कराने के लिए लोगों को लखनऊ तक जाना पड़ रहा है। हृदय रोग विभाग में चिकित्सक होते हुए भी इको जांच बंद रही।
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अब तो हालात और बदतर हैं, क्योंकि दो माह पहले हृदय रोग विभाग में तैनात चिकित्सक डा. संजीव वर्मा सेवानिवृत्त हो गए और हृदय रोग विभाग की ओपीडी में भी ताला लगा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि टू डी इको मशीन है, मगर जांच इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि उसे संचालित करने वाले टेक्निशियन नहीं है। हृदय रोग विभाग में चिकित्सक न होने से ओपीडी तक बंद है। इसे लेकर शासन को पत्र भेजा गया है।