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बाढ़ कार्यों में बरती जा रही लापरवाही
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कोटवाधाम (बाराबंकी)। मुख्यमंत्री ने तराई के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए जिन चार परियोजनाओं का ऑनलाइन शिलान्यास किया था उन परियोजनाओं के निर्माण में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। जिन लोगों को इसका जिम्मा सौंपा गया है वे महज चार श्रमिक लगाकर औपचारिकता निभा रहे हैं। इससे साफ है कि प्रदेश के मुखिया बाढ़ के प्रति जितना गंभीर हैं, जिम्मेदार उतने ही लापरवाह बने हुए हैं।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी की कटान व बाढ़ की समस्या को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने 34 करोड़ रुपये की लागत से पांच परियोजनाओं का ऑनलाइन शिलान्यास किया था और क्षेत्रीय विधायक शरद अवस्थी ने भूमि पूजन कर शुभारंभ किया था। उन कार्यों में विभागीय मिलीभगत से जमकर लापरवाही बरती जा रही है।
सनावा, विहड़, पसिनपुरवा, तेलवारी, गोबरहा, करौनी व पर्वतपुर आदि गांवों के पास कटान व पानी के बहाव को रोकने के लिए सिर्फ चार लेबर लगाकर कार्य कराया जा रहा है। यहां पर बोरी में मिट्टी भरकर नदी के किनारे लगाए जाने का जो कार्य किया जा रहा है, उससे साफ है कि यहां सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। यहां के अमित, पुताऊ, सिधाई, कमलेश, नकछेद व रविनंदन द्विवेदी आदि लोगों ने बताया की काम काफी लापरवाही से किया जा रहा है।
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इससे पहले भी कई परियोजनाएं नदी के पानी में बहती हुई दिखी हैं। वर्ष 2019 से यहां के लोगों को बचाने के लिए करोड़ों की लागत से स्पर निर्माण कराया जा रहा है जो अभी तक अधूरा ही पड़ा हुआ है। इसी प्रकार हर वर्ष करोड़ों रुपये सरयू नदी में बहाए जाते हैं मगर इसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा। अब 34 करोड़ की परियोजना भी लापरवाही की भेंट चढ़ती हुई नजर आ रही है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि ज्यादा श्रमिक लगाकर कार्य करने का निर्देश संबंधित को दिया गया है। अगर ऐसा नहीं है, काम के प्रति अगर लापरवाही बरती जा रही है तो ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी की कटान व बाढ़ की समस्या को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने 34 करोड़ रुपये की लागत से पांच परियोजनाओं का ऑनलाइन शिलान्यास किया था और क्षेत्रीय विधायक शरद अवस्थी ने भूमि पूजन कर शुभारंभ किया था। उन कार्यों में विभागीय मिलीभगत से जमकर लापरवाही बरती जा रही है।
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सनावा, विहड़, पसिनपुरवा, तेलवारी, गोबरहा, करौनी व पर्वतपुर आदि गांवों के पास कटान व पानी के बहाव को रोकने के लिए सिर्फ चार लेबर लगाकर कार्य कराया जा रहा है। यहां पर बोरी में मिट्टी भरकर नदी के किनारे लगाए जाने का जो कार्य किया जा रहा है, उससे साफ है कि यहां सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। यहां के अमित, पुताऊ, सिधाई, कमलेश, नकछेद व रविनंदन द्विवेदी आदि लोगों ने बताया की काम काफी लापरवाही से किया जा रहा है।
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इससे पहले भी कई परियोजनाएं नदी के पानी में बहती हुई दिखी हैं। वर्ष 2019 से यहां के लोगों को बचाने के लिए करोड़ों की लागत से स्पर निर्माण कराया जा रहा है जो अभी तक अधूरा ही पड़ा हुआ है। इसी प्रकार हर वर्ष करोड़ों रुपये सरयू नदी में बहाए जाते हैं मगर इसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा। अब 34 करोड़ की परियोजना भी लापरवाही की भेंट चढ़ती हुई नजर आ रही है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि ज्यादा श्रमिक लगाकर कार्य करने का निर्देश संबंधित को दिया गया है। अगर ऐसा नहीं है, काम के प्रति अगर लापरवाही बरती जा रही है तो ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।