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फिर कटी माइनर, 700 बीघा फसल जलमग्न
बाराबंक/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2015 11:31 PM IST
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विभागीय देख रेख के अभाव के चलते दस दिन के अंदर दूसरी बार छंदवल माइनर कटकर इलाके में तबाही मचाये हुए है। शिकायत के बाद भी विभागीय कर्मचारी पटाई नहीं करा रहे।
पांच मीटर माइनर कटने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों की करीब सात सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई है। जिस स्थान कटान दस दिन पूर्व हुई थी, उसी स्थान पर शुक्रवार की शाम एक बार फिर माइनर कटने से किसानों में काफी रोष व्याप्त है।
विकास खंड सूरतगंज के मीरामऊ-लोकईपुरवा के बीच छंदवल माइनर की करीब पांच मीटर कटान होने से एक दर्जन गांवों की करीब सात सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई। शारदा सहायक डबल नहर से निकली इस माइनर के कटने से एक किलोमीटर के दायरे की फसल डूब गई।
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इसकी सूचना ग्रामीणों ने विभाग को दी लेकिन कोई कर्मचारी मौके पर बांधने नहीं आया। अल्लापुर से लेकर मीरपुर तक तीन किलोमीटर की दूरी में पड़ने वाले रानीमऊ, नबींगंज लोकाईपुरवा, मीरपुर, बासिनपुरवा, सुढ़ियामऊ मीरामऊ, नदाऊपारा व बिलौली आदि गांवों की फसलें लबालब भरी हुई हैं।
यहां के किसान बाबादीन, कैलाश, अंगद कुमार, रामसिंह, भानू, बाबूराम वर्मा, राजेन्द्र प्रसाद, रामेन्द्र मोहन, देवराम, गयादत्त, रामशंकर, चन्द्रिका प्रसाद, सुभाश चन्द्र, कुर्बान प्रधान, हंसराज वर्मा, रामचन्दर, नन्हू वर्मा आदि ने बताया कि खेतों में ज्यादा पानी होने से धान की पकी फसल को काफी नुकसान हो सकता है।
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पांच मीटर माइनर कटने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों की करीब सात सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई है। जिस स्थान कटान दस दिन पूर्व हुई थी, उसी स्थान पर शुक्रवार की शाम एक बार फिर माइनर कटने से किसानों में काफी रोष व्याप्त है।
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विकास खंड सूरतगंज के मीरामऊ-लोकईपुरवा के बीच छंदवल माइनर की करीब पांच मीटर कटान होने से एक दर्जन गांवों की करीब सात सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई। शारदा सहायक डबल नहर से निकली इस माइनर के कटने से एक किलोमीटर के दायरे की फसल डूब गई।
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इसकी सूचना ग्रामीणों ने विभाग को दी लेकिन कोई कर्मचारी मौके पर बांधने नहीं आया। अल्लापुर से लेकर मीरपुर तक तीन किलोमीटर की दूरी में पड़ने वाले रानीमऊ, नबींगंज लोकाईपुरवा, मीरपुर, बासिनपुरवा, सुढ़ियामऊ मीरामऊ, नदाऊपारा व बिलौली आदि गांवों की फसलें लबालब भरी हुई हैं।
यहां के किसान बाबादीन, कैलाश, अंगद कुमार, रामसिंह, भानू, बाबूराम वर्मा, राजेन्द्र प्रसाद, रामेन्द्र मोहन, देवराम, गयादत्त, रामशंकर, चन्द्रिका प्रसाद, सुभाश चन्द्र, कुर्बान प्रधान, हंसराज वर्मा, रामचन्दर, नन्हू वर्मा आदि ने बताया कि खेतों में ज्यादा पानी होने से धान की पकी फसल को काफी नुकसान हो सकता है।