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मेयो अस्पताल पर 9.97 लाख का जुर्माना
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बाराबंकी। स्थायी लोक अदालत अधिकरण सिविल कोर्ट ने मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस को लापरवाही से इलाज करने पर एक महिला की मृत्यु हो जाने के परिवाद में नौ लाख 97 हजार सात सौ रुपये क्षतिपूर्ति दिए जाने का आदेश किया है। दो माह में यह राशि भुगतान न करने पर आठ प्रतिशत ब्याज दावा दाखिल करने की तिथि से देय होगा।
वीरेंद्र कुमार व उसकी बेटी और बेटे निवासी रसूलपुर मोहनलालगंज लखनऊ ने स्थायी लोक अदालत में परिवाद दाखिल किया कि उसकी पत्नी रानी देवी (36) को गैस व डायरिया से परेशान होने के कारण मेयो इंस्टीट्यूट ऑॅफ मेडिकल साइंसेस में इलाज कराने गई। जहां उसे 19 अप्रैल को भर्ती कर लिया गया।
अस्पताल में जांच के बाद खून की कमी होना बताया गया। चिकित्सकों ने अस्पताल में तत्काल खून चढ़ाने के लिए दबाव बनाया। परिवाद में आरोप लगाया गया कि बिना जांच कराए अपने ही ब्लड बैंक से खून चढ़ा दिया गया। उलझन और खुजली होने पर नर्स को बताया गया। फिर थोड़ी देर बाद रानी बेहोश हो गई।
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वहां के चिकित्सक ने मरीज की खराब स्थिति को देखते हुए वेंटीलेटर पर रख दिया। फिर डॉक्टरों ने लखनऊ के गोमती नगर स्थित अपने दूसरे संस्थान मेयो अस्पताल में मरीज को उपचार के लिए भेज दिया। घर वाले सरकारी बड़े अस्पताल भेजने का अनुरोध करते रहे परन्तु लखनऊ के मेयो अस्पताल के डॉक्टरों ने गलत खून चढ़ जाने के कारण इलाज के लिए और रुपये जमा कराने को कहा।
घर वालों ने रुपये का प्रबंध करके जमा किया। केस समरी देखने से स्पष्ट हुआ कि गलत खून चढ़ाने से रानी और बीमार हो गई। ठीक न होने पर घर वापस ले जाया गया। तबियत और खराब हो जाने के कारण घर वालों ने रानी को राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ में भर्ती कराया। इलाज के दौरान छह जून को रानी की मृत्यु हो गई।
घर वालों ने मेयो अस्पताल में गलत उपचार, ब्लड चढ़ाने और लापरवाही की शिकायत सीएमओ से की तो जांच दल ने प्रपत्रों में त्रुटियां पाईं। विपक्षी मेयो अस्पताल ने जवाब दावा मेें कहा कि रानी को गंभीर बीमारी होने पर इलाज किया गया है लेकिन अस्पताल में लापरवाही नहीं की गई है। अस्पताल में गरीब मरीजों का इलाज निशुल्क होता है।
स्थायी लोक अदालत अधिकरण के अध्यक्ष धर्मराज मिश्रा व सदस्या जज डॉ. रश्मि रस्तोगी ने एक मत से अस्पताल प्रबंधकों को 9,97,700 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। दो माह में भुगतान न करने पर आठ प्रतिशत दावा दाखिल करने की तिथि से परिवादी पाने का अधिकार होगा।
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वीरेंद्र कुमार व उसकी बेटी और बेटे निवासी रसूलपुर मोहनलालगंज लखनऊ ने स्थायी लोक अदालत में परिवाद दाखिल किया कि उसकी पत्नी रानी देवी (36) को गैस व डायरिया से परेशान होने के कारण मेयो इंस्टीट्यूट ऑॅफ मेडिकल साइंसेस में इलाज कराने गई। जहां उसे 19 अप्रैल को भर्ती कर लिया गया।
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अस्पताल में जांच के बाद खून की कमी होना बताया गया। चिकित्सकों ने अस्पताल में तत्काल खून चढ़ाने के लिए दबाव बनाया। परिवाद में आरोप लगाया गया कि बिना जांच कराए अपने ही ब्लड बैंक से खून चढ़ा दिया गया। उलझन और खुजली होने पर नर्स को बताया गया। फिर थोड़ी देर बाद रानी बेहोश हो गई।
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वहां के चिकित्सक ने मरीज की खराब स्थिति को देखते हुए वेंटीलेटर पर रख दिया। फिर डॉक्टरों ने लखनऊ के गोमती नगर स्थित अपने दूसरे संस्थान मेयो अस्पताल में मरीज को उपचार के लिए भेज दिया। घर वाले सरकारी बड़े अस्पताल भेजने का अनुरोध करते रहे परन्तु लखनऊ के मेयो अस्पताल के डॉक्टरों ने गलत खून चढ़ जाने के कारण इलाज के लिए और रुपये जमा कराने को कहा।
घर वालों ने रुपये का प्रबंध करके जमा किया। केस समरी देखने से स्पष्ट हुआ कि गलत खून चढ़ाने से रानी और बीमार हो गई। ठीक न होने पर घर वापस ले जाया गया। तबियत और खराब हो जाने के कारण घर वालों ने रानी को राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ में भर्ती कराया। इलाज के दौरान छह जून को रानी की मृत्यु हो गई।
घर वालों ने मेयो अस्पताल में गलत उपचार, ब्लड चढ़ाने और लापरवाही की शिकायत सीएमओ से की तो जांच दल ने प्रपत्रों में त्रुटियां पाईं। विपक्षी मेयो अस्पताल ने जवाब दावा मेें कहा कि रानी को गंभीर बीमारी होने पर इलाज किया गया है लेकिन अस्पताल में लापरवाही नहीं की गई है। अस्पताल में गरीब मरीजों का इलाज निशुल्क होता है।
स्थायी लोक अदालत अधिकरण के अध्यक्ष धर्मराज मिश्रा व सदस्या जज डॉ. रश्मि रस्तोगी ने एक मत से अस्पताल प्रबंधकों को 9,97,700 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। दो माह में भुगतान न करने पर आठ प्रतिशत दावा दाखिल करने की तिथि से परिवादी पाने का अधिकार होगा।