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Barabanki News: नाग देवता मंदिर में पूजा के साथ मंजीठा मेला शुरू
Thu, 10 Jul 2025 01:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 10 Jul 2025 01:12 AM IST
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सतरिख (बाराबंकी)। आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा से नाग पंचमी तक आयोजित होने वाले पारंपरिक मंजीठा मेला का शुभारंभ बुधवार को राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने किया। परंपरागत तौर पर इसकी शुरुआत मंजीठा स्थित श्री नाग देवता मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत और अमरीश रावत ने भी मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ भी मेला परिसर में जुटने लगी है। बृहस्पतिवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के नाग देवता मंदिर में दर्शन व पूजन के साथ मेले में भ्रमण के लिए आने की उम्मीद है। मेले में श्रद्धालु परंपरागत रूप से मिट्टी की मालिया में दूध और चावल भरकर मंदिर परिसर स्थित बांबी पर अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मंदिर में यह चढ़ावा अर्पित करने के बाद मालिया को घर के किसी कोने में रखने से सर्प का भय नहीं रहता है।
मंदिर में जिले के ही नही बल्कि अन्य जनपदों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गुरु पूर्णिमा से शुरू होकर नाग पंचमी तक आयोजित होने वाले इस पारंपरिक मेला में जिले के साथ ही आस पास के अन्य जिलों से जुड़े श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में हिस्सेदारी के लिए आते हैं।
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वाहनों के लिए अलग पार्किंग, डायवर्जन भी लागू
श्रद्धालुओं की जुटने वाली भीड़ को देखते हुए मेला स्थल के आसपास सुरक्षा और यातायात के विशेष प्रबंध किए गए हैं। दूर-दराज से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की अलग व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है। इसके साथ ही हैदरगढ़-बाराबंकी मार्ग पर बड़े वाहनों का डायवर्जन भी कर दिया गया है। मेला आयोजित होने तक सभी बड़े वाहन सतरिख होकर हरख होकर गंतव्य को जाएंगे।
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मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ भी मेला परिसर में जुटने लगी है। बृहस्पतिवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के नाग देवता मंदिर में दर्शन व पूजन के साथ मेले में भ्रमण के लिए आने की उम्मीद है। मेले में श्रद्धालु परंपरागत रूप से मिट्टी की मालिया में दूध और चावल भरकर मंदिर परिसर स्थित बांबी पर अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मंदिर में यह चढ़ावा अर्पित करने के बाद मालिया को घर के किसी कोने में रखने से सर्प का भय नहीं रहता है।
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मंदिर में जिले के ही नही बल्कि अन्य जनपदों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गुरु पूर्णिमा से शुरू होकर नाग पंचमी तक आयोजित होने वाले इस पारंपरिक मेला में जिले के साथ ही आस पास के अन्य जिलों से जुड़े श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में हिस्सेदारी के लिए आते हैं।
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वाहनों के लिए अलग पार्किंग, डायवर्जन भी लागू
श्रद्धालुओं की जुटने वाली भीड़ को देखते हुए मेला स्थल के आसपास सुरक्षा और यातायात के विशेष प्रबंध किए गए हैं। दूर-दराज से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की अलग व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है। इसके साथ ही हैदरगढ़-बाराबंकी मार्ग पर बड़े वाहनों का डायवर्जन भी कर दिया गया है। मेला आयोजित होने तक सभी बड़े वाहन सतरिख होकर हरख होकर गंतव्य को जाएंगे।