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Barabanki News: कहीं सेहत न बिगाड़ दे केमिकल से पका आम

Sat, 07 Jun 2025 01:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sat, 07 Jun 2025 01:00 AM IST
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Mangoes ripened with chemicals may harm your health
बाराबंकी। डाल पर प्राकृतिक तरह से पकने वाले आमों से पहले ही हाईवे से लेकर शहर की सड़कों के किनारे तक आम की बहार दिखने लगी है। इस मिठास के पीछे सेहत बिगाड़ने वाला एक धीमा जहर छिपा है। बाजार में कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित रसायनों से पका कर बेचे जा रहे आम का सेवल लिवर व गुर्दा के जानलेवा स्तर तक खतरनाक हो सकता है। कार्बाइड से पका कर तैयार आम की धड़ल्ले से हो रही बिक्री के बावजूद इसकी रोकथाम को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदार उदासीन बने हैं।
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बाराबंकी जिले में लगभग 12,000 हेक्टेयर में आम की खेती होती है। एक हेक्टेयर में औसतन 40 क्विंटल आम पैदा होता है। इस बार करीब 4.8 लाख क्विंटल (50 हजार टन) आम की आवक संभावित है। एक बागवान के अनुसार आम की परिपक्वता में 12-16 सप्ताह का समय लगता है, लेकिन मुनाफे की होड़ में व्यापारी इन्हें दो से तीन हफ्ते पहले तोड़ कर तेजी से पकाने के लिए प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल कर रहे हैं। बरसात से पहले ही डाल के आम के नाम पर केमिकल से पका कर तैयार आम को बेचा जा रहा है।
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जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा बताते हैं कि कार्बाइड व अन्य रसायनों से पकाए गए आम, केला व अन्य फलों के प्रयोग से पेट में अल्सर, गैस, जलन किडनी और लिवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे आम खाने से कैंसर और तंत्रिका रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। बताया कि केमिकल से पकाए गए आम में नेचुरल मिठास और पोषण की मात्रा भी कम होती है।
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कैलशियम कार्बाइड को आमतौर पर मसाला के नाम से जाना जाता है, इसका रासायनिक फार्मूला CaC2 है। इसका इस्तेमाल एसिटिलीन के स्रोत के तौर पर ब्लोटार्च और वेल्डिंग आदि के कार्यों के लिए किया जाता है। पानी के संपर्क में आकर कैल्शियम कार्बाइड एसिटिलीन गैस का निर्माण करता है जो कि आम को पकाने के लिए कारगर होती है। कैल्शियम कार्बाइड में सूक्ष्म मात्रा में आर्सेनिक और फास्फोरस हाइड्राइड पाए जाते हैं, जो कैंसर कारक हैं।

इस तरह पहचाने केमिकल से पके आम
- आमों को पानी से भरे किसी बाल्टी में डालने पर यदि यह तैरने लगे समझ लेना चाहिए कि इन्हें रसायनों की मदद से पकाया गया है।
- आम अगर हल्का हरापन लिए हो और झुर्रियां भी दिखायी दें तो समझ लेना चाहिए कि इसे पेड़ पर पकने से पहले ही तोड़ कर रसायन से पकाया गया है।
-केमिकल से पका आम ज्यादा चमकदार और अस्वाभाविक रूप से पीला होता है। इसके ऊपर सफेद या धूल जैसा पाउडर भी दिखता है।
- केमिकल से पके आम को काटने पर तेज गंध, अंदर से अधपका व सफेद गूदा भी मिलता है।
फल मंडी की नियमित तौर पर जांच कर निगरानी की जा रही है। जल्दी अभियान चला कर केमिकल से पका कर बेचे जाने वाले आम व अन्य फलों की जांच के लिए सैंपलिंग कार्रवाई भी शुरू होगी।
शैलेंद्र प्रताप सिंह, सहायक आयुक्त एफएसडीए
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