मालिनी अवस्थी के गीतों की रही धूम
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समय के साथ ही मालिनी के लोकगीत परवान चढ़ते गए। गाते गाते मालिनी श्रोताओं के बीच पहुंची तो वह भी झूमने लगे। महोत्सव ऑडिटोरियम में मालिनी के लोकगीतों की बयार में श्रोता देर तक आनंदित हुए।
मंच पर जैसे ही मालिनी अवस्थी ने कदम रखा पांडाल तालियों से गूंज उठा। मालिनी अवस्थी ने पहला गीत ‘तेरी सरकार आली मेरे हजरत मेरे वाली...’ प्रस्तुत कर लोगों को भक्तिरस में डुबो दिया।
इसके बाद सूफी गीत लागी नजरिया भरपूर निमाजमुद्दीन लागी नजरिया... गाया। लागल झुलनिया का धक्का बलम कलकत्ता... सुनकर श्रोता झूमने लगे। मालिनी ने एक-एक करके कई ऐसे गीत प्रस्तुत किए जिन्हें सुनने की श्रोता आस लगाए बैठे थे।
गीतों के प्रति लोगों की दीवानगी का आलम यह था कि वे ऑडिटोरियम के खंभों पर लटक-लटक कर गीत-संगीत का आनंद ले रहे थे। मालिनी ने भी अपने चिर-परचित अंदाज में श्रोताओं के बीच जाकर गीतों को परवान चढ़ाया।
गीतों की सुमधुर श्रंखला पर श्रोता एक ही जगह पर जमे रहने पर विवश हो गए। अंगना मेरे बाबा को भेजो सावन आया..., तेजिया पर लोटन काला नाग... खूब सराहा गया। ज्यों-ज्यों रात गहराती गई अवधी गीतों की रसधारा में श्रोता सरोबार होते गए।