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2300 हेक्टेयर में होगी मक्के की खेती
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बाराबंकी। कैश-क्रॉप के रूप में मेंथा की खेती करने वाले किसानों को मेंथा बाजार में मंदी ने जोर का झटका दिया है। महंगाई के दौर में किसानों की लागत व मेहनत तक नहीं निकल पा रही है। इससे वे काफी मायूस हैं। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने को लेकर मेंथा के विकल्प के रूप में 2300 हेक्टेयर में शंकर मक्के की खेती कराने की योजना कृषि विभाग की है।
इसे बढ़ावा देने के लिए किसानों को 52 सौ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से करीब सवा करोड़ रुपये का अनुदान सरकार की ओर से विभाग देगा। किसान रबी व जायद के सीजन में मक्के की खेती से बेहतर उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनेंगे।
जिले में रबी व जायद के सीजन में करीब सवा दो लाख हेक्टेयर में खेती की जाती है। कृषि विभाग के सलाहकार कैलाश नाथ पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास मिशन के तहत अब रबी के सीजन में नौ सौ व जायद के सीजन में 14 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में शंकर मक्का की खेती कराई जाएगी।
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मेंथा के विकल्प के रूप में कैश-क्रॉप (नकदी फसल) के रूप में किसान मक्के की खेती करें। इसको बढ़ावा देने के उन्हें सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा। इसे लेकर सभी ब्लॉकों का अलग-अलग लक्ष्य तय कर राजकीय बीज भंडार पर मक्के का हाईब्रीड बीज भी उपलब्ध करा दिया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर मक्के का हाईब्रीड बीज मिलेगा। वहीं फास्फेट को पौधों तक पहुंचाने के लिए तरल रसायन व नमी सूचक यंत्र भी अनुदान पर मिलेगा। इच्छुक किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर व न्यूनतम एक एकड़ क्षेत्रफल में मक्के की खेती करने के लिए अनुदान योजना का लाभ मिल सकेगा।
प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। बोआई के बाद तीन माह में जहां भुट्टे आने शुरू हो जाते हैं, वहीं पांच माह में फसल पककर तैयार हो जाती है। पैदावार सामान्यत: 70 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।
किसानों की नकदी फसल बनी मेंथा का रेट करीब तीन वर्षों से एक हजार का आंकड़ा पार नहीं कर पा रहा है। मेहनत व लागत मूल्य न निकलने से किसानों का मोहभंग होने लगा है। ऐसे में बढ़ती मांग के मद्देनजर सरकार किसानों के मुनाफे के लिए मक्के की खेती मक्के को बढ़ावा देने जा रही है।
बाजार में 18 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकने वाले मक्के की मांग मुर्गीदाना, मछली दाना, नमकीन व पापकॉर्न आदि बनाने के लिए बढ़ी है। इस लिहाज से मक्के की खेती किसानों के लिए फायदे की खेती साबित होगी।
उपकृषि निर्देशक अनिल कुमार सागर ने बताया कि जिले में नकदी फसल मेंथा के विकल्प के रूप में शंकर मक्के की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों की आय बढ़े। किसानों को मक्के की खेती पर प्रति हेक्टेयर 52 सौ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। ब्लॉकवार लक्ष्य तय कर राजकीय बीज भंडारों पर दो कंपनियों के बीज उपलब्ध करा दिए गए हैं।
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इसे बढ़ावा देने के लिए किसानों को 52 सौ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से करीब सवा करोड़ रुपये का अनुदान सरकार की ओर से विभाग देगा। किसान रबी व जायद के सीजन में मक्के की खेती से बेहतर उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनेंगे।
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जिले में रबी व जायद के सीजन में करीब सवा दो लाख हेक्टेयर में खेती की जाती है। कृषि विभाग के सलाहकार कैलाश नाथ पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास मिशन के तहत अब रबी के सीजन में नौ सौ व जायद के सीजन में 14 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में शंकर मक्का की खेती कराई जाएगी।
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मेंथा के विकल्प के रूप में कैश-क्रॉप (नकदी फसल) के रूप में किसान मक्के की खेती करें। इसको बढ़ावा देने के उन्हें सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा। इसे लेकर सभी ब्लॉकों का अलग-अलग लक्ष्य तय कर राजकीय बीज भंडार पर मक्के का हाईब्रीड बीज भी उपलब्ध करा दिया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर मक्के का हाईब्रीड बीज मिलेगा। वहीं फास्फेट को पौधों तक पहुंचाने के लिए तरल रसायन व नमी सूचक यंत्र भी अनुदान पर मिलेगा। इच्छुक किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर व न्यूनतम एक एकड़ क्षेत्रफल में मक्के की खेती करने के लिए अनुदान योजना का लाभ मिल सकेगा।
प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। बोआई के बाद तीन माह में जहां भुट्टे आने शुरू हो जाते हैं, वहीं पांच माह में फसल पककर तैयार हो जाती है। पैदावार सामान्यत: 70 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।
किसानों की नकदी फसल बनी मेंथा का रेट करीब तीन वर्षों से एक हजार का आंकड़ा पार नहीं कर पा रहा है। मेहनत व लागत मूल्य न निकलने से किसानों का मोहभंग होने लगा है। ऐसे में बढ़ती मांग के मद्देनजर सरकार किसानों के मुनाफे के लिए मक्के की खेती मक्के को बढ़ावा देने जा रही है।
बाजार में 18 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकने वाले मक्के की मांग मुर्गीदाना, मछली दाना, नमकीन व पापकॉर्न आदि बनाने के लिए बढ़ी है। इस लिहाज से मक्के की खेती किसानों के लिए फायदे की खेती साबित होगी।
उपकृषि निर्देशक अनिल कुमार सागर ने बताया कि जिले में नकदी फसल मेंथा के विकल्प के रूप में शंकर मक्के की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों की आय बढ़े। किसानों को मक्के की खेती पर प्रति हेक्टेयर 52 सौ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। ब्लॉकवार लक्ष्य तय कर राजकीय बीज भंडारों पर दो कंपनियों के बीज उपलब्ध करा दिए गए हैं।