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केंद्र 800 की जगह केवल 150 दवाएं, बाहर खरीदना मजबूरी
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बाराबंकी। दवा की कीमतों में 10 से 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी ने मरीजों की जेब ढीली करनी शुरु कर दी है। महंगाई की मार का असर यह है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की मांग बढ़ गई है। ये केंद्र दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। होनी चाहिए करीब 800 प्रकार की दवाईयां मगर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर महज 150 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध है। ऐसी हालत में मरीज मेडिकल स्टोर से मंहगी दवाएं खरीद रहे हैं।
अप्रैल के बाद ही दवाएं मंहगी होने लगी थी। दवा विक्रेताओं के अनुसार, डायबिडीज, हेपेटाइटिस, ब्लाड प्रेशर, गुर्दे की बीमारी, बुखार, दर्द, मानसिक रोगों में काम आने वाली दवाओं के दाम 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में लोग का झुकाव प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की तरफ तेजी से हुआ है। जिला मुख्यालय पर तीन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित है। इनमेे एक जिला महिला अस्पताल में, दूसरा लखपेड़ाबाग में व तीसरा हिन्द मेडिकल कालेज सफेदाबाद में संचालित है।
इनमें दवाओं की सप्लाई भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो करता है। सबसे अधिक मांग महिला अस्पताल वाले केंद्र पर होती है। यहां मिले संचालक वैस ने बताया कि होनी तो चाहिए करीब 800 प्रकार की दवाएं मगर वर्तमान में करीब डेढ़ सौ प्रकार की दवाएं ही केंद्र पर है। उन्होंने स्वीकार किया कि डिमांड इतनी है कि दवाएं आते ही स्टॉक समाप्त होने लगता है। यहां से रोज सैंकड़ों लोग दवा न मिलने से निराश लौट रहे हैं।
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पुरुष व महिला अस्पताल में रोजाना करीब 2000 से अधिक मरीज आते हैं। लेकिन जन औषधि केंद्र पर सभी दवाएं न मिलने से सैंकड़ों लोग रोजाना निजी दुकानों पर अपनी जेब ढीली करवाने को मजबूर हैं।
टाइप टू डायबिटीज में दी जाने वाली सीटाग्लिप्टिन औषधि केंद्र पर 57 रुपये की है जबकि बाहर कीमत 200 रुपये से अधिक है। डायबिटीज की दवा वीडाग्लिप्टिन मेटफोर्मिन नामक दवा केंद्र पर 70 रुपये की तो बाहर 250 रुपये की है। लीवर रोग में प्रयोग होने वाली यूडोलिप केंद्र पर 140 की है तो बाहर 400 रुपये के आसपास है।
लिजोलिड 600 टैबलेट एक एंटीबायोटिक दवा है, जिसका उपयोग गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में किया जाता है। औषधि केंद्र पर यह दवा 50 रुपये के आसपास है जबकि बाहर 250 से 300 रुपये में। सेफ्युरोक्सिम नामक दवा का प्रयोग जीवाण्विक संक्रमण में किया जाता है।
औषधि केंद्र पर कीमत मात्र 142 रुपये जबकि बाहर करीब 1000 रुपये है। एसिक्लोफेनेक पैरासिटामोल केंद्र पर आठ रुपये की है मगर मेडिकल स्टोर पर 30 रुपये में हैं। ऐसी करीब 150 प्रकार की दवाओं का यही हाल है।
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अप्रैल के बाद ही दवाएं मंहगी होने लगी थी। दवा विक्रेताओं के अनुसार, डायबिडीज, हेपेटाइटिस, ब्लाड प्रेशर, गुर्दे की बीमारी, बुखार, दर्द, मानसिक रोगों में काम आने वाली दवाओं के दाम 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में लोग का झुकाव प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की तरफ तेजी से हुआ है। जिला मुख्यालय पर तीन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित है। इनमेे एक जिला महिला अस्पताल में, दूसरा लखपेड़ाबाग में व तीसरा हिन्द मेडिकल कालेज सफेदाबाद में संचालित है।
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इनमें दवाओं की सप्लाई भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो करता है। सबसे अधिक मांग महिला अस्पताल वाले केंद्र पर होती है। यहां मिले संचालक वैस ने बताया कि होनी तो चाहिए करीब 800 प्रकार की दवाएं मगर वर्तमान में करीब डेढ़ सौ प्रकार की दवाएं ही केंद्र पर है। उन्होंने स्वीकार किया कि डिमांड इतनी है कि दवाएं आते ही स्टॉक समाप्त होने लगता है। यहां से रोज सैंकड़ों लोग दवा न मिलने से निराश लौट रहे हैं।
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पुरुष व महिला अस्पताल में रोजाना करीब 2000 से अधिक मरीज आते हैं। लेकिन जन औषधि केंद्र पर सभी दवाएं न मिलने से सैंकड़ों लोग रोजाना निजी दुकानों पर अपनी जेब ढीली करवाने को मजबूर हैं।
टाइप टू डायबिटीज में दी जाने वाली सीटाग्लिप्टिन औषधि केंद्र पर 57 रुपये की है जबकि बाहर कीमत 200 रुपये से अधिक है। डायबिटीज की दवा वीडाग्लिप्टिन मेटफोर्मिन नामक दवा केंद्र पर 70 रुपये की तो बाहर 250 रुपये की है। लीवर रोग में प्रयोग होने वाली यूडोलिप केंद्र पर 140 की है तो बाहर 400 रुपये के आसपास है।
लिजोलिड 600 टैबलेट एक एंटीबायोटिक दवा है, जिसका उपयोग गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में किया जाता है। औषधि केंद्र पर यह दवा 50 रुपये के आसपास है जबकि बाहर 250 से 300 रुपये में। सेफ्युरोक्सिम नामक दवा का प्रयोग जीवाण्विक संक्रमण में किया जाता है।
औषधि केंद्र पर कीमत मात्र 142 रुपये जबकि बाहर करीब 1000 रुपये है। एसिक्लोफेनेक पैरासिटामोल केंद्र पर आठ रुपये की है मगर मेडिकल स्टोर पर 30 रुपये में हैं। ऐसी करीब 150 प्रकार की दवाओं का यही हाल है।