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Barabanki News: तेंदुए ने हिरन को बनाया निवाला, ड्रोन से तलाश
Mon, 31 Aug 2026 01:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 31 Aug 2026 01:37 AM IST
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शरीफाबाद जंगल मे ड्रोन कैमरा से तेंदुए की तलाश करते वन कर्मी व ग्रामीण। -संवाद
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हैदरगढ़। चार दिनों की शांति के बाद एक बार फिर तेंदुए से दहशत का माहौल है। शरीफाबाद जंगल के पास शनिवार देर रात तेंदुए ने एक हिरन काे निवाला बना लिया। शिकार के बाद उसकी दहाड़ और खेतों में दिखे पगचिह्न से क्षेत्र में दहशत फैल गई है। वन विभाग की टीम ने ड्रोन से उसकी तलाश तेज कर दी है।
गोमती की तराई में शरीफाबाद के जंगल और आसपास के क्षेत्र में अगस्त के पहले सप्ताह से तेंदुए की आमद दर्ज की जा रही है। बीते 10 दिनों में तेंदुए ने लगातार वनरोज और जंगली जानवरों का शिकार किया। आबादी में एक किसान की बछिया पर भी हमले के निशान देखे गए थे।
वन विभाग की टीम ने निगरानी की और ग्रामीणों के साथ मिलकर हांका लगाया। विभाग ने तराई में पिंजरा रखकर बकरी बांधी थी। तेंदुआ पिंजरे की ओर न जाकर चकौरा मार्ग किनारे स्थित बाग में एक बंदर को पकड़ लिया व घनी झाड़ियों की ओर चला गया। सड़क पर यह दृश्य देखने वाले लोग भयभीत हो गए थे।
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इसके बाद पिंजरा तराई से उठाकर आबादी के करीब रख दिया गया। तीन-चार दिन तक तेंदुए की कोई आहट सुनाई नहीं दी थी। शनिवार देर रात चकौरा मार्ग किनारे फूलचंद के उड़द के खेत में उसने हिरन का शिकार कर लिया। दहाड़ते हुए अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। सड़क किनारे मकान बनाकर रहने वाले फूलचंद का परिवार रात भर घर में सहमा रहा। रविवार सुबह खेतों में तेंदुए के पगचिह्न देखे गए।
वन विभाग ने एक बार फिर पिंजरे का स्थान बदल दिया। अब इसे आबादी के किनारे सियाराम के घर के पास रखा गया है। विभाग ने ड्रोन कैमरे से तेंदुए की तलाश शुरू कर दी है। वन दरोगा अनुज कुमार सिंह ने बताया कि शाम पांच बजे ड्रोन कैमरा गांव पहुंच गया।
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गोमती की तराई में शरीफाबाद के जंगल और आसपास के क्षेत्र में अगस्त के पहले सप्ताह से तेंदुए की आमद दर्ज की जा रही है। बीते 10 दिनों में तेंदुए ने लगातार वनरोज और जंगली जानवरों का शिकार किया। आबादी में एक किसान की बछिया पर भी हमले के निशान देखे गए थे।
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वन विभाग की टीम ने निगरानी की और ग्रामीणों के साथ मिलकर हांका लगाया। विभाग ने तराई में पिंजरा रखकर बकरी बांधी थी। तेंदुआ पिंजरे की ओर न जाकर चकौरा मार्ग किनारे स्थित बाग में एक बंदर को पकड़ लिया व घनी झाड़ियों की ओर चला गया। सड़क पर यह दृश्य देखने वाले लोग भयभीत हो गए थे।
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इसके बाद पिंजरा तराई से उठाकर आबादी के करीब रख दिया गया। तीन-चार दिन तक तेंदुए की कोई आहट सुनाई नहीं दी थी। शनिवार देर रात चकौरा मार्ग किनारे फूलचंद के उड़द के खेत में उसने हिरन का शिकार कर लिया। दहाड़ते हुए अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। सड़क किनारे मकान बनाकर रहने वाले फूलचंद का परिवार रात भर घर में सहमा रहा। रविवार सुबह खेतों में तेंदुए के पगचिह्न देखे गए।
वन विभाग ने एक बार फिर पिंजरे का स्थान बदल दिया। अब इसे आबादी के किनारे सियाराम के घर के पास रखा गया है। विभाग ने ड्रोन कैमरे से तेंदुए की तलाश शुरू कर दी है। वन दरोगा अनुज कुमार सिंह ने बताया कि शाम पांच बजे ड्रोन कैमरा गांव पहुंच गया।