फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   lemon

तीन महीने में बंदियों को पिला दिया 36 क्विंटल नींबू

Thu, 19 May 2022 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 19 May 2022 12:12 AM IST
विज्ञापन
lemon
बाराबंकी। जिला जेल में बंदियों पर अफसर कितना मेहरबान है। इसका नमूना देखना है तो इस वर्ष के शुरूआती तीन महीने लीजिए। इन महीनों में जब नींबू की कीमतें आसमान पर थीं तब बंदियों को प्रतिदिन एक नींबू दिया गया। मतलब जेल में रोजाना औसतन 40 किलो का वितरण किया गया। इस तरह से तीन माह में करीब 36 क्विंटल नींबू सिर्फ बंदियों को पिला दिया गया। जेल अफसर कहते हैं कि कोरोना काल के कारण डॉक्टरों की सलाह पर प्रतिदिन बंदियों को नींबू दिया गया। मगर बंदी इससे इंकार कर रहे हैं।
विज्ञापन

क्योंकि जिन तीन महीनों में नींबू की खरीद दिखाई गई उस समय डेढ़ सौ से लेकर पौने तीन सौ रुपये किलो तक बाजार में भाव था। आम आदमी नींबू के स्वाद को तरस गया था। ऐसे में बंदियों पर यह मेहरबानी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही है। यदि इसकी जांच हुई तो जेल में बड़े नींबू घोटाले की पोल खुल सकती है।
विज्ञापन

जिला जेल की 20 बैरकों में औसतन प्रतिदिन करीब चौदह सौ बंदी/ कैदी रहते हैं। बीते जनवरी, फरवरी और मार्च में जब नींबू की कीमतें आसमान पर थीं तो उस दौर में प्रतिदिन एक बंदी को एक नींबू दिया गया। इस तरह करीब 40 किलो नींबू की एक दिन में खरीद की गई। इस पर औसतन दो सौ रुपये किलो के हिसाब से आठ हजार रुपये खर्च किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जेल अफसर इस संबंध में अलग-अलग बयानबाजी कर रहे हैं। जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह बताते हैं कि कोरोना के चलते प्रतिदिन बंदियों को भोजन के समय एक नींबू दिया जा रहा था। इसकी खरीद यहां सब्जी आपूर्ति करने वाले से की गई है। जबकि जेलर आलोक शुक्ला का कहना है कि डॉक्टर जब सलाह देते थे तब बंदियों को नींबू दिया गया।
मजेदार बात यह है कि आजकल भीषण गर्मी में अप्रैल और मई मिलाकर करीब डेढ़ महीने से एक भी नींबू की खरीद नहीं हुई है। ऐसे में कौन सही है और कौन गलत, यह अपने आप में कहीं न कहीं गड़बड़ी की ओर इशारा है। क्योंकि जेल में बंदियों से मुलाकात को लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया कराने तक के लिए वसूली की शिकायतें अक्सर होती रहती हैं। (संवाद)
नींबू तो दूर बिना पैसे के नहीं होती मुलाकात
जिला जेल में निरुद्ध बंदी जब पेशी पर आते हैं या जमानत पर रिहा होते हैं तो वह अंदर की हकीकत बयां करते हुए कहते हैं कि जेल में नींबू मिलना तो दूर बिना पैसा दिए कोई काम नहीं होता है। एक बंदी ने तो बताया कि महंगा नींबू कहां से दे देंगे। यहां पैसा देकर तो सारी सुविधाएं मिल सकती हैं पर सरकारी स्तर पर ठीक से खाना-पानी मिलना मुश्किल है।
पंजाब जेल से बड़ी नींबू घोटाला
बताते हैं कि कुछ दिन पहले बंदियों की शिकायत पर पंजाब जेल में 50 किलो नींबू के घोटाले की जांच हुई तो जेलर को निलंबित कर दिया गया। कपूरथला की मॉर्डर्न जेल में वहां के मंत्री द्वारा जेल का निरीक्षण किया गया था जिसमें घोटाले की बात पकड़ी गई थी। बाराबंकी जेल में तो प्रतिदिन करीब 40 किलो और तीन महीने में औसतन 36 क्विंटल नींबू बंदियों को पिला दिया गया। इसकी जांच निष्पक्ष हुई तो यहां भी कई की गर्दन नपनी तय है।

जेल में जिन बंदियों की भंडारे में ड्यूटी रहती है सिर्फ उनको डॉक्टरों की सलाह पर नींबू दिया जाता है। यदि प्रति बंदी एक नींबू बाराबंकी जेल में दिया गया है तो वहां के अफसर इसका जवाब देंगे। अभी हमारे पास इसकी कोई शिकायत या जानकारी नहीं है। मगर पता कराते हैं कि पूरा मामला क्या है।
-संजीव त्रिपाठी, डीआईजी जेल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed