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Barabanki News: इलाज व जांचों का अभाव बढ़ा रहा मरीजों का दर्द
Wed, 22 Jan 2025 01:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 22 Jan 2025 01:37 AM IST
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जिला अस्पताल की पैथालॉजी के बाहर जांच के लिए लाइन में लगे मरीज।
बाराबंकी। जिला अस्पताल में इलाज कराना आसान नहीं है। टोकन लेकर पर्चा बनवाने और डॉक्टर को दिखाने तक में ही दिन बीत जाता है। जिस मरीज को जांच के लिए लिख दिया जाता है उसे अगले दिन आना पड़ता है या फिर निजी पैथोलॉजी में जाकर जांच करानी पड़ती है। टोकन से पर्चा बनवाने तक में मरीज को दो घंटे व डॉक्टर को दिखाने में डेढ़ घंटे तक का समय लग जाता है। जब तक जांच के लिए पैथाेलॉजी में पहुंचते हैं दोपहर हो जाती है और उन्हें जांच बंद होने का हवाला देते हुए वापस कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में आम आदमी का दर्द और बढ़ जाता है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन 1,200 से 1,500 मरीज प्रतिदिन देखे जाते हैं। वहीं, करीब 200 से 250 लोग जांच कराने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इन्हें न तो ढंग से इलाज मिल पा रहा है और न ही जांचें हो पा रही है। कभी सर्वर की समस्या तो कभी भीड़ के चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो रहा है।
हैदरगढ़ से आई निशा ने बताया कि सुबह आठ बजे अस्पताल आ गई थी, टोकन से लेकर दवा लेने में 12 बज गए। जब जांच कराने पहुंची तो समय समाप्त होने की बात कहकर वापस कर दिया। पीरबटावन की अनीशउनीशा ने बताया कि सुबह सात बजे से लाइन में लगने के बाद 10:30 बजे एक्सरे हो पाया, लेकिन रिपोर्ट लेने के लिए अगले दिन बुलाया है। वार्ड में भर्ती रंगीला को ईसीजी कक्ष की जानकारी न होने के कारण उन्हें पूरे अस्पताल में भटकना पड़ा। कई लोगों से पूछने के बाद ईसीजी कक्ष तक पहुंचीं तो यहां पर समय समाप्त होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। रामप्रसाद ने बताया कि नौ बजे लाइन में लग गया था। टोकन लेने और पर्चा बनवाने व दवा लेने में दोपहर के एक बज गए। जब जांच कराने पहुंचा तो कल आने की बात कहकर वापस कर दिया गया।
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प्रशिक्षुओं के सहारे अल्ट्रासाउंड जांच
जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। यहां पर रेडियोलॉजिस्ट न होने की वजह से मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच प्रशिक्षुओं से कराई जाती है। वहीं ईएनटी और हृदयरोग के डॉक्टर न होने की वजह से मरीज बाहर से इलाज कराने को मजबूर हैं।
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बढ़ाया जाएगा समय
मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिले इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। जांच कराने वाले मरीजों को वापस न लौटना पड़े इसके लिए समय बढ़ाया जाएगा।
- डॉ. वीपी सिंह, प्रभारी सीएमएस
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अस्पताल में बढ़ी नेत्र रोगियों की संख्या
फोटो-02
सिरौलीगौसपुर (बाराबंकी)। बदलते मौसम के चलते सोमवार को सौ बेड वाले अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ रही। पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी व दवा वितरण कक्ष तक लंबी कतारें लगी रहीं। इसमें सबसे ज्यादा आंख की बीमारी से संबंधित मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे।
मंगलवार को अस्पताल की ओपीडी में 475 मरीजों के पर्चे बनाए गए। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हसन सलीम ने बताया कि आंखों के ऑपरेशन का समय चल रहा है। नवंबर से अब तक करीब 700 लोगों के आंख का ऑपरेशन हो चुका है। इनमें गोंडा व बहराइच के मरीज भी शामिल हैं। खांसी, जुकाम, बुखार व त्वचा रोगों के मरीजों में भी इजाफा हुआ है। मलेरिया व मियादी बुखार की जांचों में कोई पॉजीटिव नहीं पाया गया। अधीक्षक डॉ. धीरेंद्र पटेल ने बताया कि मौसम बदलने से अचानक से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। (संवाद)
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जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन 1,200 से 1,500 मरीज प्रतिदिन देखे जाते हैं। वहीं, करीब 200 से 250 लोग जांच कराने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इन्हें न तो ढंग से इलाज मिल पा रहा है और न ही जांचें हो पा रही है। कभी सर्वर की समस्या तो कभी भीड़ के चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो रहा है।
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हैदरगढ़ से आई निशा ने बताया कि सुबह आठ बजे अस्पताल आ गई थी, टोकन से लेकर दवा लेने में 12 बज गए। जब जांच कराने पहुंची तो समय समाप्त होने की बात कहकर वापस कर दिया। पीरबटावन की अनीशउनीशा ने बताया कि सुबह सात बजे से लाइन में लगने के बाद 10:30 बजे एक्सरे हो पाया, लेकिन रिपोर्ट लेने के लिए अगले दिन बुलाया है। वार्ड में भर्ती रंगीला को ईसीजी कक्ष की जानकारी न होने के कारण उन्हें पूरे अस्पताल में भटकना पड़ा। कई लोगों से पूछने के बाद ईसीजी कक्ष तक पहुंचीं तो यहां पर समय समाप्त होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। रामप्रसाद ने बताया कि नौ बजे लाइन में लग गया था। टोकन लेने और पर्चा बनवाने व दवा लेने में दोपहर के एक बज गए। जब जांच कराने पहुंचा तो कल आने की बात कहकर वापस कर दिया गया।
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प्रशिक्षुओं के सहारे अल्ट्रासाउंड जांच
जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। यहां पर रेडियोलॉजिस्ट न होने की वजह से मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच प्रशिक्षुओं से कराई जाती है। वहीं ईएनटी और हृदयरोग के डॉक्टर न होने की वजह से मरीज बाहर से इलाज कराने को मजबूर हैं।
बढ़ाया जाएगा समय
मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिले इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। जांच कराने वाले मरीजों को वापस न लौटना पड़े इसके लिए समय बढ़ाया जाएगा।
- डॉ. वीपी सिंह, प्रभारी सीएमएस
अस्पताल में बढ़ी नेत्र रोगियों की संख्या
फोटो-02
सिरौलीगौसपुर (बाराबंकी)। बदलते मौसम के चलते सोमवार को सौ बेड वाले अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ रही। पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी व दवा वितरण कक्ष तक लंबी कतारें लगी रहीं। इसमें सबसे ज्यादा आंख की बीमारी से संबंधित मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे।
मंगलवार को अस्पताल की ओपीडी में 475 मरीजों के पर्चे बनाए गए। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हसन सलीम ने बताया कि आंखों के ऑपरेशन का समय चल रहा है। नवंबर से अब तक करीब 700 लोगों के आंख का ऑपरेशन हो चुका है। इनमें गोंडा व बहराइच के मरीज भी शामिल हैं। खांसी, जुकाम, बुखार व त्वचा रोगों के मरीजों में भी इजाफा हुआ है। मलेरिया व मियादी बुखार की जांचों में कोई पॉजीटिव नहीं पाया गया। अधीक्षक डॉ. धीरेंद्र पटेल ने बताया कि मौसम बदलने से अचानक से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। (संवाद)