{"_id":"65ee2a370ba30ae240036774","slug":"kidney-stones-become-a-household-disease-food-is-responsible-barabanki-news-c-315-1-brp1006-114236-2024-03-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: गुर्दे में पथरी बनी घर-घर की बीमारी, खानपान जिम्मेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: गुर्दे में पथरी बनी घर-घर की बीमारी, खानपान जिम्मेदार
Mon, 11 Mar 2024 03:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 11 Mar 2024 03:16 AM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। एक दशक पहले तक तक जिला अस्पताल में दूसरे या तीसरे दिन गुर्दे की पथरी से ग्रस्त कोई मरीज आता था। लेकिन आज रोजाना 15 नए मरीज पहुंच रहे हैं। शहर के दो दर्जन निजी अस्पतालों में भी रोजाना 150 से 210 मरीज पहुंच रहे हैं। शायद ही कोई परिवार हाे जिनका कोई सदस्य गुर्दे की पथरी की बीमारी से ग्रसित न हो। गुर्दे की पथरी के अधिकतर मामले खानपान से जुड़े हैं।
गुर्दे की पथरी का दर्द असहनीय होता है। इसको निकालने के लिए दूरबीन विधि का प्रयोग चलन में है। बिना चीरा व टांका लगाए मरीज को दो से तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। गंभीर मामला होने पर ही डॉक्टर ज्यादा दिन भर्ती करते हैं। लेकिन जिला अस्पताल में दूरबीन विधि से गुर्दे की पथरी के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। कुछ दिन पहले तक यहां तैनात रहे डॉ. अनिल शुक्ल सामान्य तरीके से ऑपरेशन करके पथरी निकाल देते थे मगर दो साल पहले उनका तबादला लखीमपुर होने के बाद ऐसे ऑपरेशन भी सर्जन बड़ी मुश्किल से करते हैं। जबकि निजी में 40 से 50 हजार रुपये खर्च होना सामान्य बात है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा कहते हैं कि कम पानी पीने और अपाच्य भोज्य पदार्थ गुर्दे की पथरी का कारण बन रहे हैं।
ये हैं लक्षण
गुर्दे की पथरी मूत्र के रसायनों से बनती है। जाे अक्सर चार प्रकार की कैल्शियम ऑक्सालेट, यूरिक एसिड, स्ट्रुवाइट और सिस्टीन होती है। सामान्य लक्षणों में पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द, मूत्र में खून आना, जी मचलाना, उल्टी, बुखार व ठंड लगना है।
विज्ञापन
छह मिमी से बड़ी पथरी है तो होशियार
चिकित्सकों की मानें तो गुर्दे में छोटी मोटी पथरी मूत्र मार्ग से निकल जाती है। लेकिन पथरी छह मिमी की हो तो सतर्क होने की जरूरत है। सर्जन डॉ. अनिल कुमार शुक्ल बताते हैं कि छह एमएम से बड़ी पथरी गुर्दे पर प्रभाव डालती है।
विज्ञापन
गुर्दे की पथरी का दर्द असहनीय होता है। इसको निकालने के लिए दूरबीन विधि का प्रयोग चलन में है। बिना चीरा व टांका लगाए मरीज को दो से तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। गंभीर मामला होने पर ही डॉक्टर ज्यादा दिन भर्ती करते हैं। लेकिन जिला अस्पताल में दूरबीन विधि से गुर्दे की पथरी के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। कुछ दिन पहले तक यहां तैनात रहे डॉ. अनिल शुक्ल सामान्य तरीके से ऑपरेशन करके पथरी निकाल देते थे मगर दो साल पहले उनका तबादला लखीमपुर होने के बाद ऐसे ऑपरेशन भी सर्जन बड़ी मुश्किल से करते हैं। जबकि निजी में 40 से 50 हजार रुपये खर्च होना सामान्य बात है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा कहते हैं कि कम पानी पीने और अपाच्य भोज्य पदार्थ गुर्दे की पथरी का कारण बन रहे हैं।
विज्ञापन
ये हैं लक्षण
गुर्दे की पथरी मूत्र के रसायनों से बनती है। जाे अक्सर चार प्रकार की कैल्शियम ऑक्सालेट, यूरिक एसिड, स्ट्रुवाइट और सिस्टीन होती है। सामान्य लक्षणों में पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द, मूत्र में खून आना, जी मचलाना, उल्टी, बुखार व ठंड लगना है।
विज्ञापन
छह मिमी से बड़ी पथरी है तो होशियार
चिकित्सकों की मानें तो गुर्दे में छोटी मोटी पथरी मूत्र मार्ग से निकल जाती है। लेकिन पथरी छह मिमी की हो तो सतर्क होने की जरूरत है। सर्जन डॉ. अनिल कुमार शुक्ल बताते हैं कि छह एमएम से बड़ी पथरी गुर्दे पर प्रभाव डालती है।