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देवा में उड़ते हैं कौमी एकता व आपसी सद्भाव के रंग

Sun, 12 Mar 2017 09:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sun, 12 Mar 2017 09:57 PM IST
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Kawmi unity and colors of mutual harmony in Deva
देवा में उड़ते हैं कौमी एकता व आपसी सद्भाव के रंग - फोटो : अमर उजाला
कौमी एकता व आपसी सद्भाव के रंग से सराबोर देवा की होली को अवध की शान माना जाता है। यहां पर होली के दिन फिजाओं में उड़ता रंग नई इबारत लिखता है।
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कौमी एकता द्वार से परंपरागत तरीके से फूलों की होली से देवा की होली शुरु होती है। और उसके बाद ठीक 12 बजे दोपहर सूफी संत की मजार पर दिल खोलकर रंग खेलने के बाद इसका समापन होता है। मजार पर खेले जाने वाली इस अनूठी होली को देखने के लिए देश विदेश से लोग यहां बड़ी तादाद में पहुंचते हैं।      

जो रब है वही राम है का संदेश देकर पूरी दुनिया को एकता के सूत्र में पिरोने वाले महान सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की तपोभूमि देवा में होली के पर्व में एक अलग नजारा नजर आता है।
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हिंदू मुस्लिम सिख आदि सभी धर्म और वर्गों के लोग एक साथ मिलकर यहां होली खेलकर कौमी एकता व सद्भाव का ऐसा अनूठा नजारा पेश करते हैं कि देखने वाले मंत्र मुक्त हो जाते हैं। बताते हैं कि सूफी संत हाजी वारिस अली शाह अपने जीवन काल में होली के दिन स्वयं कस्बे में मौजूद रहकर अपने  शिष्यो व भक्तों के साथ होली खेलते थे।  
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देवा की वारसी होली समिति के अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी व सचिव जगदीश निगम बताते हैं कि करीब 45 वर्ष पूर्व से अस्तित्व में आई यह होली समिति देवा की होली को यादगार बनाने के लिए हर वर्ष पारंपरिक व भिन्न-भिन्न आयोजन कराते कराए जाते रहे हैं।

शहजादे आलम वारसी व जगदीश निगम ने संयुक्त रुप से बताया कि होली के दिन प्रात: 8 बजे कौमी एकता द्वार पर मटकी फोड़ व फूलों की होली के साथ होली की शुरुआत होती है। इसके बाद वर्तमान चेयरमैन के नेतृत्व में जुलूस निकाला जाता है। यह विशाल जुलूस गाजे बाजे व डीजे से सुसज्जित हो होकर निर्धारित मार्गो से होता हुआ 12 बजे दोपहर मजार शरीफ पर पहुंचता है।

और उसके बाद वहां रंग और फूलों की होली खेलने के बाद होली का समापन होता है इस अद्भुत नजारे को देखने व अपने कैमरे में कैद करने के लिए देश के कोने-कोने विदेश से श्रद्धालु वह मीडिया कर्मी यहां मौजूद रहते हैं। चेयरमैन साहबे आलम वारसी बताते हैं कि देवा की ऐतिहासिक होली का नेतृत्व करना अविस्मरणीय क्षण है।


पूरे देश को देवा की होली से सबक लेना चाहिए। वहीं पूर्व सभासद राजकुमार श्रीवास्तव ने बताया की पूरे अवध में देवा की होली की ऐसी अनूठी शान देशभर में कहीं नहीं देखने को मिलती है। निश्चित तौर पर देवा की होली अवध की शान है
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