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कस्तूरबा स्कूलों को भेजे गए पैसों की होगी जांच
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बाराबंकी। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों को भेजे गए पैसों को किस मद में खर्च किया गया है इसके आदेश शासन स्तर से दिए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारी प्रपत्रों को दुरुस्त करने में लग गए हैं। कह रहे हैं कि जो पैसा शेष बचा है यदि विद्यालय नहीं खुलते हैं तो उसे शासन को वापस कर दिया जाएगा।
जिले में 15 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की संख्या 1500 के आसपास बताई जा रही है। लेकिन कोरोना काल के चलते ये विद्यालय पिछले साल से बंद चल रहे हैं। सिर्फ यहां पर तैनात शिक्षिकाएं ही विद्यालय में आती हैं।
शासन स्तर से इसके लिए इस वर्ष करीब 54 लाख रुपये की राशि भेजी गई थी। लेकिन विभाग इसमें से महज 37 लाख रुपये ही खर्च कर पाया है। शेष करीब 17 लाख रुपया अभी भी विभाग के खाते में पड़ा हुआ है। विभाग इस पैसे को खर्च करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। वहीं शासन स्तर से कस्तूरबा विद्यालयों को भेजे गए पैसे की जांच कराए जाने के आदेश के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। यहां प्रपत्रों को दुरुस्त करने का कार्य जोरों पर चल रहा है।
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जिले में 15 कस्तूरबा विद्यालय संचालित हैं लेकिन कोरोना संकट की वजह से ये मौजूदा समय में पूरी तरह से बंद चले रहे हैं। इन विद्यालयों के लिए शासन से 54 लाख रुपये मिले थे जिसमें से 37 लाख खर्च हुए हैं। शेष पैसा खाते में पड़ा है। यदि विद्यालय नहीं खुलते हैं तो ये पैसा शासन को वापस कर दिया जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, बीएसए
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जिले में 15 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की संख्या 1500 के आसपास बताई जा रही है। लेकिन कोरोना काल के चलते ये विद्यालय पिछले साल से बंद चल रहे हैं। सिर्फ यहां पर तैनात शिक्षिकाएं ही विद्यालय में आती हैं।
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शासन स्तर से इसके लिए इस वर्ष करीब 54 लाख रुपये की राशि भेजी गई थी। लेकिन विभाग इसमें से महज 37 लाख रुपये ही खर्च कर पाया है। शेष करीब 17 लाख रुपया अभी भी विभाग के खाते में पड़ा हुआ है। विभाग इस पैसे को खर्च करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। वहीं शासन स्तर से कस्तूरबा विद्यालयों को भेजे गए पैसे की जांच कराए जाने के आदेश के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। यहां प्रपत्रों को दुरुस्त करने का कार्य जोरों पर चल रहा है।
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जिले में 15 कस्तूरबा विद्यालय संचालित हैं लेकिन कोरोना संकट की वजह से ये मौजूदा समय में पूरी तरह से बंद चले रहे हैं। इन विद्यालयों के लिए शासन से 54 लाख रुपये मिले थे जिसमें से 37 लाख खर्च हुए हैं। शेष पैसा खाते में पड़ा है। यदि विद्यालय नहीं खुलते हैं तो ये पैसा शासन को वापस कर दिया जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, बीएसए