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जेल में गैस सिलेंडर सप्लाई के नाम पर भी हुआ खेल
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बाराबंकी। जिला कारागार में नींबू घोटाले के बाद दूसरे मामले भी सामने आ रहे हैं। यहां गैस सिलिंडर आपूर्ति करने के नाम पर भी खेल हुआ है। बताया जा रहा है कि हर महीना करीब 140 सिलिंडर जेल में लगते हैं। जबकि इनमें से कुछ सिलेंडर न लेकर एजेंसी से सिर्फ पर्ची ही ली जाती है। इसमें एजेंसी संचालक और जेल अफसरों की सांठगांठ उजागर हुई है। वहीं जेल की कैंटीन भी तीन सिपाहियों के इशारे पर चलती है। इसके साथ ही जिन कर्मचारियों का विवाद में नाम आया था उन पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बाराबंकी जिला जेल में हुए लाखों रुपये के नींबू घोटाला, बंदियों को घटिया भोजन देने आदि मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जहां इसकी डीजी स्तर से जांच कराई गई वहीं जेल मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने भी छापा मारा था। मंत्री ने जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह, एक डिप्टी जेलर व दो बंदीरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। मगर अब निलंबित जेल अधीक्षक द्वारा किए गए दूसरे कारनामे भी सामने आने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यहां पर औसतन प्रतिदिन करीब चौदह सौ बंदी/ कैदी निरुद्ध रहते हैं। इनके भोजन बनाने के लिए गैस सिलिंडर का इस्तेमाल होता है। एजेंसी संचालकों की माने तो प्रतिमाह जेल में करीब 140 घरेलू सिलिंडर की आपूर्ति की जाती है। लेकिन इसमें भी खेल होता है। जितने सिलिंडर कागजों में दिखाई देते हैं उतने यहां मंगाए नहीं जाते हैं। यदि महीने में 140 सिलिंडर आते हैं तो सिर्फ 110 के आसपास ही लिए जाते हैं जबकि 30 से 40 सिलिंडर की सिर्फ पर्ची बनवा ली जाती है। इसमें एजेंसी संचालक व जेल अफसरों की मिलीभगत रहती है।
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वहीं जेल में डिप्टी जेलर की कमी के चलते लंबे समय से यह काम हेड जेल वार्डर प्रेमचंद्र मौर्या से कराया जा रहा है। आरोप है कि मुलाकात, मुलाहिजा आदि के नाम पर इनके द्वारा बंदियों का जमकर उत्पीड़न किया जाता है। वहीं जेल की कैंटीन को सिपाही भगतराम वर्मा, रवींद्र कुमार भारती व चंद्रलाल पाल द्वारा मनमाने तरीके से कराया जा रहा है। जबकि जेल वार्डर छोटेलाल लगातार दो साल से मुलाकात ड्यूटी करते हुए खूब मनमानी कर रहे हैं। यहां के कुछ जेल वार्डर करीब एक साल पहले तबादला किए जा चुके हैं लेकिन इसके बावजूद इनको रिलीव नहीं किया गया।
जेल में शासन की मंशा के अनुरूप नियमानुसार ही काम हो रहा है। गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करके ही बंदी/कैदियों का भोजन तैयार कराया जाता है। यदि कोई कर्मचारी मनमानी करता मिलेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-आलोक शुक्ला, जेलर/ प्रभारी जेल अधीक्षक
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बाराबंकी जिला जेल में हुए लाखों रुपये के नींबू घोटाला, बंदियों को घटिया भोजन देने आदि मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जहां इसकी डीजी स्तर से जांच कराई गई वहीं जेल मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने भी छापा मारा था। मंत्री ने जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह, एक डिप्टी जेलर व दो बंदीरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। मगर अब निलंबित जेल अधीक्षक द्वारा किए गए दूसरे कारनामे भी सामने आने लगे हैं।
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बताया जा रहा है कि यहां पर औसतन प्रतिदिन करीब चौदह सौ बंदी/ कैदी निरुद्ध रहते हैं। इनके भोजन बनाने के लिए गैस सिलिंडर का इस्तेमाल होता है। एजेंसी संचालकों की माने तो प्रतिमाह जेल में करीब 140 घरेलू सिलिंडर की आपूर्ति की जाती है। लेकिन इसमें भी खेल होता है। जितने सिलिंडर कागजों में दिखाई देते हैं उतने यहां मंगाए नहीं जाते हैं। यदि महीने में 140 सिलिंडर आते हैं तो सिर्फ 110 के आसपास ही लिए जाते हैं जबकि 30 से 40 सिलिंडर की सिर्फ पर्ची बनवा ली जाती है। इसमें एजेंसी संचालक व जेल अफसरों की मिलीभगत रहती है।
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वहीं जेल में डिप्टी जेलर की कमी के चलते लंबे समय से यह काम हेड जेल वार्डर प्रेमचंद्र मौर्या से कराया जा रहा है। आरोप है कि मुलाकात, मुलाहिजा आदि के नाम पर इनके द्वारा बंदियों का जमकर उत्पीड़न किया जाता है। वहीं जेल की कैंटीन को सिपाही भगतराम वर्मा, रवींद्र कुमार भारती व चंद्रलाल पाल द्वारा मनमाने तरीके से कराया जा रहा है। जबकि जेल वार्डर छोटेलाल लगातार दो साल से मुलाकात ड्यूटी करते हुए खूब मनमानी कर रहे हैं। यहां के कुछ जेल वार्डर करीब एक साल पहले तबादला किए जा चुके हैं लेकिन इसके बावजूद इनको रिलीव नहीं किया गया।
जेल में शासन की मंशा के अनुरूप नियमानुसार ही काम हो रहा है। गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करके ही बंदी/कैदियों का भोजन तैयार कराया जाता है। यदि कोई कर्मचारी मनमानी करता मिलेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-आलोक शुक्ला, जेलर/ प्रभारी जेल अधीक्षक