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Barabanki News: दहेज हत्या में पति को झटका, जेल में काटने होंगे 14 साल
Sat, 10 Jan 2026 09:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 10 Jan 2026 09:47 PM IST
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बाराबंकी। पुत्री के पैदा होने के कारण पत्नी को जलाकर मार देने के आरोपी को समय से पहले नहीं रहा किया जा सकता। इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। ऐसे जघन्य अपराधों में नरमी बरतना समाज और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए घातक होगा। यह करते हुए प्रदेश सरकार की विशेष कमेटी ने बाराबंकी जेल में बंद आरोपी विवेक कुमार शर्मा को समय से पहले रिहा करने से मना कर दिया। विवेक आठ साल से जेल में बंद है। जेल में अच्छे आचरण और पूर्व रिकॉर्ड ना होने के कारण समय से पहले रिहाई की अपील की थी।
मामला वर्ष 2016 का है। मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी विवेक कुमार शर्मा पर आरोप है कि उसने दहेज में कार की मांग को लेकर पत्नी को लगातार प्रताड़ित किया। पत्नी मायके चली गई थी, जहां ऑपरेशन के बाद उसने एक पुत्री को जन्म दिया। इसके बाद ससुराल लौटने पर 28 सितंबर 2016 को उसे जिंदा जला दिया गया। इस अपराध में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पांच नवंबर 2022 को दोषी मान 14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। बंदी अब तक आठ वर्ष से अधिक की सजा काट चुका है। इसी आधार पर समयपूर्व रिहाई का प्रस्ताव भेजा गया था।
हालांकि, जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट तीनों ने एकमत होकर रिहाई का विरोध किया। रिपोर्ट में कहा गया कि बंदी के दोबारा अपराध करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और उसके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी रिहाई के पक्ष में नहीं है। प्रोबेशन बोर्ड ने भी साफ राय दी कि दहेज हत्या जैसे अपराधों में दोषियों को समय से पहले छोड़ा जाना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इसी आधार पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए रिहाई से इन्कार कर दिया।
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मामला वर्ष 2016 का है। मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी विवेक कुमार शर्मा पर आरोप है कि उसने दहेज में कार की मांग को लेकर पत्नी को लगातार प्रताड़ित किया। पत्नी मायके चली गई थी, जहां ऑपरेशन के बाद उसने एक पुत्री को जन्म दिया। इसके बाद ससुराल लौटने पर 28 सितंबर 2016 को उसे जिंदा जला दिया गया। इस अपराध में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पांच नवंबर 2022 को दोषी मान 14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। बंदी अब तक आठ वर्ष से अधिक की सजा काट चुका है। इसी आधार पर समयपूर्व रिहाई का प्रस्ताव भेजा गया था।
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हालांकि, जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट तीनों ने एकमत होकर रिहाई का विरोध किया। रिपोर्ट में कहा गया कि बंदी के दोबारा अपराध करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और उसके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी रिहाई के पक्ष में नहीं है। प्रोबेशन बोर्ड ने भी साफ राय दी कि दहेज हत्या जैसे अपराधों में दोषियों को समय से पहले छोड़ा जाना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इसी आधार पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए रिहाई से इन्कार कर दिया।
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