{"_id":"5b3baf724f1c1b84468b4667","slug":"ghagra-on-rise","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा नदी का पानी बढ़ने से तराई में संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा नदी का पानी बढ़ने से तराई में संकट
Amarujala Bureau
Updated Tue, 03 Jul 2018 10:46 PM IST
विज्ञापन
लोगों को परेशानी
- फोटो : अमर उजाला
घाघरा में नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद इसका असर दिखाई देने लगा है। नदी का पानी धीरे-धीरे बढ़ने से तराई में संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वहीं बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव के बाढ़ पीड़ित इससे निपटने के लिए खुद को तैयार करने में लग गए हैं। क्योंकि नदी की बाढ़ जिले की तीन तहसीलों के सैकड़ों गांवों में जमकर तबाही मचाती है। उधर प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की सभी प्रकार की तैयारियां पूरी होने का दावा किया।
विज्ञापन
घाघरा नदी में एल्गिन ब्रिज पर बना खतरे का निशान 106.066 है जबकि पिछले चौबीस घंटे के अंदर नदी का पानी 104.466 तक पहुंच गया है। नदी का पानी धीरे-धीरे खतरे के निशान की ओर बढ़ता जा रहा है जिससे तराई में बाढ़ को लेकर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जिले की तीन तहसीलों रामसनेहीघाट के 28, रामनगर 32 और सिरौलीगौसपुर 34 गांव सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आते हैं। इसके अलावा नदी का पानी जैसे ही खतरे के निशान के पार पहुंचता है इन तहसीलों के सैकड़ों गांव नदी के पानी से घिर जाते हैं। सैकड़ों परिवारों और मवेशियों की जिंदगी महीनों तक बंधे पर गुजरती है। इनके सामने दो वक्त की रोटी तथा मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो जाता है। इससे निपटने के लिए बाढ़ प्रभावित गांव के लोग पूरी तैयारियों में जुट गए हैं।
विज्ञापन