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घाघरा में समाए दो मकान, बांध को बढ़ा खतरा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sun, 24 Jul 2016 11:18 PM IST
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बांध को बढ़ा खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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सूरतगंज क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित एक गांव के दो और घर नदी के पानी में समा गए हैं। इस तरह से अब तक इस क्षेत्र के 22 घर नदी के पानी में बह गए हैं। वहीं 24 घर अभी भी नदी के पानी के मुहाने पर हैं। नदी का पानी किसी भी समय इन घरों को अपने आगोश में ले सकता है। नदी का पानी बढ़ने से तीन दर्जन से अधिक गांवों पर फिर से खतरा मंडराने लगा है।
हीं एल्गिन-चरसड़ी बांध पर रविवार को उस समय खतरा बढ़ गया, जब मशीना उठने के बाद बांध को बचाने के लिए बनाये गए कटवन व स्पर नदी में समा गए। गनेशपुर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी का पानी शनिवार को खतरे के निशान से 34 सेमी ऊपर बह रहा था। लेकिन दोपहर के बाद नदी का पानी स्थिर हो गया था।
शनिवार की देर रात नदी का पानी फिर से बढ़ने लगा और रविवार को यह खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.476 पर पहुंच गया है। इस प्रकार नदी का पानी खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर पहुंच कर फिर स्थिर हो गया है।
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बेलहरा प्रतिनिधि के अनुसार नदी के पानी की चपेट में आकर बिझौली गांव के राजकुमार और रामजन्म के मकान नदी के पानी में समा गए हैं। इसके अलावा खुज्जी के कुंवर चंद, ज्ञान चंद, रामकुमार, मेडीलाल, दीनानाथ, रामअवध, रामधीरज, महराजदीन, दरबारी, मलखान सिंह, कृष्णपाल समेत करीब 24 लोगों के मकान किसी भी समय नदी के पानी में समा सकते हैं।
यहां के लोग नावों के माध्यम से परिवारीजनों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी का पानी घट गया था लेकिन रविवार से फिर बढ़ने लगा है जिससे क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांव नदी के पानी की चपेट में आ सकते हैं।
सरकारी अमले में मचा हड़कंप
टिकैतनगर। शनिवार की रात्रि करीब एक बजे नदी में एकाएक मशीना उठने के बाद बांध पर मौजूद लोगों एवं अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। आननफानन में स्परों को बचाने का कार्य तो शुरू किया गया, मगर मजदूर बालू भरी बोरियंा नदी में डालते गए और मशीना उन बोरियाें को नदी में फेंकता रहा।
यह सिलसिला सुबह करीब दस बजे तक चलता रहा। मशीने पर काबू न देख सभी ने हाथ खड़े कर दिए। कुछ देर बाद मशीना शांत हुआ तो नदी ने कटवन एंव स्परों में तेजी से कटान शुुरू कर दिया। देखते ही देखते कटवन एंव स्पर वन की मिट्टी काटकर नदी में समाती रही।
तथा अब नदी स्परों के नोज को काटने के बजाय उसके पीछे से बांध में कटान शुरू कर दिया है। बाढ़ की शुरुआत के समय बांध से नदी करीब 600 मीटर दूर थी जो कटान करते हुए अब बांध को काटने लगी है।
कटवन करीब सौ मीटर नदी के भीतर पहुंच गया है उसके बाद 20 मीटर की कटान हुुई। बांध बचाव का कार्य देख रहे एई अशोक कुमार ने बताया कि मशीना उठने से कटवन करीब 20 मीटर कट गया है तथा नदी के नीचे से कटान करने से सौ मीटर कटवन नदी में बैठ रहा है। इसके अलावा नदी अब पीछे से कटान कर रही है जिसे रोकने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं।
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हीं एल्गिन-चरसड़ी बांध पर रविवार को उस समय खतरा बढ़ गया, जब मशीना उठने के बाद बांध को बचाने के लिए बनाये गए कटवन व स्पर नदी में समा गए। गनेशपुर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी का पानी शनिवार को खतरे के निशान से 34 सेमी ऊपर बह रहा था। लेकिन दोपहर के बाद नदी का पानी स्थिर हो गया था।
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शनिवार की देर रात नदी का पानी फिर से बढ़ने लगा और रविवार को यह खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.476 पर पहुंच गया है। इस प्रकार नदी का पानी खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर पहुंच कर फिर स्थिर हो गया है।
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बेलहरा प्रतिनिधि के अनुसार नदी के पानी की चपेट में आकर बिझौली गांव के राजकुमार और रामजन्म के मकान नदी के पानी में समा गए हैं। इसके अलावा खुज्जी के कुंवर चंद, ज्ञान चंद, रामकुमार, मेडीलाल, दीनानाथ, रामअवध, रामधीरज, महराजदीन, दरबारी, मलखान सिंह, कृष्णपाल समेत करीब 24 लोगों के मकान किसी भी समय नदी के पानी में समा सकते हैं।
यहां के लोग नावों के माध्यम से परिवारीजनों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी का पानी घट गया था लेकिन रविवार से फिर बढ़ने लगा है जिससे क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांव नदी के पानी की चपेट में आ सकते हैं।
सरकारी अमले में मचा हड़कंप
टिकैतनगर। शनिवार की रात्रि करीब एक बजे नदी में एकाएक मशीना उठने के बाद बांध पर मौजूद लोगों एवं अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। आननफानन में स्परों को बचाने का कार्य तो शुरू किया गया, मगर मजदूर बालू भरी बोरियंा नदी में डालते गए और मशीना उन बोरियाें को नदी में फेंकता रहा।
यह सिलसिला सुबह करीब दस बजे तक चलता रहा। मशीने पर काबू न देख सभी ने हाथ खड़े कर दिए। कुछ देर बाद मशीना शांत हुआ तो नदी ने कटवन एंव स्परों में तेजी से कटान शुुरू कर दिया। देखते ही देखते कटवन एंव स्पर वन की मिट्टी काटकर नदी में समाती रही।
तथा अब नदी स्परों के नोज को काटने के बजाय उसके पीछे से बांध में कटान शुरू कर दिया है। बाढ़ की शुरुआत के समय बांध से नदी करीब 600 मीटर दूर थी जो कटान करते हुए अब बांध को काटने लगी है।
कटवन करीब सौ मीटर नदी के भीतर पहुंच गया है उसके बाद 20 मीटर की कटान हुुई। बांध बचाव का कार्य देख रहे एई अशोक कुमार ने बताया कि मशीना उठने से कटवन करीब 20 मीटर कट गया है तथा नदी के नीचे से कटान करने से सौ मीटर कटवन नदी में बैठ रहा है। इसके अलावा नदी अब पीछे से कटान कर रही है जिसे रोकने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं।