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बदहाल सिंचाई व्यवस्था से खेती हो रही चौपट

Sat, 03 Sep 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sat, 03 Sep 2016 11:37 PM IST
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Getting desecrated destroyed irrigation farming
तय रोटेशन पर भी किसानों को नहीं मिल पाता पानी - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई विभाग की भ्रष्ट कार्यप्रणाली से क्षेत्र से खेती किसानी चौपट है। पानी भेजने के तय रोटेशन में नहरों से सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। नहर चलाए जाने पर भी ब्रांच नहर से पोषित कुलाबे व अल्पिकाएं वर्षों से सूखी पड़ी हैं। नहरों के पक्कीकरण में धांधली के कारण आगे भी कोई सुधार होने को लेकर किसान आशंकित हैं। 
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क्षेत्र में सिंचाई के लिए शारदा सहायक परियोजना से तेइस डाउन सिस्टम की 687 किमी लंबा नहरों को जाल फैला है। चार से पांच दशक पुरानी नहरों के जर्जर होने से पोषक नहर से पानी छोड़े जाने के बाद नहर में खांदी, सीपेज के कारण पानी बर्बाद हो रहा था। इसे रोकने व सदुपयोग के लिए वाटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के तहत विश्व बैंक के पैसे से नहरों के पुनरोद्धार का कार्य हो रहा है।
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सिंचाई निर्माण खंड प्रथम लखनऊ को बीएनआर कंस्ट्रशन कंपनी से नहरों में कार्य कराया जा रहा है। ब्रांच नहरों में हेड से आठ किलोमीटर तथा इस नहर से निकले सभी कुलाबों को आरसीसी से पक्का बनाया जाएगा। नहर के ऊपर डिवाइडर व पटरी पर डामरीकृत सड़क का निर्माण कराया जा रहा है।
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प्र्रणाली की 19 रजबहा नहरों को हेड से सौ मीटर तक तथा 107 अल्पिका नहर में सभी पर हेड से पचास मीटर तक आरसीसी से पक्का किया जा रहा है। एक सौ चौबीस करोड़ रुपए खर्च कर पूरे किए जाने इन कार्यों में जमकर धांधली की जा रही हैं। 
 
घटिया निर्माण में नहीं हो रहा सुधार
निर्माण के दौरान ही ब्रांच नहर की आरसीसी में उभरी दरारों को भर कर धांधली को छिपाने के लिए कई बार नहर को बंद करना पड़ता है। ब्रांच नहर के हेड से अंसारी गांव के पास त्रिपुला तक, सुबेहा, खानपुर रजबहा नहर में कई जगह आरसीसी उखड़ गई थी जिसे दुबारा लेपन कर दरारों को ढका गया है।

आरसीसी की मोटाई मानक से काफी कम होने तथा घटिया मौरंग व कम सीमेंट मिलाने से नव निर्मित माइनर नहरे धंस रही है। ब्रांच नहर में डिवाइडर की पीली ईंटों व घटिया मौरंग का प्रयोग किया गया है। नहर पटरी पर डौला बनाए जाने के लिए कैरेज की पीली मिट्टी जगह नहर की बलुई मिट्टी का प्रयोग कर धांधली की जा रही है। 
बाक्स 
निर्माण शुरू होने के साथ ही बीते तीन वर्ष से ठप है सिंचाई
सुबेहा रजबाह में ही दस किमी के आगे बीते तीन वर्ष से पानी नहीं पहुंचा सका है। इक्कीस किमी लंबी नहर से पोषित बाइस अन्य अल्पिका नहरों में पेचरुआ, बरांवा, खानपुर, किर्षिया, वलीपुर, कमेला, राजापुर आदि में वर्षों से पानी नही पहुंच सका है।

रेहुरा, मुस्तफाबाद, जमीनहुसेनाबाद, गुलामाबाद, अल्पीपुरवा, बिगनिहा, मिश्रनपुरवा, खटिकनपुरवा, बादलपुरवा आदि गांवों में खेती किसानी चौपट है। बारा रजबहा में बारा गांव के आगे नहर में बीते पंद्रह वर्ष से पानी नहीं पहुंचा है जिससे नैपुरा समेत आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के खेत बर्बाद हो रहे हैं। कस्बे से होकर निकली लिल्हौरा माइनर से टेल के गांवों में सिंचाई नहीं होने से किसान परेशान हैं। 

 
परियोजना पूरी होने पर नहर के टेल तक गांवो में बसे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। उन्हाेंने कहा निर्माण के चलते कई बार नहर का पानी रोक कर कार्य कराना पड़ता है। केपी गुप्ता- सहायक अभियंता सिंचाई निर्माण खंड प्रथम लखनऊ।
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