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पौने पांच करोड के एमडीएम घोटाले के सात आरोपियों पर लगा गैंगेस्टर
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बाराबंकी। परिषदीय विद्यालयों के नौनिहालों के निवाले के लिए शासन से मिली मध्याह्न भोजन के करीब पौने पांच करोड़ रुपये डकारने वाले सात घोटालेबाजों पर गैंगस्टर की कार्रवाई मंगलवार की देर रात की गई। नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किए गए सातों आरोपी अभी जिला कारगार में निरूद्व है। पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बताया कि राजकीय धन की हेराफेरी करने वाले सभी सात आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूल के बच्चों के निवाले के लिए शासन से कोषागार भेजी जाने वाली पौने पांच करोड की धनराशि निजी खातों में भेजकर जिम्मेदारों ने घोटाला किया। दिसंबर माह में इस घोटाले को बीएसए वीपी सिंह ने पकड़ा।
इसके बाद नगर कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद पुलिस ने एमडीएम के जिला समंवयक राजीव शर्मा गैंग लीडर, निजी ऑपरेटर रहीमुद्दीन, रघुराज सिहं उर्फ किशन, रोज सिद्दीकी, साधना, बीएसए कार्यालय के प्रधान लिपिक अखिलेश कुमार शुक्ला व वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लेखाकार असगर मेंहदी को गिरफ्तार कर उनके पास से घोटाले की कुछ रकम भी बरामद की थी।
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इस मामले में नगर कोतवाली में धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी धन के गबन आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बताया कि पुलिस जांच में पाया गया कि यह एक संगठित गिरोह है जो आर्थिक एवं भौतिक अपराधकारित करने के आदी हैं। गिरोह का सामान्य जनमानस में भय था।
गिरोह के द्वारा कोषागार बाराबंकी से मिड-डे मील योजना के तहत राजकीय धन की हेराफेरी की गई थी। इन सात आरोपियों के विरूद्व उतर प्रदेश गिरोहबन्द समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (गैंगेस्टर) दर्ज कराया गया।
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बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूल के बच्चों के निवाले के लिए शासन से कोषागार भेजी जाने वाली पौने पांच करोड की धनराशि निजी खातों में भेजकर जिम्मेदारों ने घोटाला किया। दिसंबर माह में इस घोटाले को बीएसए वीपी सिंह ने पकड़ा।
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इसके बाद नगर कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद पुलिस ने एमडीएम के जिला समंवयक राजीव शर्मा गैंग लीडर, निजी ऑपरेटर रहीमुद्दीन, रघुराज सिहं उर्फ किशन, रोज सिद्दीकी, साधना, बीएसए कार्यालय के प्रधान लिपिक अखिलेश कुमार शुक्ला व वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लेखाकार असगर मेंहदी को गिरफ्तार कर उनके पास से घोटाले की कुछ रकम भी बरामद की थी।
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इस मामले में नगर कोतवाली में धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी धन के गबन आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बताया कि पुलिस जांच में पाया गया कि यह एक संगठित गिरोह है जो आर्थिक एवं भौतिक अपराधकारित करने के आदी हैं। गिरोह का सामान्य जनमानस में भय था।
गिरोह के द्वारा कोषागार बाराबंकी से मिड-डे मील योजना के तहत राजकीय धन की हेराफेरी की गई थी। इन सात आरोपियों के विरूद्व उतर प्रदेश गिरोहबन्द समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (गैंगेस्टर) दर्ज कराया गया।