{"_id":"67a3aa9c9b2c874b9e0f5afa","slug":"forensic-report-of-whatsapp-chat-becomes-the-basis-for-divorce-barabanki-news-c-315-1-brp1006-132739-2025-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: वाट्सएप चैट की फॉरेंसिक रिपोर्ट बनी तलाक का आधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: वाट्सएप चैट की फॉरेंसिक रिपोर्ट बनी तलाक का आधार
Wed, 05 Feb 2025 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 05 Feb 2025 11:44 PM IST
विज्ञापन
बाराबंकी । वाट्सएप पर पराए मर्द के साथ चैटिंग (बातचीत) भी तलाक का आधार हो बन जाती है। पारिवारिक न्यायालय के प्रधान अपर न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने बीते दिनों एक अहम फैसले में चैटिंग की फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर तलाक को मंजूरी दे दी। इस मामले में निकाह के बाद बाद मात्र एक माह साथ रहने वाली पत्नी की पराए मर्द से होने वाली चैटिंग को पति ने अदालत में पुख्ता प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।
जिले के आवास विकास कालोनी निवासी पति मो. शाह नवाज का निकाह 12 मार्च 2020 को कानपुर निवासी एक युवती के साथ हुआ था। निकाह के चार माह बाद ही पति ने जुलाई 2020 में पत्नी से तलाक लेने की अर्जी कोर्ट में दाखिल कर दी। करीब पांच वर्ष चले मुकदमे में कई तरह के तकनीकी साक्ष्य पति ने पत्नी पर लगाने के साथ इन्हें प्रमाणित करने के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। इससे पत्नी द्वारा लगाया गया दहेज उत्पीड़न का आरोप साबित नहीं हो सका। इस दौरान पति ने दूसरे युवक से चैटिंग व फोटो के साक्ष्य फोरेंसिंक रिपोर्ट के साथ कोर्ट में प्रस्तुत किए। इसके आधार पर ही फैमिली कोर्ट के प्रधान अपर न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक को मंजूरी दे दी।
पीड़ित पति ने कोर्ट में बताया कि निकाह के बाद भी पत्नी दूसरे युवक के साथ वाट्सएप पर चैट करने के साथ फोन पर बातचीत करती थी। यह बात पत्नी के घरवालों को बताई तो वह 17 मई 2020 को पत्नी को अपने साथ ले गए। इसके बाद उसने शरीयत के मुताबिक तीन बार पंजीकृत डाक से पत्नी को तलाक की नोटिस भेज दी। पति ने कोर्ट में बताया कि शरीयत के मुताबिक तलाक देने के बावजूद उसने कानूनी तौर पर तलाक पाने के लिए पारिवारिक न्यायालय में अर्जी दाखिल की।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के आवास विकास कालोनी निवासी पति मो. शाह नवाज का निकाह 12 मार्च 2020 को कानपुर निवासी एक युवती के साथ हुआ था। निकाह के चार माह बाद ही पति ने जुलाई 2020 में पत्नी से तलाक लेने की अर्जी कोर्ट में दाखिल कर दी। करीब पांच वर्ष चले मुकदमे में कई तरह के तकनीकी साक्ष्य पति ने पत्नी पर लगाने के साथ इन्हें प्रमाणित करने के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। इससे पत्नी द्वारा लगाया गया दहेज उत्पीड़न का आरोप साबित नहीं हो सका। इस दौरान पति ने दूसरे युवक से चैटिंग व फोटो के साक्ष्य फोरेंसिंक रिपोर्ट के साथ कोर्ट में प्रस्तुत किए। इसके आधार पर ही फैमिली कोर्ट के प्रधान अपर न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक को मंजूरी दे दी।
विज्ञापन
पीड़ित पति ने कोर्ट में बताया कि निकाह के बाद भी पत्नी दूसरे युवक के साथ वाट्सएप पर चैट करने के साथ फोन पर बातचीत करती थी। यह बात पत्नी के घरवालों को बताई तो वह 17 मई 2020 को पत्नी को अपने साथ ले गए। इसके बाद उसने शरीयत के मुताबिक तीन बार पंजीकृत डाक से पत्नी को तलाक की नोटिस भेज दी। पति ने कोर्ट में बताया कि शरीयत के मुताबिक तलाक देने के बावजूद उसने कानूनी तौर पर तलाक पाने के लिए पारिवारिक न्यायालय में अर्जी दाखिल की।
विज्ञापन