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तैयारियां ध्वस्त, तराई के लोग पस्त, चारों तरफ पानी ही पानी
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बाराबंकी। सरयू ने तराई में तबाही मचाना शुरू कर दिया है। बाढ़ से निपटने को लेकर रामनगर और सिरौलीगौसपुर तहसीलों द्वारा किए गए दावों की पोल खुल गई है। पीड़ित गांवों में फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावें तक नहीं हैं। लोग भूखे प्यासे गांवों में फंसे हुए हैं और इनकी मदद करने वाला कोई नहीं है। बाढ़ में फंसे लोग जैसे-तैसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। बारिश ने तटबंध पर रह रहे लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार, सोमवार को नेपाल के तीनों बैरोजों से करीब साढ़े सात लाख क्यूसेक पानी सरयू में और छोड़ा गया है। नदी का पानी इस साल का रिकार्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान से 85 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। इससे बाढ़ की चपेट में तराई के करीब 135 गांव आ गए हैं। इन गांवों की पौने दो लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है और करीब 80 हजार लोग घर से बेघर हो गए हैं जबकि 25 हजार लोग अभी भी गांवों में फंसे हुए हैं।
आरोप है कि मदद तो दूर की बात पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावें तक तहसील प्रशासन की ओर से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इससे जो लोग गांवों में फंसे हुए हैं वह घरों की छतों पर डेरा डाले हुए हैं। लोग किसी तरह से निजी नावों की व्यवस्था कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। कई परिवार अलीनगर-रानीमऊ और हेतमापुर तटबंध के अलावा रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
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एडीएम राकेश कुमार सिंह का कहना है कि सरयू का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच जाने से तराई के हालात काफी बिगड़ गए हैं। तीनों तहसीलों के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया गया है। बाढ़ पीड़ितों की यथासंभव मदद और गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी, डेढ़ सेक्शन पीएसी व कई थानों की पुलिस को लगाया गया है।
बिजली गिरने से चार घंटे ठप रहा टोल सिस्टम
सफ़दरगंज/त्रिवेदीगंज। बरसात के दौरान रविवार रात करीब एक बजे अयोध्या-लखनऊ हाईवे पर स्थित अहमदपुर टोल प्लाजा के पास बिजली गिरी। इससे टोल प्लाजा पर लगे सारे कंप्यूटर सिस्टम ठप हो गए। वाहनों से टैक्स वसूली की प्रक्रिया भी बंद हो गयी। इस कारण करीब चार घंटे तक गाड़ियां बिना टोल दिए ही गुजरी।
टोल मैनेजर अमरजीत चौहान ने बताया कि चार घंटे बाद तकनीकी खराबी दूर हुई तो टोल वसूला जाने लगा। इसी तरह त्रिवेदीगंज क्षेत्र के देवीपुर गांव में स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर के ऊपर भी रविवार रात बिजली गिरी। इससे जहां मंदिर क्षतिग्रस्त होने से अंदर टंगा घंटा नीचे गिर गया। वहीं दीवार में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति भी खंडित हो गई। यहीं नहीं दीवार का प्लास्टर कई जगह टूटा तो मंदिर में दरारें भी आई हैं। संवाद
पीड़ितों को रैन बसेरे में ले जाने की तैयारी
कोटवाधाम। बाढ़ प्रभावित तहसील क्षेत्र के गांव के लोगों को लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए तटबंध से अब उन्हें कोटवाधाम स्थित मिनी सचिवालय व रैन बसेरा में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। पीड़ित परिवारों को ट्रैक्टर ट्रॉली द्वारा कोटवाधाम सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
बारिश और बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए तटबंध पर पीड़ितों का रुकना ठीक नहीं है। इन लोगों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थान पर होना बहुत जरूरी है। एसडीएम प्रिया सिंह ने राजस्व कर्मचारियों को फोन पर पीड़ितों की मदद के निर्देश दिए हैं। लापरवाही पर बीडीओ को फटकार भी लगाई।
प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के निर्देश
सूरतगंज। बारिश के चलते बाढ़ प्रभावित हेतमापुर तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सोमवार को एडीएम राकेश सिंह, एसडीएम तान्या सिंह भी तटबंध पर पहुंचे। पानी की स्थिति को देखते एडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए एसडीएम को निर्देशित किया।
इसी के साथ तटबंध पर बिजली के लिए एक्सईएन, एसीडीओ को चौबीस घंटे लाइट चालू रखने के साथ तटबंध पर रहने के निर्देश दिए। बीडीओ बीके मोहन ने भी पंचायत के सचिवों को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए लगाया है।
बाढ़ पीड़ितों को मदद की दरकार
अलीनगर-रानीमऊ और हेतमापुर तटबंधों पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों को बारिश में सिर्फ और सिर्फ मदद की दरकार है। लगातार हो रही बारिश के चलते इनके सामने दो वक्त की रोटी और मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि एडीएम ने राहत सामग्री के साथ ही लंच पैकेट और मवेशियों के लिए चारा पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन आरोप है कि शाम तक बाढ़ पीड़ितों को मदद के नाम पर कुछ भी नहीं मिल सका।
उपचार कर बचाई जान
कोडरी निवासी दुखीराम नाव से तटबंध पर आ रहा था कि अचानक उसकी नाव गहरे पानी में पलट गई। तटबंध पर उपस्थित सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजर्षि त्रिपाठी ने उपचार कर उसकी जान बचाई। वहीं बाढ़ के पानी से मनोज मिश्रा का मकान भरभराकर गिर गया। मलबे की चपेट पत्नी साधना मिश्रा, बेटी हर्षिता, सोनी, दिव्यांशी आंशिक रूप से घायल हो गए। इसी के साथ हेतमापुर निवासी मुस्तफा का छप्परनुमा घर भी पानी में बह गया।
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एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार, सोमवार को नेपाल के तीनों बैरोजों से करीब साढ़े सात लाख क्यूसेक पानी सरयू में और छोड़ा गया है। नदी का पानी इस साल का रिकार्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान से 85 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। इससे बाढ़ की चपेट में तराई के करीब 135 गांव आ गए हैं। इन गांवों की पौने दो लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है और करीब 80 हजार लोग घर से बेघर हो गए हैं जबकि 25 हजार लोग अभी भी गांवों में फंसे हुए हैं।
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आरोप है कि मदद तो दूर की बात पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावें तक तहसील प्रशासन की ओर से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इससे जो लोग गांवों में फंसे हुए हैं वह घरों की छतों पर डेरा डाले हुए हैं। लोग किसी तरह से निजी नावों की व्यवस्था कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। कई परिवार अलीनगर-रानीमऊ और हेतमापुर तटबंध के अलावा रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
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एडीएम राकेश कुमार सिंह का कहना है कि सरयू का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच जाने से तराई के हालात काफी बिगड़ गए हैं। तीनों तहसीलों के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया गया है। बाढ़ पीड़ितों की यथासंभव मदद और गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी, डेढ़ सेक्शन पीएसी व कई थानों की पुलिस को लगाया गया है।
बिजली गिरने से चार घंटे ठप रहा टोल सिस्टम
सफ़दरगंज/त्रिवेदीगंज। बरसात के दौरान रविवार रात करीब एक बजे अयोध्या-लखनऊ हाईवे पर स्थित अहमदपुर टोल प्लाजा के पास बिजली गिरी। इससे टोल प्लाजा पर लगे सारे कंप्यूटर सिस्टम ठप हो गए। वाहनों से टैक्स वसूली की प्रक्रिया भी बंद हो गयी। इस कारण करीब चार घंटे तक गाड़ियां बिना टोल दिए ही गुजरी।
टोल मैनेजर अमरजीत चौहान ने बताया कि चार घंटे बाद तकनीकी खराबी दूर हुई तो टोल वसूला जाने लगा। इसी तरह त्रिवेदीगंज क्षेत्र के देवीपुर गांव में स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर के ऊपर भी रविवार रात बिजली गिरी। इससे जहां मंदिर क्षतिग्रस्त होने से अंदर टंगा घंटा नीचे गिर गया। वहीं दीवार में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति भी खंडित हो गई। यहीं नहीं दीवार का प्लास्टर कई जगह टूटा तो मंदिर में दरारें भी आई हैं। संवाद
पीड़ितों को रैन बसेरे में ले जाने की तैयारी
कोटवाधाम। बाढ़ प्रभावित तहसील क्षेत्र के गांव के लोगों को लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए तटबंध से अब उन्हें कोटवाधाम स्थित मिनी सचिवालय व रैन बसेरा में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। पीड़ित परिवारों को ट्रैक्टर ट्रॉली द्वारा कोटवाधाम सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
बारिश और बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए तटबंध पर पीड़ितों का रुकना ठीक नहीं है। इन लोगों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थान पर होना बहुत जरूरी है। एसडीएम प्रिया सिंह ने राजस्व कर्मचारियों को फोन पर पीड़ितों की मदद के निर्देश दिए हैं। लापरवाही पर बीडीओ को फटकार भी लगाई।
प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के निर्देश
सूरतगंज। बारिश के चलते बाढ़ प्रभावित हेतमापुर तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सोमवार को एडीएम राकेश सिंह, एसडीएम तान्या सिंह भी तटबंध पर पहुंचे। पानी की स्थिति को देखते एडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए एसडीएम को निर्देशित किया।
इसी के साथ तटबंध पर बिजली के लिए एक्सईएन, एसीडीओ को चौबीस घंटे लाइट चालू रखने के साथ तटबंध पर रहने के निर्देश दिए। बीडीओ बीके मोहन ने भी पंचायत के सचिवों को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए लगाया है।
बाढ़ पीड़ितों को मदद की दरकार
अलीनगर-रानीमऊ और हेतमापुर तटबंधों पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों को बारिश में सिर्फ और सिर्फ मदद की दरकार है। लगातार हो रही बारिश के चलते इनके सामने दो वक्त की रोटी और मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि एडीएम ने राहत सामग्री के साथ ही लंच पैकेट और मवेशियों के लिए चारा पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन आरोप है कि शाम तक बाढ़ पीड़ितों को मदद के नाम पर कुछ भी नहीं मिल सका।
उपचार कर बचाई जान
कोडरी निवासी दुखीराम नाव से तटबंध पर आ रहा था कि अचानक उसकी नाव गहरे पानी में पलट गई। तटबंध पर उपस्थित सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजर्षि त्रिपाठी ने उपचार कर उसकी जान बचाई। वहीं बाढ़ के पानी से मनोज मिश्रा का मकान भरभराकर गिर गया। मलबे की चपेट पत्नी साधना मिश्रा, बेटी हर्षिता, सोनी, दिव्यांशी आंशिक रूप से घायल हो गए। इसी के साथ हेतमापुर निवासी मुस्तफा का छप्परनुमा घर भी पानी में बह गया।