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तराई में बढ़ी मुश्किलें, प्रशासन के पास नहीं है इंतजाम
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बाराबंकी। सरयू नदी का पानी तराई में तबाही मचाने को बेताब है। एक दर्जन से अधिक गांवों के पानी से घिर जाने की वजह से यहां के लोगों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। लोग किसी तरह से नावों के सहारे परिवारीजनों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुक्रवार को पूरे दिन करते रहे। लेकिन प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने को लेकर की गई तैयारियां अभी सिर्फ कागजों पर चल रही हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि राहत सामग्री तो दूर की बात है हम लोगों को एक अदद नाव तक नहीं मिल रही है जबकि राहत सामग्री की आपूर्ति का टेंडर हो चुका है लेकिन इसका वितरण कब होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसके चलते गांवों में फंसे और तटबंध पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों का दर्द बढ़ता ही जा रहा है।
कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार, सिरौलीगौसपुर तहसील के तेलवारी, टेपरा, नव्वनपुरवा, परसवाल, भैरवकोल, गोबरहा, माझा रायपुर, इटहुआ समेत एक दर्जन से ज्यदा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा जिससे यहां के लोगों का संकट कम नही हो रहा है। ज्यादातर गांव नदी के पानी से घिर गए हैं।
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ज्यादातर गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी आ जाने से लोगों को बांध से गांव जाने में दिक्कत हो रही है। लेकिन इन लोगों को पर्याप्त मात्रा में नावें नहीं मिल पा रही हैं। जिससे गांव में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में काफी दिक्कतें हो रही हैं।
लोग का आरोप है कि वह परिवारीजनों के साथ तटबंध पर डेरा डाले हुए हैं लेकिन इन्हें राहत के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं मिला है। जबकि प्रशासन का दावा है कि बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। राहत शिविरों को संचालित करने तथा राहत सामग्री का वितरण कराने की तैयारी चल रही हैं।
2426 रुपये का होगा राहत सामग्री का पैकेट
बाढ़ पीड़ितों में वितरित होने वाली राहत सामग्री में दस किलो आटा, दस किलो चावल, दो किलो भुना चना, दो किलो अरहर दाल, आधा किलो नमक पैकेट, हल्दी, मिर्चा, धनिया, मोमबत्ती, माचिस, बिस्कुट, रिफाइंड, नहाने का साबुन, लाई, गुड़ आलू, प्लास्टिक तिरपाल, साधारण पालीथिन, जरीकेन, मच्छरदानी समेत 23 प्रकार की सामग्री का राहत पैकेट तैयार किया जा रहा है जिसकी कीमत 2426 रुपये प्रति पैकेट निर्धारित की गई है। प्रशासन का दावा है कि बहुत जल्द बाढ़ पीड़ितों में इसका वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
नदी का पानी कम हुआ है लेकिन जो गांव पानी के घिरे हुए हैं वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य राजस्व और लेखपालों की टीमों द्वारा किया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है जलस्तर पर टीमें पूरी नजर रखे हुए हैं।
-सुरेन्द्र पाल विश्वकर्मा, एसडीएम सिरौलीगौसपुर
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पीड़ितों का आरोप है कि राहत सामग्री तो दूर की बात है हम लोगों को एक अदद नाव तक नहीं मिल रही है जबकि राहत सामग्री की आपूर्ति का टेंडर हो चुका है लेकिन इसका वितरण कब होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसके चलते गांवों में फंसे और तटबंध पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों का दर्द बढ़ता ही जा रहा है।
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कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार, सिरौलीगौसपुर तहसील के तेलवारी, टेपरा, नव्वनपुरवा, परसवाल, भैरवकोल, गोबरहा, माझा रायपुर, इटहुआ समेत एक दर्जन से ज्यदा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा जिससे यहां के लोगों का संकट कम नही हो रहा है। ज्यादातर गांव नदी के पानी से घिर गए हैं।
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ज्यादातर गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी आ जाने से लोगों को बांध से गांव जाने में दिक्कत हो रही है। लेकिन इन लोगों को पर्याप्त मात्रा में नावें नहीं मिल पा रही हैं। जिससे गांव में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में काफी दिक्कतें हो रही हैं।
लोग का आरोप है कि वह परिवारीजनों के साथ तटबंध पर डेरा डाले हुए हैं लेकिन इन्हें राहत के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं मिला है। जबकि प्रशासन का दावा है कि बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। राहत शिविरों को संचालित करने तथा राहत सामग्री का वितरण कराने की तैयारी चल रही हैं।
2426 रुपये का होगा राहत सामग्री का पैकेट
बाढ़ पीड़ितों में वितरित होने वाली राहत सामग्री में दस किलो आटा, दस किलो चावल, दो किलो भुना चना, दो किलो अरहर दाल, आधा किलो नमक पैकेट, हल्दी, मिर्चा, धनिया, मोमबत्ती, माचिस, बिस्कुट, रिफाइंड, नहाने का साबुन, लाई, गुड़ आलू, प्लास्टिक तिरपाल, साधारण पालीथिन, जरीकेन, मच्छरदानी समेत 23 प्रकार की सामग्री का राहत पैकेट तैयार किया जा रहा है जिसकी कीमत 2426 रुपये प्रति पैकेट निर्धारित की गई है। प्रशासन का दावा है कि बहुत जल्द बाढ़ पीड़ितों में इसका वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
नदी का पानी कम हुआ है लेकिन जो गांव पानी के घिरे हुए हैं वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य राजस्व और लेखपालों की टीमों द्वारा किया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है जलस्तर पर टीमें पूरी नजर रखे हुए हैं।
-सुरेन्द्र पाल विश्वकर्मा, एसडीएम सिरौलीगौसपुर