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लापरवाही की भेंट चढ़ रही बाढ़ से बचाव की परियोजनाएं
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कोटवाधाम (बाराबंकी)। बाढ़ से निपटने को लेकर चल रही परियोजनाओं के कार्यों में विभागीय मंत्री की चेतावनी के बावजूद तेजी नहीं आ सकी है। योजना से जुड़े अधिकारी पूरी तरह से मनमानी पर उतारू हैं। इससे साफ है कि मंत्री की सख्ती और कार्रवाई का खौफ भी इन अधिकारियों में नहीं सता रहा। ऐसी स्थिति में निर्धारित कार्यों के तय अवधि में पूरा हो पाने पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
सरयू में आने वाली बाढ़ से तराई के लोगों को बचाने के लिए इस बार करीब 53 करोड़ रुपये से गोबरहा, तेलवारी, सनावा आदि स्थानों पर कार्य चल रहा है। 18 मई को जलशक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह ने स्थलीय निरीक्षण कर कार्य को 30 मई से पहले करने का सख्त निर्देश दिया था।
काम में लगे ठेकेदार व सहायक अभियंताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए ब्लैक लिस्ट करने व अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद भी काम में लगे अधिकारी नहीं जागे और अपने हिसाब से परियोजना का काम करा रहे हैं। क्षेत्रीय निवासी रघुनंदन द्विवेदी, दुर्गेश सिंह, राजन सिंह, हुकुम, राजिंदर आदि का कहना है कि बाढ़ खंड के अधिकारी मंत्री के दौरे के पहले काम में तेजी दिखी थी लेकिन उसके बाद फिर काम धीमी गति से किया जाने लगा। इसके चलते ही 30 मई से पहले कटान व बाढ़ रोकने का काम पूरा हो पाएगा इस पर संशय बना हुआ है।
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तराई में तबाही मचाता है नेपाली पानी
नेपाल से सरयू नदी में छोड़ा जाने वाले पानी तराई में जमकर तबाही मचाता है। पिछले वर्ष बाढ़ खंड की लापरवाही के चलते लाखों की लागत से बनाए गए स्पर निर्माण भी अधूरा रह गया था। जिसका खामियाजा यहां के लोगों ने भुगतना पड़ा। इस बार भी स्पर का काम किया जा रहा है लेकिन दो साल बाद भी इन स्परों का काम पूरा नहीं किया जा सका है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ नदी में बाढ़ आने का इंतजार करते हैं यही कारण है कि कभी काम समय से पूरा नहीं होता और सरकार द्वारा दिया जाने वाला धन बाढ़ में बहा दिया जाता है।
सरयू की बाढ़ से कहरानपुरवा, गोबरहा, तेलवारी, अहिरन टेपरा, सरायसुर्जन आदि गांवों को बचाने के लिए कार्य चल रहा है। संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को सभी निर्धारित कार्य तय अवधि में पूर्ण न करने पर कड़ी कार्रवाई को भी चेताया गया है।
शशिकांत सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़
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सरयू में आने वाली बाढ़ से तराई के लोगों को बचाने के लिए इस बार करीब 53 करोड़ रुपये से गोबरहा, तेलवारी, सनावा आदि स्थानों पर कार्य चल रहा है। 18 मई को जलशक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह ने स्थलीय निरीक्षण कर कार्य को 30 मई से पहले करने का सख्त निर्देश दिया था।
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काम में लगे ठेकेदार व सहायक अभियंताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए ब्लैक लिस्ट करने व अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद भी काम में लगे अधिकारी नहीं जागे और अपने हिसाब से परियोजना का काम करा रहे हैं। क्षेत्रीय निवासी रघुनंदन द्विवेदी, दुर्गेश सिंह, राजन सिंह, हुकुम, राजिंदर आदि का कहना है कि बाढ़ खंड के अधिकारी मंत्री के दौरे के पहले काम में तेजी दिखी थी लेकिन उसके बाद फिर काम धीमी गति से किया जाने लगा। इसके चलते ही 30 मई से पहले कटान व बाढ़ रोकने का काम पूरा हो पाएगा इस पर संशय बना हुआ है।
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तराई में तबाही मचाता है नेपाली पानी
नेपाल से सरयू नदी में छोड़ा जाने वाले पानी तराई में जमकर तबाही मचाता है। पिछले वर्ष बाढ़ खंड की लापरवाही के चलते लाखों की लागत से बनाए गए स्पर निर्माण भी अधूरा रह गया था। जिसका खामियाजा यहां के लोगों ने भुगतना पड़ा। इस बार भी स्पर का काम किया जा रहा है लेकिन दो साल बाद भी इन स्परों का काम पूरा नहीं किया जा सका है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ नदी में बाढ़ आने का इंतजार करते हैं यही कारण है कि कभी काम समय से पूरा नहीं होता और सरकार द्वारा दिया जाने वाला धन बाढ़ में बहा दिया जाता है।
सरयू की बाढ़ से कहरानपुरवा, गोबरहा, तेलवारी, अहिरन टेपरा, सरायसुर्जन आदि गांवों को बचाने के लिए कार्य चल रहा है। संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को सभी निर्धारित कार्य तय अवधि में पूर्ण न करने पर कड़ी कार्रवाई को भी चेताया गया है।
शशिकांत सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़