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घाघरा में उफान से 150 परिवारों ने छोड़ा घर
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बाराबंकी। नेपाल से पानी छोड़े जाने के चलते उफनाई घाघरा तराई के कई गांवों के वजूद के लिए खतरा बनी है। गुरुवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 35 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। तराई के 13 गांवों के करीब 650 परिवारों के सामने जीवन यापन का संकट पैदा हो गया है। गांव से बाहर निकलने के लिए लोगों का नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। करीब 150 परिवार तटबंध पर शरण ले चुके हैं। बहुत से परिवार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जूझ रहे हैं। इस बीच बाढ़ राहत आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने एडीएम के साथ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। तटबंध पर रूके लोगों की समस्याओं जानीं और उनके निराकरण के आदेश एसडीएम को दिए।
बाढ़ कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 मीटर को पार करके 106.356 मीटर पर पहुंच गया। नदी खतरे के निशान से 35 सेमी. ऊपर बह रहा है। नेपाल द्वारा लगातार नदी में छोड़े जा रहे पानी की वजह से तराई के हालात बिगड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार को एक बार फिर सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से स्थिति और खराब हो गई है।
नदी का पानी तराई के सरायं सुरजन, सनावा, बधौली, भौरीकोल, तेलवारी, गिबहड़, सिरौलीगुंग, कोठी डीहा, भयाका पुरवा, ढेकवा समेत 13 गांवों में पहुंच जाने से लोगों में हड़कंप मच गया है। बाढ़ पीड़ित ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सामान लादकर सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन कर रहे हैं। कई गांवों से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए पर्याप्त मात्रा में नाव भी नहीं मिल पा रही हैं। लोग निजी नावों के सहारे बाहर निकल रहे हैं। वहीं बृहस्पतिवार को बाढ़ राहत आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने अपर जिलाधिकारी संदीप गुप्ता तथा एसडीएम सिरौलीगौसपुर अशोक कुमार के साथ प्रभावित गांवों का जायजा लिया। तटबंध पर रह रहे लोगों से बात की और उन्हें यथा संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश एसडीएम को दिए।
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बाढ़ राहत आयुक्त, एसडीएम के साथ बाढ़ प्रभावित टेपरा, सरायं सुरजन, भौरीकोल व अन्य गांवों का जायजा लिया गया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए पर्याप्त नाव बाढ़ पीड़ितों को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
-संदीप गुप्ता, अपर जिलाधिकारी
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बाढ़ कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 मीटर को पार करके 106.356 मीटर पर पहुंच गया। नदी खतरे के निशान से 35 सेमी. ऊपर बह रहा है। नेपाल द्वारा लगातार नदी में छोड़े जा रहे पानी की वजह से तराई के हालात बिगड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार को एक बार फिर सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से स्थिति और खराब हो गई है।
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नदी का पानी तराई के सरायं सुरजन, सनावा, बधौली, भौरीकोल, तेलवारी, गिबहड़, सिरौलीगुंग, कोठी डीहा, भयाका पुरवा, ढेकवा समेत 13 गांवों में पहुंच जाने से लोगों में हड़कंप मच गया है। बाढ़ पीड़ित ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सामान लादकर सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन कर रहे हैं। कई गांवों से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए पर्याप्त मात्रा में नाव भी नहीं मिल पा रही हैं। लोग निजी नावों के सहारे बाहर निकल रहे हैं। वहीं बृहस्पतिवार को बाढ़ राहत आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने अपर जिलाधिकारी संदीप गुप्ता तथा एसडीएम सिरौलीगौसपुर अशोक कुमार के साथ प्रभावित गांवों का जायजा लिया। तटबंध पर रह रहे लोगों से बात की और उन्हें यथा संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश एसडीएम को दिए।
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बाढ़ राहत आयुक्त, एसडीएम के साथ बाढ़ प्रभावित टेपरा, सरायं सुरजन, भौरीकोल व अन्य गांवों का जायजा लिया गया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए पर्याप्त नाव बाढ़ पीड़ितों को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
-संदीप गुप्ता, अपर जिलाधिकारी