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27 करोड़ 59 लाख के प्रोजेक्ट से मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
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बाराबंकी। मत्स्य पालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की गई है। इसके तहत जिले के 174 मत्स्य पालकों के 27 करोड़ 59 लाख रुपये के प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार को भेजे गए हैं। इनमें नए तालाबों का निर्माण, मत्स्य बीज कारखाना और रिसर्कूलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के तहत सीमेंटेड बाक्स तैयार कर मछली तैयार करने आदि के कार्य शामिल हैं। मत्स्य विभाग का दावा है कि इन प्रोजेक्टों पर मुहर लगते ही मत्स्य पालन के क्षेत्र में तेजी आएगी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तीन प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं। इनमें एक हेक्टेयर तक के नए तालाब के निर्माण में 11 लाख रुपये की धनराशि लाभार्थी को मिलेगी। इससे वह अपने निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कराकर मत्स्य पालन कर सकेंगे। वहीं 50 लाख लागत के रिसर्कूलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के तहत सीमेंट के बॉक्स तैयार कर उसमें मत्स्य बीज से मछली पालन कराया जाएगा। बीज की उपलब्धता विभाग कराएगा।
इसी प्रकार तीस लाख, एक करोड़, दो करोड़ और साढ़े छह करोड़ की अलग धनराशि से मछली का चारा तैयार करने का कारखाना लगाया जाएगा। यहां मक्का, सोयाबीन और चावल से मत्स्य चारा तैयार होगा। इन प्रोजेक्टों को लगाने के लिए सामान्य, एससी और महिला वर्ग को अलग-अलग अनुदान मिलेगा।
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मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़ने और अनुदान का लाभ देकर व्यवसाय शुुरू करने के लिए 174 लोगों ने पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच के बाद इन सभी के 27.59 करोड़ के प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही प्रोजेक्ट के तहत कार्य शुरू होगा और मत्स्य पालन से जुड़कर लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
मत्स्य पालन अभिकरण के सहायक निदेशक वीएस चौरसिया ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 174 आवेदकों के प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार को भेजे गए हैं। 27.59 करोड़ के इन प्रोजेक्टों पर जल्द ही स्वीकृति मिलेगी।
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तीन प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं। इनमें एक हेक्टेयर तक के नए तालाब के निर्माण में 11 लाख रुपये की धनराशि लाभार्थी को मिलेगी। इससे वह अपने निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कराकर मत्स्य पालन कर सकेंगे। वहीं 50 लाख लागत के रिसर्कूलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के तहत सीमेंट के बॉक्स तैयार कर उसमें मत्स्य बीज से मछली पालन कराया जाएगा। बीज की उपलब्धता विभाग कराएगा।
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इसी प्रकार तीस लाख, एक करोड़, दो करोड़ और साढ़े छह करोड़ की अलग धनराशि से मछली का चारा तैयार करने का कारखाना लगाया जाएगा। यहां मक्का, सोयाबीन और चावल से मत्स्य चारा तैयार होगा। इन प्रोजेक्टों को लगाने के लिए सामान्य, एससी और महिला वर्ग को अलग-अलग अनुदान मिलेगा।
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मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़ने और अनुदान का लाभ देकर व्यवसाय शुुरू करने के लिए 174 लोगों ने पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच के बाद इन सभी के 27.59 करोड़ के प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही प्रोजेक्ट के तहत कार्य शुरू होगा और मत्स्य पालन से जुड़कर लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
मत्स्य पालन अभिकरण के सहायक निदेशक वीएस चौरसिया ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 174 आवेदकों के प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार को भेजे गए हैं। 27.59 करोड़ के इन प्रोजेक्टों पर जल्द ही स्वीकृति मिलेगी।