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डीएम ने मौके पर पहुंच कराई पैमाइश, निर्माण शरू कराने के दिए निर्देश
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सिद्धौर (बाराबंकी)। सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन के लिए चिन्हित जमीन के विवाद को हल कराने डीएम डॉ. आदर्श सिंह मौके पर पहुंचे। इस दौरान लेखपाल द्वारा की जा रही त्रुटिपूर्ण पैमाइश की बात सामने आने पर डीएम ने स्वयं नक्शा देखा। इसके बाद लेखपाल को फटकार लगाते हुए सभी की भूमिका संदिग्ध होने की बात कहकर एसडीएम से नीचे के सभी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला सिद्धौर ब्लॉक के नूरापुर गांव का है। मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में ग्राम प्रधान तेजऊ ने शिकायत की पंचायत में सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण चिन्हित भूमि पर विवाद के कारण नहीं हो पा रहा है। कई बार थाने से लेकर तहसील तक शिकायत की गई। मगर, मनमानी रिपोर्ट लगाकर मामले का निस्तारण कर दिया गया। यह सुनकर डीएम ने तत्काल मौके के निस्तारण के लिए टीम का गठन कराया। संपूर्ण समाधान के बाद सीधे नूरापुर मौके पर पहुंच गए।
यहां पर गाटा संख्या संख्या 125 और 139 को सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन के निर्माण कराने के लिए चिन्हित की गई थी । मगर, विवाद के कारण निर्माण नहीं हो सका। डीएम ने गाटा संख्या 125 की जमीन को देखकर कहा कि यह जमीन गांव के अंदर है। ऐसे में पंचायत भवन बनाना उचित नहीं है। इसके बाद गाटा संख्या 139 जो गांव के बाहर नवाबगंज रजबहा के किनारे स्थित है, वहां पर पहुंचे। हल्का लेखपाल अजय नारायण से जमीन नापकर बताने को कहा तो लेखपाल ने प्राथमिक विद्यालय से सटी होने के कारण गाटा संख्या 138 पर ही पंचायत भवन तथा सामुदायिक केंद्र की जमीन बता दी।
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मगर, पैमाइश के दौरान हीं पूर्व प्रधान त्रिलोकी सिंह ने बताया कि लेखपाल द्वारा गाटा संख्या की गलत नाप की जा रही है। इस पर स्वयं डीएम ने नक्शा देखा और ग्रामीणों ने बताया कि यह जमीन विद्यालय के नाम है। इसके आगे की जमीन गाटा संख्या 139 है। यह सुनकर डीएम आक्रोशित हो गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों-कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई।
एसडीएम जितेंद्र सिंह कटियार से कहा कि आप से नीचे जितने भी कर्मचारी हैं, उन सबकी भूमिका मुझे संदिग्ध नजर आ रही है। बीडीओ रामेंद्र कुशवाहा की संदिग्ध भूमिका है। ऐसे में सभी अधिकारी व कर्मचारी तीन दिन में स्पष्टीकरण दें। वहीं हर हाल में बुधवार से सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए।
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मामला सिद्धौर ब्लॉक के नूरापुर गांव का है। मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में ग्राम प्रधान तेजऊ ने शिकायत की पंचायत में सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण चिन्हित भूमि पर विवाद के कारण नहीं हो पा रहा है। कई बार थाने से लेकर तहसील तक शिकायत की गई। मगर, मनमानी रिपोर्ट लगाकर मामले का निस्तारण कर दिया गया। यह सुनकर डीएम ने तत्काल मौके के निस्तारण के लिए टीम का गठन कराया। संपूर्ण समाधान के बाद सीधे नूरापुर मौके पर पहुंच गए।
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यहां पर गाटा संख्या संख्या 125 और 139 को सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन के निर्माण कराने के लिए चिन्हित की गई थी । मगर, विवाद के कारण निर्माण नहीं हो सका। डीएम ने गाटा संख्या 125 की जमीन को देखकर कहा कि यह जमीन गांव के अंदर है। ऐसे में पंचायत भवन बनाना उचित नहीं है। इसके बाद गाटा संख्या 139 जो गांव के बाहर नवाबगंज रजबहा के किनारे स्थित है, वहां पर पहुंचे। हल्का लेखपाल अजय नारायण से जमीन नापकर बताने को कहा तो लेखपाल ने प्राथमिक विद्यालय से सटी होने के कारण गाटा संख्या 138 पर ही पंचायत भवन तथा सामुदायिक केंद्र की जमीन बता दी।
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मगर, पैमाइश के दौरान हीं पूर्व प्रधान त्रिलोकी सिंह ने बताया कि लेखपाल द्वारा गाटा संख्या की गलत नाप की जा रही है। इस पर स्वयं डीएम ने नक्शा देखा और ग्रामीणों ने बताया कि यह जमीन विद्यालय के नाम है। इसके आगे की जमीन गाटा संख्या 139 है। यह सुनकर डीएम आक्रोशित हो गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों-कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई।
एसडीएम जितेंद्र सिंह कटियार से कहा कि आप से नीचे जितने भी कर्मचारी हैं, उन सबकी भूमिका मुझे संदिग्ध नजर आ रही है। बीडीओ रामेंद्र कुशवाहा की संदिग्ध भूमिका है। ऐसे में सभी अधिकारी व कर्मचारी तीन दिन में स्पष्टीकरण दें। वहीं हर हाल में बुधवार से सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए।