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गरीब बन 30 करोड़ का बेच डाला धान
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बाराबंकी। जिले के एक हजार तीन किसानों ने गरीब बनकर सरकारी केंद्रों पर करीब 30 करोड़ रुपये का धान और गेहूं बेच डाला। मामला पकड़ में आने के बाद विभाग ने इनके राशनकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये हालात तब हैं जब सरकार फर्जी राशनकार्ड पकड़ने के लिए तीन बार अभियान चला चुकी है। इतना ही नहीं गैर जिले के कुछ किसानों ने भी योजना का लाभ उठाया है। इसके बाद भी मामला पकड़ में आने के बाद और बड़े घोटाले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
शासन ने आपूर्ति विभाग को हाल ही में एक सूची भेजी जिसमें बताया गया कि जिले के 1022 किसान ऐसे हैं जिन्होंने गरीब बनकर सरकारी केंद्रों पर धान और गेहूं बेचा। जांच में पाया गया कि 1003 किसानों ने गरीब बनकर करीब 30 करोड़ रुपये का धान और गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेचा।
यहीं नहीं इन किसानों के अन्त्योदय और पात्र गृहस्थी के कार्ड भी बने हुए हैं जिसके तहत ये सरकार द्वारा मुफ्त में बांटे जा रहे अनाज योजना का भी लाभ ले रहे हैं। शासन द्वारा भेजी गई सूची मिलते ही आपूर्ति विभाग में हड़कंप मच गया। जांच में पाया कि 1003 किसान ऐसे हैं जो अपात्र हैं।
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15 नाम ऐसे हैं जो गैर जनपद के हैं और इस सूची में शामिल कर लिए गए हैं। विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके राशनकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए पूरी रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
बाजार में बेच दिया मुफ्त में लिया अनाज
सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा मुफ्त अनाज वितरण योजना का भी लोग गलत तरीके से लाभ उठा रहे हैं। अपात्र होने के बाद भी इनके राशनकार्ड बने हैं और ये अनाज लेने के बाद उसे बाजार में बेच दे रहे हैं। यही कारण है कि बाजार में धान और गेहूं इतना ज्यादा आ गया है कि इसको कोई पूछ नहीं रहा है। इसी वजह से किसान का धान और गेहूं बेभाव होता जा रहा है और इसका सीधा लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं।
शासन द्वारा भेजी गई सूची में 1022 किसानों के नाम थे। इसकी जांच कराई गई तो 1003 किसान अपात्र पाए गए हैं। इनमें 17 किसान ऐसे हैं जिनके अन्त्योदय कार्ड बने हुए हैं। वहीं 15 किसान ऐसे हैं जो दूसरे जिले के रहने वाले हैं। ऐसे किसानों के राशनकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
-राकेश कुमार तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी
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शासन ने आपूर्ति विभाग को हाल ही में एक सूची भेजी जिसमें बताया गया कि जिले के 1022 किसान ऐसे हैं जिन्होंने गरीब बनकर सरकारी केंद्रों पर धान और गेहूं बेचा। जांच में पाया गया कि 1003 किसानों ने गरीब बनकर करीब 30 करोड़ रुपये का धान और गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेचा।
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यहीं नहीं इन किसानों के अन्त्योदय और पात्र गृहस्थी के कार्ड भी बने हुए हैं जिसके तहत ये सरकार द्वारा मुफ्त में बांटे जा रहे अनाज योजना का भी लाभ ले रहे हैं। शासन द्वारा भेजी गई सूची मिलते ही आपूर्ति विभाग में हड़कंप मच गया। जांच में पाया कि 1003 किसान ऐसे हैं जो अपात्र हैं।
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15 नाम ऐसे हैं जो गैर जनपद के हैं और इस सूची में शामिल कर लिए गए हैं। विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके राशनकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए पूरी रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
बाजार में बेच दिया मुफ्त में लिया अनाज
सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा मुफ्त अनाज वितरण योजना का भी लोग गलत तरीके से लाभ उठा रहे हैं। अपात्र होने के बाद भी इनके राशनकार्ड बने हैं और ये अनाज लेने के बाद उसे बाजार में बेच दे रहे हैं। यही कारण है कि बाजार में धान और गेहूं इतना ज्यादा आ गया है कि इसको कोई पूछ नहीं रहा है। इसी वजह से किसान का धान और गेहूं बेभाव होता जा रहा है और इसका सीधा लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं।
शासन द्वारा भेजी गई सूची में 1022 किसानों के नाम थे। इसकी जांच कराई गई तो 1003 किसान अपात्र पाए गए हैं। इनमें 17 किसान ऐसे हैं जिनके अन्त्योदय कार्ड बने हुए हैं। वहीं 15 किसान ऐसे हैं जो दूसरे जिले के रहने वाले हैं। ऐसे किसानों के राशनकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
-राकेश कुमार तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी