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16 क्रय केंद्रों पर तौल ठप
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बाराबंकी। नवीन मंडी स्थित धान क्रय केन्द्र पर खड़ी धान से लदी ट्रालियां।
- फोटो : BARABANKI
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बाराबंकी। विपणन शाखा के 16 केंद्रों पर पिछले एक सप्ताह से धान की तौल पूरी तरह से ठप है। तौल न होने से यहां पर धान लिए खड़ा किसान खासा परेशान है, लेकिन उसका दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। जिससे वह अपना धान औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर है। जबकि मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि धान खरीद प्रक्रिया किसी भी हाल में बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके बाद भी जिम्मेदार किसानों की इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं।
धान खरीद में लगी अन्य एजेंसियों के 40 क्रय केंद्रों पर धान खरीद पहले ही बंद हो चुकी है। सिर्फ विपणन शाखा के केेंद्रों पर ही धान खरीद हो रही थी। लेकिन 27 जनवरी से इन केंद्रों पर धान की तौल पूरी तरह से ठप है। इससे किसानों का धान तौला नहीं जा रहा है, किसानों के पूछने पर कहा जा रहा है कि हाईब्रिड धान की खरीद लक्ष्य से अधिक हो चुकी है इसलिए हाईब्रिड धान की खरीद कर पाना संभव नहीं है।
वहीं शासन स्तर से कंप्यूटर पर इसकी फीडिंग भी बंद कर दी गई है। जबकि नवीन मंडी में ही तीन दर्जन से अधिक धान लदी ट्रॉलियां अभी भी खड़ी हुई हैं। प्रभारी धान की तौल करना तो दूर केंद्र पर आते ही नहीं है। किसानों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सोमवार को भी साफ कहा कि धान खरीद प्रक्रिया निरंतर चलनी रहनी चाहिए। इसके बाद भी जिले में किसानों से धान की खरीद नहीं की जा रही है। इससे किसान मजबूर होकर अपना धान औने-पौने दामों पर व्यापारियों के हाथों बेच रहा है।
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लक्ष्य से 24 हजार एमटी ज्यादा हो चुकी है खरीद
जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि शासन ने इस बार धान खरीद का लक्ष्य 1 लाख 30 हजार एमटी निर्धारित किया था। इसके तहत अब तक जिले के 56 क्रय केंद्रों के माध्यम से 1 लाख 54 हजार एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। जो निर्धारित लक्ष्य से 24 हजार एमटी ज्यादा है।
कागजों पर हो रही खरीद
किसानों का आरोप है कि विपणन शाखा के क्रय केंद्रों पर भले ही 27 जनवरी से धान की खरीद नहीं की जा रही हो लेकिन कागजों पर खरीद की जा रही है। जब किसानों से धान की खरीद नहीं हो रही है तो फिर किसका धान है जो कागजों पर खरीद कर चढ़ाया जा रहा है। इससे साफ है कि केंद्र प्रभारी मिलर्स को लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं और उनके कागज चढ़ा रहे हैं।
जिले में धान खरीद बंद नहीं हुई है बल्कि हाईब्रिड धान की खरीद पर रोक लगाई गई है। क्योंकि इस धान की खरीद निर्धारित मानक से ज्यादा हो चुकी है। यदि किसी किसान के पास कॉमन धान होगा और वह केंद्र पर लेकर आता है तो उसकी तौल जरूर की जाएगी। लेकिन हाईब्रिड धान की खरीद कर पाना अब संभव नहीं है।
-संतोष कुमार द्विवेदी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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धान खरीद में लगी अन्य एजेंसियों के 40 क्रय केंद्रों पर धान खरीद पहले ही बंद हो चुकी है। सिर्फ विपणन शाखा के केेंद्रों पर ही धान खरीद हो रही थी। लेकिन 27 जनवरी से इन केंद्रों पर धान की तौल पूरी तरह से ठप है। इससे किसानों का धान तौला नहीं जा रहा है, किसानों के पूछने पर कहा जा रहा है कि हाईब्रिड धान की खरीद लक्ष्य से अधिक हो चुकी है इसलिए हाईब्रिड धान की खरीद कर पाना संभव नहीं है।
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वहीं शासन स्तर से कंप्यूटर पर इसकी फीडिंग भी बंद कर दी गई है। जबकि नवीन मंडी में ही तीन दर्जन से अधिक धान लदी ट्रॉलियां अभी भी खड़ी हुई हैं। प्रभारी धान की तौल करना तो दूर केंद्र पर आते ही नहीं है। किसानों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सोमवार को भी साफ कहा कि धान खरीद प्रक्रिया निरंतर चलनी रहनी चाहिए। इसके बाद भी जिले में किसानों से धान की खरीद नहीं की जा रही है। इससे किसान मजबूर होकर अपना धान औने-पौने दामों पर व्यापारियों के हाथों बेच रहा है।
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लक्ष्य से 24 हजार एमटी ज्यादा हो चुकी है खरीद
जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि शासन ने इस बार धान खरीद का लक्ष्य 1 लाख 30 हजार एमटी निर्धारित किया था। इसके तहत अब तक जिले के 56 क्रय केंद्रों के माध्यम से 1 लाख 54 हजार एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। जो निर्धारित लक्ष्य से 24 हजार एमटी ज्यादा है।
कागजों पर हो रही खरीद
किसानों का आरोप है कि विपणन शाखा के क्रय केंद्रों पर भले ही 27 जनवरी से धान की खरीद नहीं की जा रही हो लेकिन कागजों पर खरीद की जा रही है। जब किसानों से धान की खरीद नहीं हो रही है तो फिर किसका धान है जो कागजों पर खरीद कर चढ़ाया जा रहा है। इससे साफ है कि केंद्र प्रभारी मिलर्स को लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं और उनके कागज चढ़ा रहे हैं।
जिले में धान खरीद बंद नहीं हुई है बल्कि हाईब्रिड धान की खरीद पर रोक लगाई गई है। क्योंकि इस धान की खरीद निर्धारित मानक से ज्यादा हो चुकी है। यदि किसी किसान के पास कॉमन धान होगा और वह केंद्र पर लेकर आता है तो उसकी तौल जरूर की जाएगी। लेकिन हाईब्रिड धान की खरीद कर पाना अब संभव नहीं है।
-संतोष कुमार द्विवेदी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी