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लखनऊ में ही तो नहीं छिपा परमानंद
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 20 May 2016 11:35 PM IST
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परमानंद बाबा
- फोटो : Demo pic
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बच्चा पैदा करने के नाम पर झांसा देकर महिलाओं का शारीरिक शोषण करने वाला बाबा परमानंद उर्फ रामशंकर तिवारी कहां छिपा है? इस बात का जवाब पुलिस के पास नहीं है। पुलिस की कई टीमें बाबा की तलाश में लगी हुई हैं लेकिन उसके करीबी रहे लोगों की मानें तो कथित बाबा परमानंद लखनऊ में ही छिपा है। राजधानी में उसके चार मकान बताए जा रहे हैं।
देवा कोतवाली क्षेत्र के हर्रई गांव स्थित मां काली शक्तिपीठ आश्रम का कथित तांत्रिक बाबा परमानंद उर्फ रामशंकर तिवारी पुलिस की आंख की किरकिरी बना हुआ है। पिछले एक सप्ताह से एसओजी, खुफिया एजेंसी व पुलिस की टीमें कथित बाबा की तलाश कर रही हैं लेकिन अभी तक उसका कुछ भी पता नहीं चल सका है।
बाबा के करीबी रहे लोगों की मानें तो बाबा लखनऊ में कहीं छिपा है और वहीं से अपने को बचाने के प्रयास में लगा है। सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट में दायर रिट में बाबा परमानंद स्वयं याची है। कोर्ट में दाखिल कागजोें पर बाबा परमानंद के ही हस्ताक्षर हैं।
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लेकिन पुलिस को बाबा की भनक तक नहीं है। बाबा लखनऊ में रह कर पूरी गतिविधि पर नजर बनाए हुए है और पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है। बाबा के खिलाफ खड़ा हुआ गवाह सुशील अवस्थी पूर्व में बाबा का वाहन चालक रहा है। सुशील की मानें तो बाबा के लखनऊ में चार ठिकाने हैं।
बाबा परमानंद के करीबियों की मानें तो हर्रई आश्रम से फरार होने के बाद बाबा परमानंद उर्फ रामशंकर तिवारी ने अपना वेश बदल लिया है। लोगों के मुताबिक बाबा ने वेश बदल लिया है।
यह सवाल अब उठने लगे हैं कि कहीं कुछ पुलिसवाले ही तो बाबा परमानंद की मदद तो नहीं कर रहे हैं। कारण, कई पुलिस वाले बाबा परमानंद के मुरीद हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब बाबा के करीबियों के मोबाइल नंबरों पर निगरानी बढ़ाई गई तो एक-एक कर सभी मोबाइल फोन बंद हो गए।
बाबा परमानंद या उसके करीबियों को कैसे पता चला कि उनके मोबाइल नंबर की निगरानी की जा रही है। अभी तक पुलिस मोबाइल नंबर से बाबा व उसके भक्तों का नाम व पता क्यों ट्रेस नहीं कर पाई।
बाबा परमानंद, उसके परिवारीजनाें व करीबियों ने मोबाइल फोन का प्रयोग बंद कर दिया है जिससे बाबा की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो बाबा के परिवार, रिश्तेदार व करीबियों, जिस पर भी पुलिस का ध्यान जा सकता था।
उन सभी ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बाबा के करीब दो दर्जन लोगों के मोबाइल नंबर कलेक्ट कर उन पर निगरानी बढ़ाई तो एक-एक कर सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए।
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देवा कोतवाली क्षेत्र के हर्रई गांव स्थित मां काली शक्तिपीठ आश्रम का कथित तांत्रिक बाबा परमानंद उर्फ रामशंकर तिवारी पुलिस की आंख की किरकिरी बना हुआ है। पिछले एक सप्ताह से एसओजी, खुफिया एजेंसी व पुलिस की टीमें कथित बाबा की तलाश कर रही हैं लेकिन अभी तक उसका कुछ भी पता नहीं चल सका है।
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बाबा के करीबी रहे लोगों की मानें तो बाबा लखनऊ में कहीं छिपा है और वहीं से अपने को बचाने के प्रयास में लगा है। सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट में दायर रिट में बाबा परमानंद स्वयं याची है। कोर्ट में दाखिल कागजोें पर बाबा परमानंद के ही हस्ताक्षर हैं।
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लेकिन पुलिस को बाबा की भनक तक नहीं है। बाबा लखनऊ में रह कर पूरी गतिविधि पर नजर बनाए हुए है और पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है। बाबा के खिलाफ खड़ा हुआ गवाह सुशील अवस्थी पूर्व में बाबा का वाहन चालक रहा है। सुशील की मानें तो बाबा के लखनऊ में चार ठिकाने हैं।
बाबा परमानंद के करीबियों की मानें तो हर्रई आश्रम से फरार होने के बाद बाबा परमानंद उर्फ रामशंकर तिवारी ने अपना वेश बदल लिया है। लोगों के मुताबिक बाबा ने वेश बदल लिया है।
यह सवाल अब उठने लगे हैं कि कहीं कुछ पुलिसवाले ही तो बाबा परमानंद की मदद तो नहीं कर रहे हैं। कारण, कई पुलिस वाले बाबा परमानंद के मुरीद हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब बाबा के करीबियों के मोबाइल नंबरों पर निगरानी बढ़ाई गई तो एक-एक कर सभी मोबाइल फोन बंद हो गए।
बाबा परमानंद या उसके करीबियों को कैसे पता चला कि उनके मोबाइल नंबर की निगरानी की जा रही है। अभी तक पुलिस मोबाइल नंबर से बाबा व उसके भक्तों का नाम व पता क्यों ट्रेस नहीं कर पाई।
बाबा परमानंद, उसके परिवारीजनाें व करीबियों ने मोबाइल फोन का प्रयोग बंद कर दिया है जिससे बाबा की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो बाबा के परिवार, रिश्तेदार व करीबियों, जिस पर भी पुलिस का ध्यान जा सकता था।
उन सभी ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बाबा के करीब दो दर्जन लोगों के मोबाइल नंबर कलेक्ट कर उन पर निगरानी बढ़ाई तो एक-एक कर सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए।