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डॉक्टरों ने नहीं देखा, गर्भ में बच्चे की मौत

Sat, 20 Aug 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sat, 20 Aug 2016 11:39 PM IST
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Doctors did not see, the death of the child in the womb
जिला अस्पताल में डॉक्टर की लापरवाही - फोटो : अमर उजाला
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने एक बच्चे की जान मां के गर्भ में ही ले ली। शुक्रवार दोपहर फतेहपुर सीएचसी से रेफर होकर आई महिला 12 घंटे तक बेंच पर तड़पती रही लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। परिवारीजन गिडगिड़ाते रहे लेकिन डॉक्टरों ने देखना तक मुनासिब नहीं समझा।
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परिवारीजनों ने डीएम और सीएमओ से शिकायत की तो उसे भर्ती किया गया लेकिन रात 12 बजे तक उसे किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी ने नहीं देखा। इसी बीच स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रसव के लिए ढाई हजार की मांग कर दी। परिवारीजन पैसा नहीं दे पाए तो प्रसव पीड़ा से चीखती महिला की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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कुछ देर बाद महिला की ननद व उसकी बुआ ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के  अंदर प्रसव कराया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्चा गर्भ में ही मर चुका था। शनिवार को जानकारी पर मीडियाकर्मी पहुंचे तो सीएमएस उनसे अभद्रता करने लगीं। शिकायत करने पर परिवारीजनों को भी डांटा।
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थाना क्षेत्र जैदपुर के ग्राम खुशहालपुरवा निवासी शशि देवी (27) पत्नी पवन कुमार प्रसव का समय नजदीक होने पर फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम देवकलिया स्थित मायके गई थी। शुक्रवार को उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उसका भाई मनोज उसे सीएचसी फतेहपुर ले गया।

वहां जांच कराने के बाद चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे के गले में फंदा पड़ा है, इसलिए ऑपरेशन कर प्रसव कराना पड़ेगा। चिकित्सकों ने उसे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिवारीजन उसको लेकर शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर गर्भवती को बेंच पर लिटा दिया गया। परिवारीजनों के कई बार बुलाने के बाद कोई डॉक्टर या चिकित्साकर्मी देखने नहीं आया।

महिला के भाई मनोज ने बताया कि इसके बाद उसने डीएम अजय यादव और सीएमओ डॉ. डीआर सिंह से इसकी शिकायत की। अधिकारियों की डांट पड़ने के बाद महिला को लेबर रूम में ले जाया गया जहां महिला चिकित्सक  रेनू पंत ने परिवारीजनों को बताया कि बच्चा गर्भ में मर गया है, ऑपरेशन करना पड़ेगा और दो मिनट में ही वहां से चली गईं।

मनोज ने कहा कि फिर मैंने सीएमएस आभा आशुतोष से बात की तो उन्होंने बताया कि मैं लखनऊ में हूं जैसे भी हो काम चला लो। इतने में मामता नाम की कर्मचारी आई और बोली कि ढाई हजार रुपये दे दो नार्मल डिलीवरी करवा दूंगी। परिवारीजनों के रुपये देने से मना करने पर दोबारा कोई डॉक्टर या कर्मचारी महिला को देखने नहीं आया।

रात करीब 12 बजे जब महिला प्रसव पीड़ा से चीखने लगी तो डॉ. रवि किशोर, डॉ. प्रीती शुक्ला व डॉ. बेनजीर ओटी ले गए लेकिन फिर उसे अटेंड नहीं किया। चिकित्सक अन्य सीजर करते रहे। बीच में कई बार डॉ. रवि किशोर महिला को देखने आए और ननद गायत्री व बुआ यशोदा से उसकी देखभाल करने की बात कहकर चले गए। इसी बीच महिला की ननद और बुआ ने नार्मल डिलीवरी करवाई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

बच्चा गर्भ में दम तोड़ चुका था। उसके बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने पर आननफानन उसे ग्लूकोज लगा दिया गया। परिवारीजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया तो उन्हें डांट-डपट कर चुप करा दिया। शनिवार को भी अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा परिवारीजनों को शिकायत न करने के लिए धमकाया गया।  


डॉक्टरोें ने बरती लापरवाही
जिस गर्भवती का सीजर करने की बात चिकित्सकों द्वारा कही जा रही थी उसका 12 घंटे बाद आखिर नार्मल प्रसव कैसे हो गया। महिला के भाई मनोज ने कहा कि इलाज में लापरवाही की वजह से बच्चे की मौत हुई है। अगर मेरी बहन को समय पर डॉक्टर देख लेते तो बच्चे की जान बच जाती।

परिवारीजनों का कहना था अगर रुपये दे देते तो बच्चे की मौत न होती। चिकित्सकों ने बाद में परिवारीजनों को समझा दिया कि पेट में बच्चा पहले से ही मर चुका था। कहा कि सीएमएस आभा आशुतोष रात को लखनऊ चली जाती हैं। रात में उनसे भी शिकायत की तो फोन पर ही फटकारने लगीं। बोलीं तुम्हारा मामला है चाहे जैसे निपटाओ।

पहले से मर चुका था बच्चा : सीएमएस
इस मामले में सीएमएस आभा आशुतोष से बात की गई तो वह उखड़ गईं। बोलीं मेरे अस्पताल में रहने या न रहने से क्या फर्क पड़ता है। मैं चाहे जहां रहूं फोन से काम चला लेती हूं। महिला प्रसव के लिए आई थी उसके उपचार में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। गर्भ में पहले से बच्चा मर चुका था, डॉक्टर जिंदा तो कर नहीं सकते थे। जिसको जहां शिकायत करना हो करें।

जिला महिला अस्पताल में उपचार में लापरवाही से बच्चे की मौत का मामला संज्ञान में नहीं आया है और न ही इसकी कोई लिखित शिकायत हुई है। परिवारीजन यदि लिखित शिकायत करते हैं तो जांच कराकर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ 


जिला महिला अस्पताल में उपचार में लापरवाही से बच्चे की मौत की जानकारी हुई है लेकिन कोई लिखित शिकायत अभी तक नहीं प्राप्त हुई है। फिर भी पूरे मामले की जांच सीएमओ से कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -अजय यादव, जिलाधिकारी
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