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तीन गांव की ढाई हजार आबादी को मिलेगा शहरी का दर्जा
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:48 AM IST
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तीन गांव की ढाई हजार आबादी
को अब मिलेगा शहरी का दर्जा
क्रासर
- एक वर्ष से प्रमाण पत्र व सरकारी योजनाओं से वंचित थे यहां के निवासी
- आंदोलन व प्रदर्शन के बाद डीएम की सख्ती पर शासन को भेजा गया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार में तीन गांवों की करीब ढाई हजार आबादी को जल्द ही शहरी सीमा में शामिल कर लिया जाएगा। एक साल से यहां के ग्रामीण सरकारी तंत्र की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। कई बार धरना प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी को शहरी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। वहां से हरी झंड़ी मिलते ही यहां के लोगों को सरकारी योजनाओं से लेकर आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने का रास्ता साफ हो जाएगा। डीएम के इस फैसले के बाद यहां के ग्रामीण काफी खुश हैं। इस मामले को अमर उजाला भी प्रमुखता के साथ उठाता रहा है।
मालूम हो कि नगर निकाय चुनाव के समय परिसीमन में आसपास के कई गांवों को शामिल किया गया था। किन्तु नगर विकास विभाग के नोटिफिकेशन में राजस्व गांव तो नगर पालिका परिषद की सीमा विस्तार में शामिल कर लिए गए किन्तु उनके तीन मजरों जगनेहटा, दरामनगर व वादीनगर को छोड़ दिया गया था। चुनाव के समय मामला आया-गया हो गया। किन्तु कुछ दिनों बाद यहां नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना तो दूर उन्हें आय जाति समेत कई प्रमाण पत्र तक नहीं बन पा रहे थे। क्योंकि राजस्व गांव शहर में शामिल होने के बाद इन मजरों को न तो ग्रामीण और न ही शहरी क्षेत्र का माना जा रहा था। इस मामले को रितेश मिश्रा और अजय कुमार ने धीरे-धीरे आंदोलन का रुप दिया। करीब 11 माह बाद डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीएम को इन गांवों को शहरी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं। एडीएम ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अब जल्द ही यहां के लोगों को शहरी सीमा में शामिल कर लिया जाएगा।
बाक्स
इन गांवों को भेजा गया प्रस्ताव
जिला प्रशासन ने जिन तीन गांवों को शहरी क्षेत्र का दर्जा दिए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है उनमें जगनेहटा, दरामनगर व वादीनगर शामिल हैं। जिनकी लगभग ढाई हजार की आबादी बताई जा रही है। पूर्व में हुए सीमा विस्तार में बड़ेल, जिंहौली, कोठीडीह, ओबरी, बनवा,फैजुल्लागंज, ढकौली व पैसार आदि राजस्व गांव शामिल किए गए थे।
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बाक्स
सीमा विस्तार के बाद राजस्व गांवों के तीन मजरों को शहरी सीमा में शामिल किए जाने को लेकर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेेजा गया है। जिस पर अंतिम मुहर लगने के बाद इन्हें नगर पालिका में शामिल कर सुविधाएं दी जाने लगेगी।
संदीप कुमार गुप्ता, एडीएम।
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को अब मिलेगा शहरी का दर्जा
क्रासर
- एक वर्ष से प्रमाण पत्र व सरकारी योजनाओं से वंचित थे यहां के निवासी
- आंदोलन व प्रदर्शन के बाद डीएम की सख्ती पर शासन को भेजा गया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार में तीन गांवों की करीब ढाई हजार आबादी को जल्द ही शहरी सीमा में शामिल कर लिया जाएगा। एक साल से यहां के ग्रामीण सरकारी तंत्र की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। कई बार धरना प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी को शहरी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। वहां से हरी झंड़ी मिलते ही यहां के लोगों को सरकारी योजनाओं से लेकर आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने का रास्ता साफ हो जाएगा। डीएम के इस फैसले के बाद यहां के ग्रामीण काफी खुश हैं। इस मामले को अमर उजाला भी प्रमुखता के साथ उठाता रहा है।
मालूम हो कि नगर निकाय चुनाव के समय परिसीमन में आसपास के कई गांवों को शामिल किया गया था। किन्तु नगर विकास विभाग के नोटिफिकेशन में राजस्व गांव तो नगर पालिका परिषद की सीमा विस्तार में शामिल कर लिए गए किन्तु उनके तीन मजरों जगनेहटा, दरामनगर व वादीनगर को छोड़ दिया गया था। चुनाव के समय मामला आया-गया हो गया। किन्तु कुछ दिनों बाद यहां नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना तो दूर उन्हें आय जाति समेत कई प्रमाण पत्र तक नहीं बन पा रहे थे। क्योंकि राजस्व गांव शहर में शामिल होने के बाद इन मजरों को न तो ग्रामीण और न ही शहरी क्षेत्र का माना जा रहा था। इस मामले को रितेश मिश्रा और अजय कुमार ने धीरे-धीरे आंदोलन का रुप दिया। करीब 11 माह बाद डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीएम को इन गांवों को शहरी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं। एडीएम ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अब जल्द ही यहां के लोगों को शहरी सीमा में शामिल कर लिया जाएगा।
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इन गांवों को भेजा गया प्रस्ताव
जिला प्रशासन ने जिन तीन गांवों को शहरी क्षेत्र का दर्जा दिए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है उनमें जगनेहटा, दरामनगर व वादीनगर शामिल हैं। जिनकी लगभग ढाई हजार की आबादी बताई जा रही है। पूर्व में हुए सीमा विस्तार में बड़ेल, जिंहौली, कोठीडीह, ओबरी, बनवा,फैजुल्लागंज, ढकौली व पैसार आदि राजस्व गांव शामिल किए गए थे।
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सीमा विस्तार के बाद राजस्व गांवों के तीन मजरों को शहरी सीमा में शामिल किए जाने को लेकर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेेजा गया है। जिस पर अंतिम मुहर लगने के बाद इन्हें नगर पालिका में शामिल कर सुविधाएं दी जाने लगेगी।
संदीप कुमार गुप्ता, एडीएम।